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Mayawati: 51वें जन्मदिन पर किया था 20 करोड़ से ज्यादा का खर्च, 1960 के बाद कार्यकाल पूरा करने वाली पहली सीएम- 10 Pointers

15 जनवरी को बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती का जन्मदिन मनाया जाता है. कभी यह दिन शक्ति प्रदर्शन और भव्य आयोजनों के लिए जाना जाता था, आज इसे जनकल्याणकारी दिवस के रूप में मनाया जाता है. चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं मायावती देश की पहली अनुसूचित जाति महिला सीएम हैं. जानिए उनके राजनीतिक सफर, विवादों और उपलब्धियों से जुड़ी 10 अहम बातें.

Mayawati: 51वें जन्मदिन पर किया था 20 करोड़ से ज्यादा का खर्च, 1960 के बाद कार्यकाल पूरा करने वाली पहली सीएम- 10 Pointers
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( Image Source:  ANI )
नवनीत कुमार
Edited By: नवनीत कुमार

Updated on: 15 Jan 2026 11:07 AM IST

उत्तर प्रदेश की राजनीति में मायावती का नाम दशकों तक शक्ति, अनुशासन और दलित राजनीति के सबसे बड़े प्रतीक के रूप में गूंजता रहा है. 15 जनवरी को उनका जन्मदिन कभी सिर्फ निजी अवसर नहीं रहा, बल्कि बहुजन समाज पार्टी (BSP) के लिए ताकत के सार्वजनिक प्रदर्शन का दिन बन चुका था. 2000 के दशक में यह तारीख लखनऊ से लेकर पूरे प्रदेश में विशाल रैलियों, शक्ति प्रदर्शन और वफादारी के संदेशों के साथ मनाई जाती थी, जिनकी गूंज राष्ट्रीय राजनीति तक सुनाई देती थी.

आज वही जन्मदिन “जनकल्याणकारी दिवस” के रूप में अपेक्षाकृत शांत माहौल में मनाया जाता है. न भव्य रैलियां, न करोड़ों के आयोजन सिर्फ संगठनात्मक बैठकें, संदेश और सीमित गतिविधियां. यह बदलाव सिर्फ आयोजन का नहीं, बल्कि मायावती के पूरे राजनीतिक सफर का प्रतीक है. जहां कभी सत्ता का शिखर था, वहीं अब सियासत का स्वर ज्यादा संयमित और सीमित नजर आता है.

मायावती से जुड़ी 10 बड़ी बातें

1. कांशीराम की राजनीतिक उत्तराधिकारी: बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम ने 2001 में मायावती को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया. यह फैसला BSP की राजनीति में ऐतिहासिक मोड़ था, जिसने मायावती को सीधे राष्ट्रीय दलित नेतृत्व के केंद्र में ला खड़ा किया.

2. BSP की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं: 2003 में मायावती पहली बार बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनी गईं. इसके बाद से पार्टी की वैचारिक और संगठनात्मक दिशा काफी हद तक उनके फैसलों से तय होती रही.

3. पहली बार 1995 में बनीं मुख्यमंत्री: जून 1995 में मायावती पहली बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं. उस समय के प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव ने उन्हें “लोकतंत्र का चमत्कार” कहा था, जो भारतीय राजनीति में उनकी असाधारण यात्रा को दर्शाता है.

4. चार बार संभाली यूपी की सत्ता: मायावती ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में चार कार्यकाल पूरे किए- 1995, 1997, 2002-03 और 2007-2012. यह अपने आप में उन्हें राज्य की सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल करता है.

5. BJP के समर्थन से भी बनीं मुख्यमंत्री: 1997 और 2002 में मायावती ने भारतीय जनता पार्टी के बाहरी समर्थन से सरकार बनाई. हालांकि ये सरकारें ज्यादा समय तक नहीं चल सकीं, लेकिन इन गठबंधनों ने यूपी की राजनीति की दिशा बदल दी.

6. पहला पूर्ण कार्यकाल पूरा करने वाली सीएम: 2007 से 2012 तक मायावती ने अपना कार्यकाल पूरा किया और 1960 के बाद पहली ऐसी यूपी मुख्यमंत्री बनीं जिन्होंने पूरे पांच साल सत्ता में रहकर सरकार चलाई.

7. अनुसूचित जाति से पहली महिला मुख्यमंत्री: मायावती अनुसूचित जाति से आने वाली देश की पहली महिला मुख्यमंत्री हैं. यही वजह है कि उन्हें करोड़ों लोग “बहनजी” के नाम से सम्मान और अपनापन देते हैं.

8. सत्ता में रहते भव्य आयोजनों के लिए चर्चित: 2000 के दशक में उनके जन्मदिन पर भव्य आयोजन, नोटों की मालाएं और महंगे समारोह सुर्खियों में रहे. 2006 में 51वें जन्मदिन पर हुए आयोजनों का खर्च 20 करोड़ रुपये से ज्यादा आंका गया था.

9. 2012 की हार के बाद बदली भूमिका: 2012 में समाजवादी पार्टी से चुनाव हारने के बाद मायावती ने मुख्यमंत्री पद छोड़ा और कुछ समय बाद राज्यसभा के लिए चुनी गईं. इसके बाद उनकी राजनीति ज्यादा संसद और संगठन तक सिमटती चली गई.

10. राज्यसभा से इस्तीफा और बड़ा संदेश: 2018 में सहारनपुर में दलितों पर अत्याचार का मुद्दा उठाने के दौरान बोलने से रोके जाने पर मायावती ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया. इसे उन्होंने दलित आवाज को दबाने का प्रतीक बताया, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया.

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