अब ग्रेटर नॉएडा में गंदे पानी का कहर! बड़े-बच्चों समेत 12 से ज्यादा लोग पड़े बीमार; फूटा गुस्सा तो कहा- बिल भी भरे गंदा पानी भी पिए
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर डेल्टा-1 में पीने के पानी में सीवेज का गंदा पानी मिलने से गंभीर स्थिति पैदा हो गई है. ब्लॉक सी में पुरानी पाइपलाइन के लीक होने के कारण दर्जनों लोग बीमार पड़ गए हैं, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं. उल्टी, दस्त और बुखार की शिकायतें सामने आई हैं. लोगों को इंदौर जैसी घटना की आशंका सता रही है. जीएनआईडीए और स्वास्थ्य विभाग ने मौके पर पहुंचकर मरम्मत कराई, मेडिकल कैंप लगाया और पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे हैं.
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर डेल्टा 1 में एक बड़ी समस्या सामने आई है. यहां पीने के पानी में सीवेज का गंदा पानी मिल जाने की वजह से कई लोग बीमार हो गए हैं. बच्चों सहित दर्जनों निवासियों को उल्टी आने लगी, दस्त हो रहे हैं और बुखार भी चढ़ गया है. लोग बहुत डरे हुए हैं क्योंकि उन्हें इंदौर जैसी घटना की याद आ रही है, जहां दूषित पानी पीने से कई लोगों की जान चली गई थी और सैकड़ों लोग अस्पताल में भर्ती हुए थे.
यह समस्या सोमवार से शुरू हुई. निवासियों का कहना है कि ब्लॉक सी में पानी की पुरानी पाइपलाइन फट गई थी, जिससे सीवेज का पानी उसमें घुस गया. इलाके में सीवर की लाइनें ब्लॉक हो गई थीं, इसलिए गंदा पानी एक नाले में डाला जा रहा था. लेकिन खुले मैनहोल की वजह से वह गंदा पानी लीक हो रही पानी की पाइपलाइन में चला गया. इससे पीने का पानी पूरी तरह दूषित हो गया. लोग कहते हैं कि पानी में बदबू आ रही थी और वह पीला-गंदा दिख रहा था.
12 से 15 साल के बच्चे भी शामिल
सेक्टर डेल्टा 1 के आरडब्ल्यूए अध्यक्ष प्रमोद भाटी ने बताया कि अब तक करीब 12 लोग बीमार पड़ चुके हैं, जिनमें 12 से 15 साल के बच्चे भी शामिल हैं. ज्यादातर मामले ब्लॉक सी से हैं. एक हफ्ते में यह पानी की पाइपलाइन फटने की तीसरी घटना है. इस सेक्टर में छह ब्लॉक (ए से एफ) हैं और यहां लगभग 20,000 लोग रहते हैं. पिछले हफ्ते ब्लॉक एफ में भी ऐसी ही समस्या हुई थी. एक निवासी, 42 साल की रुक्मणी सिंह, ने बताया कि सोमवार से उन्हें पेट में इन्फेक्शन हो गया. पहले बेचैनी हुई, फिर दस्त शुरू हो गए और वे बहुत कमजोर हो गईं. उनके पड़ोसियों- विनोद कुमार, सुरेंद्र शर्मा, विजय ठाकुर (सभी 40 साल से ज्यादा उम्र के) और 12 साल की द्राति शर्मा को भी यही लक्षण दिखे. रुक्मणी अब निजी डॉक्टर की दवाएं ले रही हैं और उनकी हालत थोड़ी बेहतर है.
बुनियादी सुविधाएं नहीं है
निवासियों का गुस्सा यह भी है कि ग्रेटर नोएडा को बड़ा इंडस्ट्रियल और निवेश केंद्र बताया जा रहा है, लेकिन बुनियादी सुविधाएं जैसे साफ पानी अभी भी ठीक नहीं हैं. एक निवासी ऋषिपाल भाटी और आरडब्ल्यूए कोऑर्डिनेटर दीपक कुमार भाटी ने कहा कि हम बिल तो भरते हैं, लेकिन दूषित पानी पीने को मजबूर हैं. यह जानकर कैसा लगेगा कि पीने और नहाने के पानी में मल मिला हुआ है?.' बुधवार को ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (जीएनआईडीए) और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने इलाके का दौरा किया. उन्होंने लीकेज को ठीक किया और लोगों को दवाएं, ओआरएस पैकेट, ग्लूकोज और एंटासिड बांटे पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं.
लीक मिले पाइप को बदले
जीएनआईडीए के जल विभाग के असिस्टेंट मैनेजर मनोज चौधरी ने बताया कि ब्लॉक सी में एक पुरानी पाइपलाइन का हिस्सा लीक हो रहा था, जिसकी मरम्मत दोपहर तक कर दी गई. सेक्टर के अन्य हिस्सों में भी चेक किया गया, जहां दो और लीक मिले और उन्हें बदल दिया गया. शाम को मरम्मत के बाद पानी की जांच की गई तो वह सामान्य पाया गया. जीएनआईडीए का कहना है कि सीवेज मिलने का कोई सबूत नहीं मिला, लेकिन जांच जारी है.
कल फिर लगेगा कैंप
कसना के बाल चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नारायण किशोर ने कहा कि आरडब्ल्यूए से सूचना मिलते ही मेडिकल कैंप लगाया गया। करीब 30 लोगों ने डॉक्टर से सलाह ली। पांच-छह को दवाएं दी गईं, बाकी को ओआरएस पीने की सलाह दी गई. स्थिति कंट्रोल में है, लेकिन जरूरत पड़ी तो कल फिर कैंप लगेगा. जीएनआईडीए ने लोगों से अपील की है कि पानी या सीवर में कोई लीकेज दिखे तो तुरंत बताएं. वे प्राथमिकता से मरम्मत करेंगे पुरानी पाइपलाइनों को बदलने के प्रस्ताव भी तैयार हो रहे हैं. फिलहाल लोग सतर्क हैं और पानी उबालकर या बोतलबंद पानी इस्तेमाल कर रहे हैं. उम्मीद है कि जांच रिपोर्ट जल्द आएगी और आगे ऐसी समस्या नहीं होगी.





