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मुस्कान-साहिल के बाद रविता-अमरदीप को भी मृत्युदंड, पति की हत्या कर सांप के डसने का रचा था ढोंग, इतने दिनों में कोर्ट ने सुना दी सजा

मेरठ में अमित कश्यप हत्याकांड में पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को फांसी की सजा सुनाई गई. जानिए सांप से मौत दिखाने की साजिश और कैसे खुला हत्या का राज.

मुस्कान-साहिल के बाद रविता-अमरदीप को भी मृत्युदंड, पति की हत्या कर सांप के डसने का रचा था ढोंग, इतने दिनों में कोर्ट ने सुना दी सजा
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सौरभ हत्याकांड पर फैसला आए हुए अभी दो दिन नहीं हुआ है कि मेरठ के और कांड का फैसला आ गया है मामला वहीं पति की हत्या का लेकिन ड्रामा अलग है और फैसला ही हैरान कर देने वाला है. मेरठ का एक घर...रात का सन्नाटा...बिस्तर पर सो रहा पति और उसके पास छिपा मौत का ऐसा राज, जिसने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया. अमित कश्यप की मौत के बाद शुरुआत में लगा कि उन्हें सांप ने डस लिया है.

शव के पास सांप भी मिला था. लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस कहानी का रुख बदल दिया. मौत सांप के जहर से नहीं, बल्कि दम घुटने से हुई थी. जांच आगे बढ़ी तो शक की सुई अमित की पत्नी रविता और उसके पड़ोसी अमरदीप की तरफ घूम गई. आरोप था कि दोनों ने हत्या को सांप के काटने से हुई मौत दिखाने की साजिश रची थी. आखिर इस खौफनाक मामले में अदालत ने क्या फैसला सुनाया और कैसे खुला हत्या का राज? आइए पूरी कहानी को डिटेल में समझते है.

547 दिन बाद अदालत का बड़ा फैसला, रविता और अमरदीप को फांसी

मेरठ के चर्चित स्नेकबाइट मर्डर केस में अदालत ने अमित कश्यप की हत्या के दोषी उसकी पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को मौत की सजा सुनाई. दोनों को 7 अक्टूबर 2026 को हत्या और सबूत मिटाने के मामले में दोषी ठहराया गया था. शुक्रवार, 16 अक्टूबर को अदालत ने सजा के सवाल पर दोनों का पक्ष सुना और फिर मृत्युदंड का फैसला सुनाया.

अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि यह कोई अचानक हुई वारदात नहीं थी, बल्कि हत्या की सुनियोजित साजिश थी. आरोपियों ने कथित तौर पर अमित की जान लेने के बाद घटनास्थल पर सांप छोड़कर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की. अभियोजन ने हत्या के तरीके, साजिश और सबूत मिटाने की कोशिश को गंभीर मानते हुए दोनों के लिए फांसी की मांग की थी.

कोर्ट में जज ने क्या पूछा, रविता और अमरदीप ने क्या कहा?

सजा सुनाए जाने से पहले अदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दोनों दोषियों का पक्ष सुना. जज ने उनसे पूछा कि जब उन्हें हत्या का दोषी ठहराया जा चुका है, तो वे सजा के बारे में क्या कहना चाहते हैं. रविता ने अपने बचाव में कहा कि उसके तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं. उसने उनके भविष्य और देखभाल का हवाला दिया. इसके बाद वह चुप हो गई.

दूसरी तरफ अमरदीप ने अपने बूढ़े माता-पिता का जिक्र किया. उसने कहा कि उनकी सेवा करने वाला कोई नहीं है और उनकी देखभाल में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए. अपनी बात रखने के दौरान दोनों भावुक हो गए और रोने लगे. लेकिन अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए उन्हें मृत्युदंड सुनाया. अदालत की टिप्पणी भी चर्चा में रही. उपलब्ध विवरण के मुताबिक, न्यायाधीश ने कहा, 'केवल काट डालना ही जघन्य अपराध नहीं है.' फैसले में पति-पत्नी के रिश्ते और पत्नी के आचरण का जिक्र करते हुए इसे अत्यंत गंभीर अपराध माना गया. अदालत ने मामले को दुर्लभतम श्रेणी का अपराध मानते हुए फांसी की सजा दी.

आखिर इस मामले को इतना भयावह क्या बनाता है?

इस केस की भयावहता सिर्फ इस बात में नहीं है कि एक व्यक्ति की हत्या हुई. सबसे विचलित करने वाला पहलू अभियोजन का वह आरोप है, जिसके मुताबिक हत्या को छिपाने के लिए सांप का सहारा लिया गया. जिस मौत को प्राकृतिक हादसा दिखाने की कोशिश हुई, उसी के पीछे पोस्टमार्टम ने दम घुटने का सच सामने रखा. एक हजार रुपये में सांप खरीदने का आरोप, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, सपेरे से पूछताछ और पोस्टमार्टम रिपोर्ट-इन सभी कड़ियों ने जांच को आगे बढ़ाया.

अदालत ने पेश साक्ष्यों के आधार पर रविता और अमरदीप को दोषी ठहराया और दोनों को फांसी की सजा सुनाई. अमित कश्यप की मौत ने उनके परिवार को उजाड़ दिया. वहीं, इस मामले ने यह भी दिखाया कि किसी घटना को पहली नजर में जैसा बताया जाए, जरूरी नहीं कि सच भी वही हो. कई बार वैज्ञानिक जांच और सबूत उस कहानी को पूरी तरह बदल देते हैं, जिसे अपराधी सच बनाकर पेश करना चाहते हैं.

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