पश्चिम बंगाल की सियासत एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी है, जहां इस बार मुकाबला सिर्फ वोटों का नहीं बल्कि विचारधाराओं का भी बनता दिख रहा है. एक तरफ ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) अपनी सत्ता बचाने के लिए मैदान में है, तो दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी (BJP) हिंदुत्व और संगठन की ताकत के साथ चुनौती पेश कर रही है. इसी बीच SIR जैसे मुद्दे चुनावी बहस को और भी ज्यादा तीखा बना रहे हैं. ग्राउंड रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बार माहौल पहले से काफी अलग है- जनता के रिएक्शन बदलते दिख रहे हैं, चुनावी रणनीतियां खुलकर सामने आ रही हैं और हर पार्टी अपनी “फील्डिंग” मजबूत करने में जुटी है. सवाल यही है कि क्या इस बार हिंदुत्व का मुद्दा भारी पड़ेगा या SIR और लोकल फैक्टर TMC को बढ़त दिलाएंगे?