कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक (DGP) डॉ. के. रामचंद्र राव से जुड़ा एक वायरल वीडियो एक बार फिर भारतीय पुलिस सेवा की जवाबदेही और आंतरिक निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है. यह मामला अचानक सामने आया कोई नया घटनाक्रम नहीं, बल्कि उन आरोपों की कड़ी है, जो बीते कई वर्षों से इस अधिकारी के नाम के साथ जुड़े रहे हैं. बताया जा रहा है कि इससे करीब 7–8 साल पहले भी डॉ. के. रामचंद्र राव से जुड़ा एक वीडियो सामने आया था. उस समय भी मामला चर्चा में रहा, लेकिन न तो कोई ठोस विभागीय कार्रवाई हुई और न ही सिस्टम ने सख्ती दिखाई. आज उसी कथित ढील का नतीजा एक बार फिर सार्वजनिक विवाद के रूप में सामने है, जिसमें सीसीटीवी फुटेज के जरिए गंभीर आरोपों की चर्चा हो रही है. उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी डॉ. विक्रम सिंह ने स्टेट मिरर हिंदी से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे की विफलता को उजागर करता है. उनके मुताबिक, जब सिस्टम समय पर फैसला नहीं करता, तो उसकी कीमत संस्थाओं की साख को चुकानी पड़ती है.