भारतीय संसदीय इतिहास में कुछ भाषण ऐसे हैं जो समय के साथ और ज्यादा प्रासंगिक होते चले जाते हैं. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का संसद में दिया गया यह भाषण भी उन्हीं में से एक माना जाता है. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर संसद में अटल बिहारी वाजपेयी का वह संबोधन आज भी याद किया जाता है. इस भाषण में उन्होंने नाथूराम गोडसे, महात्मा गांधी की हत्या, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर लगाए गए आरोपों और प्रतिबंध की राजनीति जैसे बेहद संवेदनशील मुद्दों पर तर्कपूर्ण और संतुलित ढंग से अपनी बात रखी थी. आज, जब राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप और वैचारिक ध्रुवीकरण बढ़ता जा रहा है, अटल बिहारी वाजपेयी का यह भाषण एक संतुलित और लोकतांत्रिक दृष्टिकोण की मिसाल के रूप में देखा जाता है.