एक डॉक्टर ने इसे अपने पूरे मेडिकल करियर का सबसे जोखिम भरा और असामान्य केस बताया है. 11वीं डिलीवरी के दौरान मां की हालत बेहद नाजुक थी, शरीर पूरी तरह कमजोर हो चुका था, जबकि नवजात शिशु गंभीर एनीमिया से जूझ रहा था. सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि गर्भ में अम्नियोटिक फ्लूड लगभग खत्म हो चुका था, जिससे सामान्य प्रसव असंभव माना जा रहा था. सीमित संसाधनों और अत्यधिक जोखिम के बावजूद डॉक्टरों की सूझबूझ, सही मैनेजमेंट और टीमवर्क ने चमत्कार कर दिखाया. समय पर लिए गए फैसलों से मां और बच्चे दोनों की जान बचाई जा सकी.