Char Dham Yatra 2026: क्यों हर साल अक्षय तृतीया पर खुलते हैं चारधाम के कपाट? यमराज की छोटी बहन से जुड़ा है महत्व
30 अप्रैल को अक्षय तृतीया से चार धाम यात्रा की शुरुआत होगी, जिसमें यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट खुलेंगे. जानिए क्यों इस दिन यात्रा शुरू करना शुभ माना जाता है और क्या है इसका धार्मिक रहस्य.
Char Dham Yatra 2026: चार धाम की पवित्र तीर्थ यात्रा 19 अप्रैल को, यानी अक्षय तृतीया के शुभ दिन से शुरू होने जा रही है. यह यात्रा हिंदू धर्म के चार सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों- यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ की होती है. अक्षय तृतीया के दिन यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट खुल जाएंगे. वहीं केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को और बद्रीनाथ धाम के कपाट 24 अप्रैल को खुलेंगे. धार्मिक मान्यता है कि चार धाम यात्रा करने से व्यक्ति के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और वह जन्म-मरण के चक्कर से मुक्त हो जाता है. यह यात्रा न सिर्फ पापों का नाश करती है, बल्कि आत्म-ज्ञान का गहरा अनुभव भी कराती है और आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है. इसलिए हर सनातनी को जीवन में कम से कम एक बार चार धाम यात्रा अवश्य करनी चाहिए.
लेकिन क्या आप जानते हैं अक्षय तृतीया का असली अर्थ क्या है?
अक्षय शब्द का मतलब है जिसका कभी क्षय न हो, यानी जो कभी खत्म न हो. इसी वजह से इस दिन को अक्षय तृतीया कहा जाता है. सनातन धर्म में अक्षय तृतीया को युगादि पर्व भी कहा जाता है. यह बैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करना, दान करना, जप-तप करना और पूजा-अर्चना करना अत्यंत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इन कार्यों से मिलने वाला पुण्य अक्षय होता है यानी वह कभी समाप्त नहीं होता, बल्कि सदैव फल देता रहता है. इस दिन कोई भी नया काम शुरू करना बहुत ही शुभ और सफल माना जाता है.
अक्षय तृतीया का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व
पवित्र ग्रंथों जैसे भविष्य पुराण और नारद पुराण में अक्षय तृतीया का विस्तार से उल्लेख मिलता है. सबसे खास बात यह है कि इस दिन लोग सोना खरीदते हैं. सोना एक ऐसी धातु है जो कभी खराब नहीं होती और सदैव चमकती रहती है. इसलिए अक्षय तृतीया के दिन सोना खरीदने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और भक्तों को धन-समृद्धि, संपन्नता तथा वैभव का आशीर्वाद देती हैं.
अक्षय तृतीया से ही क्यों शुरू होती है चारधाम यात्रा?
अक्षय तृतीया को स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना जाता है. इस दिन किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करने से वह कार्य बिना किसी बाधा के सफल होता है. यही कारण है कि चार धाम यात्रा की शुरुआत भी इसी दिन से की जाती है. इस दिन यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट खुलते हैं. चार धाम यात्रा का क्रम भी बहुत खास है- यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ. यात्रा हमेशा यमुनोत्री से शुरू की जाती है.
यमुनोत्री से यात्रा शुरू करने के पीछे धार्मिक कारण
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यात्रा की शुरुआत यमुनोत्री से करने पर भक्तों को पूरे यात्रा मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा या रुकावट नहीं आती. यमुनोत्री यमुना नदी का उद्गम स्थल है. यमुना यमराज की छोटी बहन हैं. उन्हें यह वरदान प्राप्त है कि उनके पवित्र जल से सभी के दुख, पाप और कष्ट दूर हो जाते हैं. जो श्रद्धालु यमुनोत्री में स्नान करता है, उसे मृत्यु के भय से मुक्ति मिल जाती है. यमराज भी अपनी बहन के भक्तों को विशेष कृपा देते हैं. इसीलिए चार धाम यात्रा की शुरुआत यमुनोत्री से की जाती है. इसके अलावा भौगोलिक दृष्टि से भी यह क्रम बहुत महत्वपूर्ण है. यमुनोत्री चार धामों में सबसे पश्चिम दिशा में स्थित है. यात्रा पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ती है, जो यात्रा को आसान, सुविधाजनक और शुभ बनाती है.




