शराब और शबाब के गुलाम बनकर सूअर का गोश्त खाने तक पर उतर आए मोहम्मद अली जिन्नाह ने न अपनी ऊल-जुलूल शौकों का खातिर भारत दांव पर लगाया. अपितु उन्होंने अपनी जिंदगी भी मौज-मस्ती अय्याशियों के चलते तबाह कर ली. आज जो लोग भारत का ही अन्न खाकर और पानी पीकर भारत में रहकर भारत के बंटवारे के जिम्मेदार घाघ-मास्टरमाइंड मरहूम मोहम्मद अली जिन्नाह को ‘मासूम, बिचारा, न-समझ, इस्तेमाल करके फेंक दिया गया, लाचार-मजबूर था अंग्रेजों के सामने’ जैसे तकिया-कलामों का इस्तेमाल करके उसको देश के बंटवारे के लिए ‘निर्दोष’ मानते हैं. सच में ऐसे लोगों के अंदर भारत में रहते हुए भारत कम जिन्नाह का ‘जिन्न’ ज्यादा घुसा हुआ है. भारत में मौजूद ऐसे जिन्ना समर्थकों से सतर्क रहने की जरूरत है.