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कैश, गहने और CCTV: राम मंदिर SIT रिपोर्ट में आखिर ऐसा क्या मिला जिसने ट्रस्ट व्यवस्था पर खड़े कर दिए बड़े सवाल?

राम मंदिर SIT रिपोर्ट में कैश गबन, गहनों के रिकॉर्ड में गड़बड़ी, CCTV निगरानी की कमजोरी और ट्रस्ट प्रशासन की खामियां सामने आई हैं, जिससे नए सवाल खड़े हुए हैं.

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अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान प्रबंधन को लेकर सामने आई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की शुरुआती रिपोर्ट ने मंदिर प्रशासन और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. लगभग 150 पन्नों की इस रिपोर्ट में कैश मैनेजमेंट, कीमती गहनों के रिकॉर्ड, CCTV निगरानी, भर्ती प्रक्रिया और सुरक्षा प्रोटोकॉल में कई बड़ी खामियों का बड़े पैमाने पर जिक्र है. जांच में सामने आए निष्कर्षों ने यह बहस तेज कर दी है कि देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक के प्रशासनिक ढांचे में पारदर्शिता और जवाबदेही को कैसे मजबूत किया जाए.

कैश के प्रबंधन में बड़ी गड़बड़ी, क्या गबन ₹200 करोड़ से अधिक?

SIT की जांच में सबसे गंभीर सवाल मंदिर में आने वाले नकद चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर सामने आए हैं. रिपोर्ट के अनुसार ट्रस्ट ने नकदी की गिनती और उससे जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी मानक बैंकिंग अधिकारियों के बजाय एक निजी एजेंसी को सौंप रखी थी. जांचकर्ताओं को चढ़ावे के संग्रहण, संरक्षण और बैंक में जमा कराने की प्रक्रिया में कई स्तरों पर अनियमितताएं मिलीं. इन खामियों के कारण बड़ी मात्रा में धन के कथित गबन की आशंका व्यक्त की गई है.

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि यह रकम ₹200 करोड़ से अधिक हो सकती है. जांच टीम का मानना है कि कैश हैंडलिंग की पूरी प्रक्रिया में पर्याप्त निगरानी और जवाबदेही का अभाव था.

गायब गहनों और कीमती सामान पर उठे सवाल

राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा सोना, चांदी, बहुमूल्य पत्थर और अन्य कीमती वस्तुएं बड़ी मात्रा में दान की जाती हैं. SIT को जांच के दौरान इन वस्तुओं के रिकॉर्ड और डॉक्यूमेंटेशन में गंभीर कमियां मिलीं. रिपोर्ट के मुताबिक कई मामलों में गहनों और अन्य कीमती वस्तुओं का उचित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था या दस्तावेज अधूरे पाए गए.

जांचकर्ताओं का कहना है कि खराब रिकॉर्ड प्रबंधन के कारण यह सुनिश्चित करना मुश्किल हो गया कि दान में प्राप्त सभी वस्तुएं सुरक्षित रूप से संरक्षित हैं या नहीं. इसने मंदिर की इन्वेंट्री मैनेजमेंट प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

CCTV निगरानी में ब्लाइंड स्पॉट और कथित छेड़छाड़

SIT रिपोर्ट में मंदिर परिसर की CCTV निगरानी व्यवस्था को भी कमजोर बताया गया है. जांच के दौरान ऐसे आरोप सामने आए कि कुछ कर्मचारी कथित तौर पर चोरी या संदिग्ध गतिविधियों से पहले कैमरों के सामने खड़े होकर वीडियोग्राफी को रोक देते थे. इससे कैमरों की रिकॉर्डिंग हो पाई. रिपोर्ट के अनुसार यह स्थिति केवल तकनीकी कमजोरी नहीं बल्कि सक्रिय निगरानी और मॉनिटरिंग व्यवस्था की विफलता को भी दर्शाती है.

जांचकर्ताओं का मानना है कि यदि निगरानी प्रणाली मजबूत और नियमित रूप से मॉनिटर की जाती तो कई संदिग्ध गतिविधियों को रोका जा सकता था.

भर्ती प्रक्रिया और सुरक्षा प्रोटोकॉल में लापरवाही

जांच में मंदिर प्रशासन की भर्ती और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं. SIT के अनुसार स्टाफ की नियुक्ति और सत्यापन के लिए मजबूत प्रक्रिया लागू नहीं की गई थी. रिपोर्ट में एक उदाहरण का उल्लेख किया गया है, जिसमें मंदिर के एक कर्मचारी ने कथित रूप से कैश गिनने के काम के लिए अपने ही जीजा को नियुक्त करा दिया था. इसके अलावा कर्मचारियों द्वारा कई परिचालन नियमों की अनदेखी किए जाने की बात भी सामने आई. जांच में पाया गया कि कुछ कर्मचारी निर्धारित यूनिफॉर्म के बजाय सामान्य कपड़ों में काम कर रहे थे तथा बिना उचित रिकॉर्ड दर्ज किए सामान को परिसर के अंदर और बाहर ले जाया जा रहा था. इससे सुरक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए हैं.

