बहुत गर्मी है, चलो चकराता चलें! पर रुकिए, सुलग रहे हैं उत्तराखंड के जंगल, इसी साल आग के इतने मामले
चकाराता के जंगलों में आग लगने के कारण करीब 5 हेक्टेयर इलाका प्रभावित हो चुका है. हालांकि, कुछ हद तक हालात पर काबू पाया जा चुका है. वहीं, प्रशासन ने फायर वॉचर्स तैनात कर दिए हैं.
चकराता के जंगलों में कैसे लगी आग
उत्तराखंड का चकराता बेहद सुंदर जगह है. अक्सर लोग भीड़ भाड़ से दूर सुकून पाने के लिए इस जगह को चुनते हैं. अगर आपने भी यहां जाने का प्लान बना रहे हैं, तो जरा ठहरिए. यह जगह अब आपके लिए सेफ नहीं है, क्योंकि चकराता के जंगलों में आग लगी है. चकराता में हाल ही में भड़की आग ने हालात को गंभीर बना दिया है, जिससे स्थानीय प्रशासन और वन विभाग लगातार स्थिति पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं.
इस साल अब तक 100 से ज्यादा जंगल की आग की घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं. गर्मी बढ़ने के साथ ही राज्य के कई संवेदनशील वन क्षेत्रों में आग तेजी से फैल रही है, जिससे पर्यावरण, वन्यजीव और वन संपदा को भारी नुकसान पहुंच रहा है.
चकराता में कैसे लगी आग?
चकराता वन प्रभाग के साहिया रेंज में कोंठा गांव के पास शनिवार सुबह लगभग 8:30 बजे जंगल में अचानक आग लग गई. आग तेजी से फैलकर करीब 5 हेक्टेयर क्षेत्र तक पहुंच गई, जिसमें पुराने पेड़ जैसे बांज, बुरांश, काफल और देवदार को भारी नुकसान हुआ. सूखी घास और पत्तियों ने आग को और तेज कर दिया, जिससे पूरा इलाका प्रभावित हुआ.
फायर कंट्रोल के लिए प्रशासन की तैयारी
- वन विभाग ने इस साल आग से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं:
- 5,000 से 6,000 फायर वॉचर्स की तैनाती
- हर कर्मचारी के लिए ₹10 लाख का बीमा
- फायर प्रोटेक्शन किट्स की व्यवस्था
- त्वरित प्रतिक्रिया टीम और मोबाइल यूनिट्स की तैनाती
- ‘गोल्डन ऑवर’ में तुरंत कार्रवाई पर जोर
- वर्कशॉप और मॉक ड्रिल का आयोजन
- इसके अलावा चारधाम यात्रा शुरू होने के कारण वन क्षेत्रों में अलर्ट और बढ़ा दिया गया है तथा छुट्टियां भी सीमित कर दी गई हैं.
इस साल कितनी आग लगी और कितना नुकसान हुआ?
- 15 फरवरी से 17 अप्रैल के बीच इस वर्ष उत्तराखंड में कुल 111 वनाग्नि घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें करीब 63 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ. वहीं पिछले वर्ष इसी अवधि में 83 घटनाएं हुई थीं, जिनमें लगभग 76 हेक्टेयर वन क्षेत्र जल गया था.
- इससे साफ होता है कि इस बार घटनाओं की संख्या बढ़ी है, लेकिन प्रभावित क्षेत्र अपेक्षाकृत कम रहा, जो बेहतर फायर मैनेजमेंट की ओर संकेत करता है.
सबसे ज्यादा आग कहां लग रही है?
वन विभाग के अनुसार, इस बार जिन क्षेत्रों में सबसे अधिक आग की घटनाएं दर्ज की गई हैं, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- बागेश्वर
- टिहरी
- अल्मोड़ा
- पौड़ी
- बद्रीनाथ वन प्रभाग
- केदारनाथ वन प्रभाग
- चकराता क्षेत्र
इन इलाकों में घने जंगल, सूखी वनस्पति और दुर्गम भौगोलिक स्थिति आग को तेजी से फैलने में मदद करती है.
जंगलों में आग लगने के प्रमुख कारण
- गर्मी के मौसम में सूखी पत्तियों और घास का जमा होना.
- तेज हवाओं का चलना, जिससे आग तेजी से फैलती है.
- कुछ मामलों में मानव लापरवाही या अनजाने में लगी आग.
- जंगलों के अंदर बढ़ती गतिविधियां और पर्यटन दबाव.
- इन सभी कारणों के संयोजन से आग की घटनाएं और गंभीर हो जाती हैं.




