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कब रुकेगा ये सिलसिला! झालावाड़ हादसे के बाद मोना डूंगर में भी गिरा स्कूल का छज्जा, बाल-बाल बचे छात्र

बांसवाड़ा जिले में अकेले 200 से भी ज्यादा सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जिनकी हालत बहुत खराब है। कहीं दीवारें फट गई हैं, तो कहीं छतें टपक रही हैं या गिरने की कगार पर हैं. ऐसे में बच्चों की जान हर दिन खतरे में है.

कब रुकेगा ये सिलसिला! झालावाड़ हादसे के बाद मोना डूंगर में भी गिरा स्कूल का छज्जा, बाल-बाल बचे छात्र
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( Image Source:  X : @gauravkrdwivedi )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय2 Mins Read

Published on: 27 July 2025 8:02 PM

झालावाड़ जिले में हाल ही में हुए दर्दनाक हादसे के बाद अब राजस्थान के कई जिलों से सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों की तस्वीरें सामने आ रही हैं. ऐसी ही एक चिंताजनक घटना बांसवाड़ा जिले के मोना डूंगर गांव में सामने आई है। यहां के सरकारी स्कूल की छत का आगे का हिस्सा, जिसे स्थानीय भाषा में छज्जा कहा जाता है, अचानक गिर गया. गनीमत यह रही कि जिस दिन यह हादसा हुआ, वह रविवार था और स्कूल में छुट्टी थी. अगर स्कूल खुला होता और बच्चे मौजूद होते, तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था. जैसे ही घटना की जानकारी मिली, सल्लोपाट थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तुरंत उच्च अधिकारियों को सूचित किया.

लंबे समय से खराब हालत में था स्कूल भवन

स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि यह स्कूल भवन काफी समय से जर्जर हालत में था. कई बार प्रशासन का ध्यान इस ओर दिलाया गया, लेकिन आज तक कोई मरम्मत कार्य नहीं किया गया. लोगों ने अब एक बार फिर प्रशासन से गुहार लगाई है कि इस स्कूल की मरम्मत तुरंत करवाई जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो और उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके.

सिर्फ एक स्कूल नहीं, सैकड़ों की यही स्थिति

बांसवाड़ा जिले में अकेले 200 से भी ज्यादा सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जिनकी हालत बहुत खराब है। कहीं दीवारें फट गई हैं, तो कहीं छतें टपक रही हैं या गिरने की कगार पर हैं. ऐसे में बच्चों की जान हर दिन खतरे में है. मोना डूंगर की इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक बच्चों को ऐसे खतरनाक भवनों में पढ़ने को मजबूर किया जाएगा? क्या कोई बड़ा हादसा होने के बाद ही प्रशासन जागेगा?. यह घटना न केवल प्रशासन के लापरवाहीपूर्ण रवैये को उजागर करती है, बल्कि पूरे सरकारी शिक्षा तंत्र के सामने एक बड़ा सवाल भी खड़ा करती है क्या बच्चों की जान इतनी सस्ती है कि उन्हें गिरती दीवारों और छतों के नीचे पढ़ने को छोड़ दिया जाए?.

RAJASTHAN NEWS
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