देशभर में दशहरे पर रावण का पुतला जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व मनाया जाता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में एक ऐसा गांव भी है, जहां रावण का पुतला जलाने की परंपरा नहीं है. इस गांव का नाम है बिसरख, जिसे स्थानीय मान्यता के मुताबिक रावण की जन्मस्थली माना जाता है. यहां के कई ग्रामीण रावण को अपना पूर्वज और ‘बाबा’ मानते हैं. गांव में रावण दहन और रामलीला को लेकर ऐसी मान्यताएं प्रचलित हैं, जिनमें अनहोनी और मौतों से जुड़े पुराने किस्से भी शामिल हैं. आखिर क्यों बिसरख में रावण का पुतला नहीं जलाया जाता? क्या है अधूरी रामलीला की कहानी और रावण को लेकर ग्रामीणों की क्या सोच है? देखिए, गांव की गलियों में लोगों से हुई बातचीत पर आधारित यह खास ग्राउंड रिपोर्ट.