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कांवड़ यात्रा खत्म होते ही हरिद्वार का हाल बेहाल! हर की पौड़ी पर कचरा, चप्पल-जूते और बोतलों में मिला पेशाब, Video

कांवड़ यात्रा के बाद हरिद्वार की सफाई को लेकर एक वीडियो ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है. वीडियो में बिखरे जूते-चप्पल, कपड़े और पेशाब भरी बोतलें भी नजर आ रही हैं.

कांवड़ यात्रा खत्म होते ही हरिद्वार का हाल बेहाल! हर की पौड़ी पर कचरा, चप्पल-जूते और बोतलों में मिला पेशाब, Video
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( Image Source:  x-@virjust18 and @Sachingupta )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत3 Mins Read

Updated on: 12 Aug 2026 1:24 PM IST

कांवड़ यात्रा खत्म होने के बाद हरिद्वार की हर की पौड़ी से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें घाट और चेंजिंग रूम के आसपास की सफाई व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं. वीडियो में सफाईकर्मी चेंजिंग रूम की सफाई करता दिखाई दे रहा है और आसपास कचरा नजर आ रहा है.

वायरल वीडियो में कपड़ों के साथ बड़ी संख्या में चप्पल-जूते और पानी की बोतलें दिखाई देती हैं. कुछ बोतलों में पेशाब भरा होने का दावा भी किया जा रहा है. वीडियो सामने आने के बाद हर की पौड़ी की सफाई व्यवस्था और कांवड़ यात्रा के दौरान शौचालयों की पर्याप्त व्यवस्था को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है.

चेंजिंग रूम में दिखा कचरा

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में सफाईकर्मी चेंजिंग रूम की सफाई करता नजर आ रहा है. यहां कपड़ों के साथ बड़ी संख्या में जूते-चप्पल और दूसरी चीजें पड़ी दिखाई दे रही हैं.

बोतलों में पेशाब भरकर फेंकी

कांवड़ यात्रा खत्म होने के बाद हर की पौड़ी पर सफाई का काम शुरू किया गया. इस दौरान चेंजिंग रूम में कई पानी की बोतलें मिलीं, जिनमें पेशाब होने का दावा किया गया है. सफाईकर्मियों का कहना है कि ये बोतलें कांवड़ यात्री वहां छोड़कर गए.

गंगा किनारे फैली गंदगी पर सवाल

हरिद्वार की हर की पौड़ी गंगा के सबसे प्रमुख घाटों में से एक है और यहां आने वाले श्रद्धालु गंगा को बेहद पवित्र मानते हैं. ऐसे में यात्रा खत्म होने के बाद गंगा किनारे और आसपास सिर्फ कचरा नजर आ रहा है, जिसमें ज्यादातर पॉलीथिन दिख रही हैं. वहीं, सवाल उठ रहा है कि इतनी बड़ी धार्मिक यात्रा के लिए पहले से सफाई और शौचालय की व्यवस्था को और बेहतर क्यों नहीं किया गया.

सफाई के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी

हालांकि, पूरे कचरे के लिए केवल श्रद्धालुओं को जिम्मेदार ठहराना भी सही नहीं होगा. प्रशासन की ओर से पर्याप्त डस्टबिन, मोबाइल टॉयलेट और नियमित सफाई की व्यवस्था जरूरी है, वहीं श्रद्धालुओं की भी जिम्मेदारी है कि वे सार्वजनिक जगहों पर गंदगी न फैलाएं. गंगा और धार्मिक स्थलों की स्वच्छता प्रशासन और आम लोगों, दोनों की साझा जिम्मेदारी है.

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