सेना में गड़बड़ी नहीं बर्दाश्त, कौन हैं वो 2 पूर्व रक्षा मंत्री जिन्हें चीन में मिली मौत की सजा
चीन में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व रक्षा मंत्री Wei Fenghe और Li Shangfu को मौत की सजा सुनाई गई है. दोनों पर रिश्वत लेने, पद का दुरुपयोग करने और सैन्य तंत्र में भ्रष्टाचार फैलाने के आरोप लगे थे. वेई फेंगहे 2018 से 2023 तक रक्षा मंत्री रहे, जबकि ली शांगफू ने 2023 में कुछ महीनों तक यह जिम्मेदारी संभाली थी.
चीन में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम के बीच एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला सामने आया है. देश के दो पूर्व रक्षा मंत्री Wei Fenghe और Li Shangfu को भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में मौत की सजा सुनाई गई है, हालांकि इस सजा पर दो साल की मोहलत (reprieve) दी गई है.
यह फैसला चीन की सरकारी एजेंसी Xinhua News Agency की ओर से जारी बयान में सामने आया. इस कार्रवाई को राष्ट्रपति Xi Jinping के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है.
कौन है Wei Fenghe?
वेई फेंगहे 2018 से 2023 तक चीन के रक्षा मंत्री रहे और इस दौरान उन्होंने देश की सैन्य रणनीति में अहम भूमिका निभाई. उनकी सबसे बड़ी पहचान यह रही कि वे पारंपरिक ग्राउंड फोर्स से नहीं, बल्कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की रॉकेट फोर्स से जुड़े हुए थे. वे PLA रॉकेट फोर्स के कमांडर रह चुके हैं. चीन के पहले ऐसे रक्षा मंत्री थे जो ग्राउंड फोर्स बैकग्राउंड से नहीं आए. सैन्य आधुनिकीकरण और मिसाइल क्षमता को मजबूत करने में उनकी भूमिका मानी जाती है. हालांकि, 2024 में उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे, जिसके बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया. अब उन्हें रिश्वत लेने और पद का दुरुपयोग करने के आरोप में मौत की सजा (स्थगन के साथ) सुनाई गई है.
क्या है Li Shangfu की कहानी?
ली शांगफू ने वेई फेंगहे के बाद 2023 में चीन के रक्षा मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला, लेकिन उनका कार्यकाल बेहद छोटा रहा. वे पेशे से एयरोस्पेस इंजीनियर हैं. चीन के रक्षा क्षेत्र में तकनीकी और स्पेस प्रोग्राम से जुड़े रहे. 2023 में अचानक सार्वजनिक जीवन से गायब हो गए, जिससे कई तरह की अटकलें लगीं. बाद में सामने आया कि उन पर भी भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच चल रही थी. जांच के बाद उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया और अब उन्हें भी मौत की सजा (स्थगन के साथ) दी गई है.
क्या थे दोनों नेताओं पर आरोप?
सैन्य अदालत के फैसले के मुताबिक, वेई फेंगहे को रिश्वत लेने का दोषी पाया गया, जबकि ली शांगफू पर रिश्वत लेने और देने दोनों के आरोप साबित हुए हैं. हालांकि, आधिकारिक बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि रिश्वत की रकम कितनी थी. यह मामला चीन की सेना और उच्च स्तर की राजनीति में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करता है, जिस पर लंबे समय से कार्रवाई की मांग उठती रही है.
क्या है 'डेथ सेंटेंस विद रिप्रीव'?
दोनों नेताओं को “डेथ सेंटेंस विद टू-ईयर रिप्रीव” यानी मौत की सजा सुनाई गई है, लेकिन इसे तुरंत लागू नहीं किया जाएगा. इस सजा के तहत, दो साल तक सजा पर रोक रहेगी. इस दौरान अगर कोई और गंभीर अपराध नहीं होता है, तो सजा को उम्रकैद में बदला जा सकता है, लेकिन इस मामले में साफ कर दिया गया है कि उम्रकैद बिना पैरोल और बिना किसी रियायत के होगी इसके अलावा, दोनों नेताओं के राजनीतिक अधिकार जीवनभर के लिए छीन लिए गए हैं और उनकी पूरी निजी संपत्ति जब्त कर ली गई है.
क्या यह चीन में सबसे बड़ी कार्रवाई है?
बताया जा रहा है कि 2012 में Xi Jinping द्वारा शुरू किए गए एंटी-करप्शन अभियान के बाद यह वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के खिलाफ सबसे कड़ी सजा है. यह कार्रवाई यह भी दिखाती है कि चीन की सरकार अब सेना के शीर्ष स्तर पर भी भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपना रही है.
क्या इससे चीन की राजनीति और सेना पर असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले के दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं. इससे न सिर्फ सेना में अनुशासन बढ़ेगा, बल्कि राजनीतिक नेतृत्व की पकड़ भी मजबूत होगी. हालांकि, कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाई सत्ता के केंद्रीकरण का संकेत भी हो सकती है.




