बेअदबी से पुलिस फायरिंग तक... क्या है 2015 का बेहबल कलां कांड, सुखबीर बादल फिर घिरे, चौथी बार हुए SIT के सामने पेश
करीब 11 साल पुराने बेहबल कलां पुलिस फायरिंग मामले में 2 लोगों की मौत को लेकर शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल चौथी बार विशेष जांच टीम (SIT) के सामने पेश हुए.
क्या है 2015 का बेहबल कलां कांड
साल 2015 के बेहबल कलां गोलीकांड और बेअदबी मामले ने एक बार फिर पंजाब की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है. इसी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) के सामने शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल चौथी बार पेश हुए. यह मामला उस समय का है, जब पंजाब में अकाली दल की सरकार थी और सुखबीर सिंह बादल राज्य के उपमुख्यमंत्री के साथ-साथ गृह विभाग भी संभाल रहे थे.
दरअसल, गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाओं के बाद पंजाब में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए थे. बेहबल कलां में प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग में दो लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग घायल हुए थे. इसी पूरे मामले की जांच अब भी जारी है. SIT इस केस के हर पहलू की पड़ताल कर रही है, जबकि सुखबीर बादल का कहना है कि पिछले कई वर्षों से इस मुद्दे पर सिर्फ राजनीति हुई है और अब तक पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाया.
SIT के सामने पेश होने पहुंचे सुखबीर बादल
सुखबीर सिंह बादल को इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने पूछताछ के लिए बुलाया था. वह चंडीगढ़ स्थित पंजाब पुलिस ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट पहुंचे, जहां उनसे मामले से जुड़े सवाल पूछे गए. उनके साथ अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और बलविंदर सिंह भूंदर भी मौजूद रहे. पूछताछ को देखते हुए पूरे इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. चंडीगढ़ पुलिस ने आसपास की सड़कों पर बैरिकेडिंग की थी. बड़ी संख्या में अकाली दल के नेता और समर्थक भी वहां पहुंचे और सुखबीर बादल के समर्थन में नारे लगाए.
AAP सरकार को लेकर क्या बोले?
SIT के सामने पेश होने से पहले सुखबीर बादल ने मीडिया से बातचीत की. उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार अकाली दल से घबराई हुई है और इसी वजह से ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं. उनका कहना था कि पिछले 10 साल से बेअदबी के मुद्दे पर केवल राजनीतिक बयानबाजी हुई है, लेकिन आज तक किसी को न्याय नहीं मिला.
कितनी बार हो चुके हैं पेश?
शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि 'आज मुझे चौथी बार बुलाया गया है. जब भी मुझे बुलाया गया, मैं पहुंचा हूं। क्योंकि अकाली दल के अध्यक्ष के तौर पर मेरा मकसद है कि किसी भी जांच में असली दोषियों को पकड़ा जाए. लेकिन यहां SIT दोषियों को पकड़ने के लिए नहीं बनाई गई है. SIT राजनीतिक लड़ाई लड़ने के लिए बनाई गई है। 11 साल बीत चुके हैं, और अब तक SIT ने जांच पूरी नहीं की है.'
क्या है 2015 का बेहबल कलां मामला?
साल 2015 में पंजाब के फरीदकोट जिले में गुरु ग्रंथ साहिब की एक प्रति चोरी होने, धार्मिक भावनाएं आहत करने वाले पोस्टर लगाए जाने और पवित्र ग्रंथ के फटे हुए पन्ने मिलने की घटनाओं ने पूरे राज्य में आक्रोश पैदा कर दिया था. इन घटनाओं के विरोध में बेहबल कलां और कोटकपूरा में बड़े प्रदर्शन हुए. प्रदर्शनकारियों को हटाने के दौरान पुलिस ने फायरिंग की, जिसमें दो लोगों- गुरजीत सिंह और कृष्ण भगवान सिंह की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हो गए. उस समय पंजाब में शिरोमणि अकाली दल की सरकार थी. दिवंगत प्रकाश सिंह बादल मुख्यमंत्री थे, जबकि सुखबीर सिंह बादल उपमुख्यमंत्री होने के साथ-साथ गृह विभाग की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे. यही वजह है कि इस मामले में उनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है.




