Begin typing your search...

नोएडा जिला अस्पताल में इंसानों के लिए कैसे आ गईं जानवरों वाली सिरिंज, अब तक क्या एक्शन और क्या पता चला?

नोएडा जिला अस्पताल में इंसानों के इलाज के लिए गलती से वेटरनरी सिरिंज मंगवाने का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठ गए हैं. शुरुआती जांच में डेटा ऑपरेटर को सस्पेंड कर दिया है, जबकि मामले की जांच के लिए समिति गठित कर दी गई है और रिपोर्ट का इंतजार है.

नोएडा जिला अस्पताल में इंसानों के लिए कैसे आ गईं जानवरों वाली सिरिंज, अब तक क्या एक्शन और क्या पता चला?
X

जानवरों वाली सिरिंज मामले में अब तक क्या हुआ

मोहम्मद रज़ा
By: मोहम्मद रज़ा3 Mins Read

Updated on: 4 April 2026 3:07 PM IST

नोएडा के राजकीय जिला संयुक्त अस्पताल में इंसानों के इलाज के लिए पशुओं में इस्तेमाल होने वाली करीब 60 हजार वेटरनरी सिरिंज मंगवाने का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है. यह चौंकाने वाली चूक तब सामने आई, जब अस्पताल में आई सप्लाई पर ‘वेटरनरी यूज’ लिखा मिला.

मामला सामने आते ही प्रशासन हरकत में आया और जिम्मेदारी तय करने की कवायद शुरू हो गई है. डेटा ऑपरेटर पर शुरुआती तौर पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए उसे सस्पेंड कर दिया गया है. वहीं अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है. फिलहाल जांच समिति गठित कर दी गई है, जो पूरे प्रकरण की पड़ताल कर रिपोर्ट शासन को सौंपेगी.

कैसे सामने आया मामला?

अस्पताल प्रशासन ने ऑनलाइन पोर्टल के जरिए सिरिंज का ऑर्डर दिया था. जब सप्लाई अस्पताल पहुंची और पैकेजिंग खोली गई, तब पता चला कि ये सिरिंज इंसानों के इलाज के लिए नहीं, बल्कि जानवरों के लिए हैं. हैरानी की बात यह रही कि ऑर्डर कई स्तरों की जांच प्रक्रिया से गुजरने के बावजूद इस गलती को कोई पकड़ नहीं पाया.

डेटा ऑपरेटर को किया सस्पेंड

मामले में डेटा ऑपरेटर योगेश कुमार की भूमिका सामने आई है. आरोप है कि उन्हें GeM और DDO पोर्टल की लॉगिन आईडी और पासवर्ड दिए गए थे, जिसके बाद उन्होंने नियमों को नजरअंदाज करते हुए गलत ऑर्डर प्लेस कर दिया. प्रशासन ने फिलहाल डेटा ऑपरेटर योगेश कुमार को उसके पद से हटाकर नशा मुक्ति केंद्र में अटैच कर दिया है.

अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल

इस मामले में सिर्फ डेटा ऑपरेटर ही नहीं, बल्कि स्टोर इंचार्ज और कार्यवाहक CMS की भूमिका भी सवालों के घेरे में है. आरोप है कि डेटा ऑपरेटर के पास कई अधिकारियों की आधिकारिक लॉगिन आईडी और पासवर्ड थे, जिससे सिस्टम की सुरक्षा और निगरानी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.

बनाई गई तीन सदस्यीय समिति

इस पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है, जो अपनी रिपोर्ट उत्तर प्रदेश शासन को सौंपेगी.

CMS का क्या कहना है?

कार्यवाहक CMS ने इस मामले को “छोटी गलती” बताया है. उनका कहना है कि यह ऑर्डर 3-4 महीने पहले गलती से प्लेस हो गया था और पहली नजर में यह डेटा ऑपरेटर की चूक लगती है. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि इस तरह की गलतियां नहीं होनी चाहिए. नोएडा जिला अस्पताल का यह मामला सिर्फ एक तकनीकी गलती नहीं, बल्कि सिस्टम में मौजूद खामियों को उजागर करता है. अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जो तय करेगी कि यह सिर्फ लापरवाही थी या फिर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश.

अगला लेख