UN में भारत ने शहबाज शरीफ सरकार को क्यों कहा ‘Form 47 Government’? क्या हैं इसके मायने, कश्मीर मुद्दे पर भी पाक को लिया आड़े हाथों
UN में भारत ने शहबाज शरीफ सरकार को ‘Form 47 Government’ क्यों कहा? जानिए Form 47 का मतलब, 2024 के चुनाव विवाद और कश्मीर मुद्दे पर भारत के जवाब की पूरी कहानी.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए भाषण पर भारत ने जवाब दिया है. भारत के स्थायी मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के प्रतिनिधि के बयान पर सवाल उठाते हुए उसके राजनीतिक और आतंकवाद से जुड़े रिकॉर्ड का जिक्र किया.
पाकिस्तान के भाषण पर जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए पेटल गहलोत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रतिनिधि की ओर से इस दोपहर कुछ “अजीब” बातें कही गईं. उन्होंने कहा कि यह उस समय हुआ है जब न्यूयॉर्क सिटी और दुनिया ने 9/11 आतंकी हमले की 25वीं बरसी मनाई है.
पेटल गहलोत ने कहा कि इस संदर्भ को ध्यान में रखना जरूरी है, क्योंकि 9/11 हमले का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान की सेना की प्रमुख अकादमी के ठीक पास रह रहा था. उन्होंने कहा कि जिस संस्था यानी पाकिस्तानी सेना के पास ओसामा बिन लादेन रह रहा था, उसी संस्था की पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने आज संयुक्त राष्ट्र में काफी तारीफ की. दरअसल, शहबाज शरीफ ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए पाक सेना की तरीफ की थी और कहा था कि आसिम मुनीर के अंडर पाकिस्कानी आर्मी ने भारत को कड़ा जवाब दिया.
Form 47 Govt पर क्या कहा?
पेटल गहलोत ने इसके बाद शहबाज शरीफ सरकार को लेकर पाकिस्तान में इस्तेमाल होने वाले “Form 47 government” शब्द का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लोग खुद ऐसी सरकार को “Form 47 सरकार” कहते हैं.
क्या है ‘Form 47 सरकार’?
पाकिस्तानी राजनीति में “Form 47 सरकार” एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल विपक्षी दलों और सरकार के आलोचकों की ओर से किया जाता है. इसके जरिए वे दावा करते हैं कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार को जनता का वास्तविक जनादेश हासिल नहीं है और यह सरकार चुनाव परिणामों में कथित हेरफेर के जरिए सत्ता में आई.
आखिर Form 47 क्या है?
पाकिस्तान के चुनाव आयोग यानी Election Commission of Pakistan (ECP) के अनुसार, Form 47 एक आधिकारिक चुनावी दस्तावेज है. इसका इस्तेमाल रिटर्निंग ऑफिसर (RO) किसी पूरे निर्वाचन क्षेत्र के वोटों की गिनती का शुरुआती और संयुक्त आंकड़ा तैयार करने के लिए करता है. ECP के चुनाव संबंधी दस्तावेज में इसे “Provisional Consolidated Statement of Results of the Count” यानी वोटों की गिनती का अस्थायी तौर पर इकट्टा किया गया नतीजा बताया.
वहीं Form 45 हर एक मतदान केंद्र पर वोटों की गिनती के बाद तैयार किया जाने वाला दस्तावेज है. ECP के अनुसार, इसे मतदान केंद्र के प्रिजाइडिंग ऑफिसर तैयार करते हैं और यह वोटों की गिनती का रिकॉर्ड होता है. इसके बाद अलग-अलग मतदान केंद्रों से मिले आंकड़ों को मिलाकर Form 47 में पूरे निर्वाचन क्षेत्र का अस्थायी संयुक्त परिणाम तैयार किया जाता है.
2024 के चुनाव के बाद क्यों हुआ विवाद?
8 फरवरी 2024 को पाकिस्तान में आम चुनाव हुए थे. चुनाव के बाद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) और उसके समर्थकों सहित कई आलोचकों ने आरोप लगाया कि उनके उम्मीदवारों के वोटों और चुनावी जनादेश में हेरफेर की गई.
क्यों कहते हैं फॉर्म 47 सरकार?
