बशर अल-असद से पहले इन नेताओं को भी मिली मौत की सजा, किसी को फांसी तो किसी को गोली से उड़ाया गया
बशर अल-असद को मौत की सजा के बाद जानिए सद्दाम हुसैन, जुल्फिकार अली भुट्टो और हिदेकी तोजो समेत उन नेताओं के बारे में जिन्हें मृत्युदंड मिला और फांसी दी गई.
सीरिया की अदालत द्वारा बशर अल-असद को मौत की सजा सुनाए जाने के साथ ही इतिहास के उन शासकों और नेताओं की चर्चा भी शुरू हो गई है, जिन्हें सत्ता से बेदखल होने के बाद मृत्युदंड मिला. इनमें इराक के सद्दाम हुसैन, पाकिस्तान के जुल्फिकार अली भुट्टो, जापान के हिदेकी तोजो, हंगरी के इमरे नाज और नॉर्वे के विदकुन क्विसलिंग जैसे नेता शामिल हैं, जिन्हें फांसी दी गई. वहीं रोमानिया के निकोलाए चाउशेस्कु और फ्रांस के पियरे लावाल जैसे नेताओं को फायरिंग स्क्वॉड ने गोली मारकर मौत की सजा दी. इन मामलों में कुछ फैसले युद्ध अपराधों, कुछ राजद्रोह और कुछ मानवता के खिलाफ अपराधों से जुड़े थे.
सीरिया की अदालत ने 11 अगस्त 2026 को देश के अपदस्थ राष्ट्रपति बशर अल-असद को उनकी गैर-मौजूदगी में मौत की सजा सुनाई. गृहयुद्ध के दौरान युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराधों से जुड़े मामलों में दोषी ठहराए गए असद दिसंबर 2024 में सत्ता से बेदखल होने के बाद रूस में रह रहे हैं. ऐसे में अदालत का यह फैसला फिलहाल मृत्युदंड दिए जाने के बराबर नहीं है.
असद के साथ पूर्व अधिकारियों पर भी कसा शिकंजा
सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित अदालत की कार्यवाही में जज फखरुद्दीन अल-आर्यन ने कहा कि बशर अल-असद ने युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध करने के लिए सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल किया. अदालत ने दक्षिणी सीरिया के डेरा प्रांत में राजनीतिक सुरक्षा के पूर्व प्रमुख आतिफ नजीब को भी मौत की सजा सुनाई.
असद के चचेरे भाई आतिफ नजीब पर हिरासत में लिए गए लोगों, जिनमें बच्चे भी शामिल थे, को प्रताड़ित करने और संघर्ष के दौरान हुई कई मौतों के लिए जिम्मेदार होने के आरोप लगाए गए. सुनवाई के दौरान नजीब कड़ी सुरक्षा के बीच कैदी की वर्दी में अदालत में मौजूद था. वह पूर्व असद सरकार के उन वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल है, जिनके खिलाफ अंतरिम प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की है.
असद परिवार का तीन दशक लंबा शासन
बशर अल-असद ने अपने पिता हाफेज अल-असद की मृत्यु के बाद वर्ष 2000 में सीरिया की सत्ता संभाली. हाफेज ने करीब तीन दशक तक देश पर शासन किया था. बशर के शासन का सबसे बड़ा दौर 2011 में शुरू हुए सीरियाई गृहयुद्ध से जुड़ा रहा, जब अरब स्प्रिंग की लहर के बीच लोकतांत्रिक सुधारों की मांग को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए.
डेरा में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के खिलाफ सुरक्षा बलों की कठोर कार्रवाई के बाद आंदोलन तेजी से दूसरे इलाकों में फैल गया. देखते ही देखते यह व्यापक सशस्त्र संघर्ष में बदल गया, जिसमें सरकारी सेना, विद्रोही गुटों और कई विदेशी शक्तियों ने अलग-अलग पक्षों से हस्तक्षेप किया. वर्षों चले युद्ध में बड़े पैमाने पर मौतों, यातना, जबरन गायब किए जाने और अन्य गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप सामने आए.
