दुनिया अब धीरे-धीरे पेट्रोल और डीजल वाली गाड़ियों से आगे बढ़कर Electric Vehicles यानी EV की तरफ दौड़ रही है. यह सिर्फ ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का बदलाव नहीं, बल्कि आने वाले समय की सबसे बड़ी आर्थिक और तकनीकी लड़ाई मानी जा रही है. आज जिस देश के पास बैटरी, लिथियम और EV टेक्नोलॉजी का कंट्रोल होगा, वही भविष्य की ग्लोबल इकॉनमी पर राज करेगा. इस रेस में चीन फिलहाल सबसे आगे दिखाई देता है. BYD जैसी चीनी कंपनियां अब Tesla को सीधी चुनौती दे रही हैं, जबकि भारत में Tata Motors और Mahindra तेजी से EV revolution को आगे बढ़ा रहे हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या भारत इस EV War में चीन जैसी ताकत को चुनौती दे पाएगा, या फिर दुनिया की बैटरी इकॉनमी पर ड्रैगन का ही दबदबा रहेगा?