PTI नेताओं ने दावा किया था कि मतदान केंद्रों पर तैयार किए गए Form 45 के अनुसार उनके समर्थन वाले निर्दलीय उम्मीदवारों ने बड़ी संख्या में नेशनल असेंबली सीटों पर जीत हासिल की थी. इसके बावजूद बाद में Form 47 में जारी किए गए परिणामों में कई सीटों पर नतीजे अलग दिखाई दिए.
इसी कथित अंतर के आधार पर विपक्षी नेताओं और आलोचकों ने शहबाज शरीफ सरकार और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों को “Form 47 के प्रोडक्ट” कहना शुरू किया. इसका मतलब यह लगाया गया कि सरकार जनता के वास्तविक वोटों के बजाय चुनावी दस्तावेजों में कथित हेरफेर के कारण बनी.
विपक्ष का क्या आरोप रहा?
विपक्षी नेताओं का आरोप रहा कि मतदान केंद्रों पर तैयार किए गए Form 45 में दर्ज आंकड़ों और बाद में तैयार Form 47 के आंकड़ों में कुछ सीटों पर अंतर था. PTI और उसके समर्थकों ने आरोप लगाया कि रातोंरात चुनावी आंकड़ों में बदलाव किया गया और मतदान केंद्रों पर जीतने वाले उम्मीदवारों की जगह सत्तारूढ़ गठबंधन के उम्मीदवारों को विजेता घोषित किया गया.
इन आरोपों के मुताबिक, Form 47 तैयार करने के दौरान आंकड़ों में कथित बदलाव किए गए और इसका फायदा मुख्य रूप से शहबाज शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) को मिला.
पाकिस्तान ने यूएन में उठाया कश्मीर का मुद्दा?
यूएन में अपने संबोधन के दौरान पाकिस्तान ने एक बार फिर कश्मीर का राग अलापा था. अपने संबोधन के दौरान शहबाज शरीफ ने कहा कि कश्मीर विवाद का “न्यायपूर्ण और उचित समाधान” होना चाहिए. शरीफ ने दावा किया कि कश्मीरी लोग संयुक्त राष्ट्र की ओर से उसके संरक्षण में “स्वतंत्र और निष्पक्ष जनमत संग्रह” कराने की प्रतिबद्धता पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि कश्मीर की कई पीढ़ियों ने “अवैध कब्जे, मनमानी हिरासत, न्यायेतर हत्याओं, जबरन गायब किए जाने, यौन हिंसा और सामूहिक सजा” का सामना किया है. शरीफ ने कहा कि कश्मीर विवाद का समाधान न्यायपूर्ण और उचित तरीके से किया जाना जरूरी है, उन्होंने कहा कि करीब आठ दशकों से कश्मीरी लोग संयुक्त राष्ट्र से उसके संरक्षण में स्वतंत्र और निष्पक्ष जनमत संग्रह कराने की प्रतिबद्धता पूरी करने का इंतजार कर रहे हैं.
भारत ने क्या दिया जवाब?
यूएन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का जवाब देते हुए भारत ने कहा कि पाक आतंकवाद को बढ़ावा देने का काम करता है. पेटल गहलोत ने चेतावनी दी कि पाकिस्तान के तरफ से होने वाले आंतवाद के खतरनाक नतीजे होने वाले हैं.
पेटल गहलोत ने कहा, "इस पूरे मुद्दे की जड़ पाकिस्तान की लंबे समय से चली आ रही सीमा पार आतंकवाद की नीति है. भारत ने पिछले साल दिखा दिया था कि आतंकवादियों के लिए न तो भागने की जगह होगी और न ही छिपने की. आतंकवाद से अपनी रक्षा करना हमारा अधिकार है और भारत आगे भी इस अधिकार का इस्तेमाल करता रहेगा."
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की ओर से होने वाले आतंकवाद के परिणाम उसे भुगतने होंगे. भारत को भरोसा है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा पाकिस्तान और उसकी नीतियों की वास्तविकता को पहचानेगी, न कि उसके प्रतिनिधि की ओर से पेश की जा रही गलत तस्वीर पर भरोसा करेगी.
पेटल गहलोत ने आगे कहा, "हर साल झूठी बातें दोहराने से वे सच नहीं बन जातीं. पाकिस्तान का आतंकवाद, धोखेबाजी और दोहरा रवैया न तो उसके लिए फायदेमंद होगा और न ही दुनिया के लिए."