दिसंबर 2024 में विद्रोही ताकतों के दमिश्क की ओर बढ़ने के बीच असद सत्ता से बेदखल हो गए और अपने परिवार के साथ रूस चले गए. उनके खिलाफ आया मौजूदा फैसला इसी लंबे संघर्ष के दौरान किए गए कथित अपराधों को लेकर है. हालांकि, रूस में मौजूद होने के कारण सीरियाई अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा को फिलहाल लागू कर पाना संभव नहीं है.
1945: पियरे लावाल - फ्रांस
फ्रांस के पूर्व प्रधानमंत्री पियरे लावाल पर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजी जर्मनी के साथ सहयोग करने और विची शासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के आरोप लगे. युद्ध के बाद उन्हें राजद्रोह का दोषी ठहराकर मौत की सजा सुनाई गई. 15 अक्टूबर 1945 को उन्हें फांसी नहीं दी गई, बल्कि फायरिंग स्क्वॉड ने गोली मारकर उनकी सजा लागू की.
1945: विदकुन क्विसलिंग - नॉर्वे
नॉर्वे के नेता विदकुन क्विसलिंग ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजी जर्मनी के साथ सहयोग किया और जर्मन कब्जे के दौरान नॉर्वे की कठपुतली सरकार का नेतृत्व किया. युद्ध खत्म होने के बाद उन पर देशद्रोह और नाजियों के साथ सहयोग के आरोप में मुकदमा चला. अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई और 24 अक्टूबर 1945 को उन्हें फांसी दे दी गई.
1948: हिदेकी तोजो - जापान
जापान के पूर्व प्रधानमंत्री और द्वितीय विश्व युद्ध के प्रमुख नेताओं में शामिल हिदेकी तोजो पर टोक्यो ट्रायल में युद्ध अपराधों का मुकदमा चला. उन्हें आक्रामक युद्ध शुरू करने और युद्धकालीन अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया. अंतरराष्ट्रीय सैन्य न्यायाधिकरण ने उन्हें मौत की सजा सुनाई. 23 दिसंबर 1948 को तोजो को टोक्यो की सुगामो जेल में फांसी दे दी गई.
1958: इमरे नाज - हंगरी
हंगरी के पूर्व प्रधानमंत्री इमरे नाज 1956 की हंगेरियन क्रांति के प्रमुख राजनीतिक चेहरों में थे. उन्होंने सोवियत प्रभाव से बाहर निकलने और हंगरी को अधिक स्वतंत्र बनाने की कोशिश की. सोवियत सेना के हस्तक्षेप के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया. गुप्त मुकदमे में उन्हें राजद्रोह का दोषी ठहराकर मौत की सजा दी गई और 16 जून 1958 को फांसी दे दी गई.
1979: जुल्फिकार अली भुट्टो - पाकिस्तान
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो को 1977 में जनरल जिया-उल-हक के सैन्य तख्तापलट के बाद सत्ता से हटा दिया गया. उन पर राजनीतिक विरोधी अहमद रजा कसूरी के पिता की हत्या की साजिश का आरोप लगा. लाहौर हाईकोर्ट ने उन्हें मौत की सजा सुनाई, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा. 4 अप्रैल 1979 को रावलपिंडी जेल में उन्हें फांसी दी गई.
1989: निकोलाए चाउशेस्कु - रोमानिया
रोमानिया के कम्युनिस्ट नेता निकोलाए चाउशेस्कु ने दशकों तक देश पर कठोर शासन किया. दिसंबर 1989 में जनविद्रोह के दौरान उनका शासन गिर गया और उन्हें उनकी पत्नी एलेना के साथ गिरफ्तार कर लिया गया. एक बेहद संक्षिप्त सैन्य मुकदमे में दोनों को नरसंहार, सत्ता के दुरुपयोग और आर्थिक तबाही के आरोपों में मौत की सजा सुनाई गई. 25 दिसंबर 1989 को फायरिंग स्क्वॉड ने दोनों को गोली मार दी.
2006: सद्दाम हुसैन - इराक
इराक के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को सत्ता से हटाए जाने के बाद इराकी हाई ट्रिब्यूनल में मुकदमे का सामना करना पड़ा. उन्हें दुजैल में 148 लोगों की हत्या सहित मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी ठहराया गया. नवंबर 2006 में उन्हें मौत की सजा सुनाई गई और अपील खारिज होने के बाद 30 दिसंबर 2006 को बगदाद में उन्हें फांसी दे दी गई.