यूपी सरकार को सौंपी गई शुरुआती रिपोर्ट

तीन सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने अपनी 150 पन्नों की शुरुआती रिपोर्ट आधिकारिक रूप से उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंप दी है. रिपोर्ट में सामने आए निष्कर्षों के आधार पर कई ठोस सिफारिशें की गई हैं तथा प्रशासनिक स्तर पर सख्त कार्रवाई की जरूरत बताई गई है. अब आगे की कार्रवाई और निर्णय राज्य सरकार के स्तर पर होने हैं.

SIT ने सुझाए बड़े संस्थागत सुधार

दान प्रबंधन प्रणाली में कथित गड़बड़ियों को समाप्त करने के लिए SIT ने कई महत्वपूर्ण सुधारों की सिफारिश की है. रिपोर्ट में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन का सुझाव दिया गया है. ताकि उसके कामकाज और जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन हो सके. इसके साथ ही मंदिर के दैनिक प्रशासनिक कार्यों की निगरानी के लिए एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने की सिफारिश भी की गई है.

जांच टीम ने मंदिर में प्राप्त सभी दान और चढ़ावे का पिछले पांच वर्षों का स्वतंत्र वित्तीय ऑडिट कराने की भी सलाह दी है. इसके अलावा दान संग्रह, परिवहन और नकदी गिनने की पूरी प्रक्रिया की अनिवार्य वीडियोग्राफी करने का सुझाव दिया गया है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना कम हो सके. रिपोर्ट में कैश गिनती के दौरान सामान्य कपड़े पहनने पर रोक लगाने तथा प्रवेश और निकास द्वारों पर सख्त तलाशी व्यवस्था लागू करने की भी सिफारिश की गई है.

संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई और जांच की प्रगति

SIT ने कथित अनियमितताओं से सीधे जुड़े 20 से अधिक प्रमुख संदिग्धों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की औपचारिक सिफारिश की है. जांच के दौरान लगभग 150 संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान की गई और उनसे पूछताछ की गई. रिपोर्ट के अनुसार जांच के अंतिम चरण तक मंदिर ट्रस्ट के अधिकारियों, प्रशासनिक कर्मचारियों और प्रमुख संदिग्धों के अयोध्या छोड़ने पर कानूनी रोक लगाने की भी सिफारिश की गई है ताकि जांच प्रभावित न हो.

₹72 करोड़ की संपत्ति और लग्जरी सामान जब्त

जांचकर्ताओं ने ऐसे कई कर्मचारियों की पहचान की है जिनका वेतन लगभग ₹18,000 से ₹20,000 प्रतिमाह बताया गया है, लेकिन उनके पास आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति होने के संकेत मिले. SIT के अनुसार जांच के दौरान संदिग्धों से लगभग ₹72 करोड़ मूल्य की नकदी, लग्जरी कारें और स्मार्टफोन जब्त किए गए हैं. इन बरामदगियों ने कथित वित्तीय अनियमितताओं की गंभीरता को और बढ़ा दिया है.

अब जमीन सौदों तक पहुंची जांच

जांच का दायरा अब केवल नकदी और चढ़ावे की कथित चोरी तक सीमित नहीं रहा है. SIT ने ट्रस्ट द्वारा की गई बड़ी रियल एस्टेट खरीद और जमीन से जुड़े महंगे सौदों की भी बारीकी से जांच शुरू कर दी है. जांचकर्ताओं का मानना है कि वित्तीय लेन-देन की पूरी श्रृंखला की पड़ताल किए बिना मामले की वास्तविक तस्वीर सामने नहीं आ सकती.

योगी सरकार की समीक्षा और CBI जांच की मांग

रिपोर्ट के शुरुआती निष्कर्षों पर अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अंतिम समीक्षा और आगे की कार्रवाई संबंधी निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है. दूसरी ओर, मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिकाएं भी दायर की गई हैं. इन याचिकाओं में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अदालत की निगरानी में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग उठाई गई है.

सबसे बड़ा सवाल

SIT रिपोर्ट ने केवल कुछ व्यक्तियों की भूमिका पर सवाल नहीं उठाए हैं, बल्कि पूरे ट्रस्ट प्रशासन, वित्तीय निगरानी व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र की प्रभावशीलता पर व्यापक बहस शुरू कर दी है. अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार, ट्रस्ट और जांच एजेंसियां रिपोर्ट में सुझाए गए सुधारों को किस तरह लागू करती हैं और करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने के लिए कौन-कौन से ठोस कदम उठाए जाते हैं.

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