असम का वो दौर, जब सड़कों पर आंदोलन उफान पर थे, पहचान की लड़ाई अपने चरम पर थी और सरकार हर दिन नई चुनौतियों से जूझ रही थी. इसी उथल-पुथल भरे समय में एक नेता सामने आते हैं- हितेश्वर सैकिया. सैकिया की कहानी सिर्फ एक राजनेता की जीवनी नहीं, बल्कि उस असम की तस्वीर है जो संघर्ष, अस्थिरता और बड़े राजनीतिक बदलावों के बीच खुद को संभालने की कोशिश कर रहा था. उन्हें समझना दरअसल उस दौर को समझना है, जहां हर फैसला या तो हालात को काबू में लाता था या नए विवाद खड़े कर देता था. वो सच में एक कुशल ‘क्राइसिस मैनेजर’ थे या फिर एक विवादित मुख्यमंत्री- यह सवाल आज भी चर्चा में है.