फ्लाईदुबई की फ्लाइट में जो हुआ, उसने सिर्फ 180 यात्रियों की जान को खतरे में नहीं डाला, बल्कि इजराइल और अंतरराष्ट्रीय एविएशन सिक्योरिटी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए. कॉकपिट के अंदर हुए हमले के बावजूद कैप्टन स्मित मच्छार ने अपनी जान की परवाह किए बिना विमान को संभाला और बड़े हादसे को टाल दिया. लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल है—एक ऐसे पायलट को फ्लाइट में आने की अनुमति कैसे मिली, जिसे लेकर पहले से ही गंभीर सवाल मौजूद थे? इजराइल की सुरक्षा एजेंसियों और मोसाद की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं. मेजर जनरल जीडी बक्शी ने इस पूरे मामले को बड़ी सुरक्षा चूक बताते हुए कैप्टन मच्छार को अशोक चक्र देने की मांग की है.