झोटा हत्याकांड: नशे के ‘मगरमच्छों’ को किसका प्रोटेक्शन? घिरी मान सरकार, हरसिमरत ने कयों खोला मोर्चा
पंजाब के झोटा हत्याकांड में ड्रग्स, पुलिस और राजनीति के कथित गठजोड़ पर सवाल. हरसिमरत बादल ने मान सरकार को घेरा, सीबीआई जांच से खुलेंगे क्या राज?
पंजाब में नशा यानी ड्रग्स के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा की हत्या ने भगवंत मान सरकार की नशा-विरोधी मुहिम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सीबीआई जांच, पुलिस अधिकारियों के निलंबन और सियासी प्रोटेक्शन के आरोपों ने इस मामले को पंजाब की सियासत के केंद्र में ला दिया है. शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर मामले की स्वतंत्र जांच और कथित पुलिस-राजनीति-नशा गठजोड़ की पड़ताल की मांग की थी. इसको लेकर दबाव आये आप सरकार द्वारा ऐलान के बाद सीबीआई इस मामले की जांच में जुट गई है.
क्या है झोटा हत्याकांड?
13 अक्टूबर 2026 को पंजाब के मानसा में नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह उर्फ झोटा की एक मेडिकल स्टोर में गोली मारकर हत्या कर दी गई. रिपोर्टों के मुताबिक, नशीली दवाओं की कथित अवैध बिक्री को लेकर झोटा और दुकान संचालक अश्वनी कुमार के बीच विवाद हुआ था. वारदात के समय झोटा फेसबुक पर सीधे प्रसारण कर रहे थे. गोलीबारी में चार अन्य लोग घायल हुए. पुलिस ने अश्वनी कुमार को राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया.
झोटा के परिवार का आरोप है कि वह इलाके में नशे के कथित कारोबार के खिलाफ आवाज उठा रहे थे और पुलिस को इसकी शिकायत भी दी गई थी. परिवार का सवाल है कि शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई. इसी सवाल ने हत्या के मामले को पुलिस की जवाबदेही से जोड़ दिया है.
झोटा हत्याकांड पर सियासी दल आमने-सामने क्यों?
झोटा की हत्या ने पंजाब में नशे के कारोबार पर नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक संघर्ष तेज कर दिया है. विपक्षी दलों का सवाल है कि नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाली सरकार के कार्यकाल में इसकी शिकायत करने वाले व्यक्ति की हत्या कैसे हो गई.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब दौरे के दौरान मान सरकार की नशे के खिलाफ कार्रवाई करने की क्षमता पर सवाल उठाए. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी पलटवार किया. अकाली दल, भाजपा और कांग्रेस इस मामले को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं.
20 अक्टूबर 2026 को मान सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की घोषणा की. हालांकि, जांच एजेंसी को मामला सौंपने के बाद भी परिवार का विरोध और पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल राजनीतिक विवाद को खत्म नहीं कर सके.
हरसिमरत ने मान सरकार के खिलाफ क्यों खोला मोर्चा?
शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर झोटा हत्याकांड की सीबीआई जांच और कथित राजनीतिक-पुलिस संरक्षण की पड़ताल की मांग की. उन्होंने पंजाब में नशे के कारोबार को लेकर प्रभावशाली लोगों की संभावित भूमिका पर सवाल उठाए.
हरसिमरत की मांग है कि जांच केवल हत्या के आरोपी तक सीमित न रहे, बल्कि झोटा की ओर से की गई कथित शिकायतों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल हो. उनका आरोप है कि नशे का कारोबार प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में फल-फूल रहा है. पंजाब में नशा लंबे समय से चुनावी मुद्दा रहा है. ऐसे में अकाली दल के लिए यह मामला मान सरकार की नशा-विरोधी नीति और कानून-व्यवस्था के दावों को चुनौती देने का अवसर है. हालांकि, राजनीतिक संरक्षण के आरोपों की पुष्टि अभी जांच से होनी बाकी है.
पुलिस, ड्रग्स और राजनीति का ट्रिपल ट्राएंगल कैसे बना?
इस मामले में तीन सवाल अहम हैं- नशे की कथित अवैध बिक्री पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई, पुलिस की भूमिका क्या रही और क्या हत्या के पीछे किसी बड़े नेटवर्क का हाथ था?
- पहला सवाल नशे के कथित कारोबार से जुड़ा है. झोटा और मेडिकल स्टोर संचालक के बीच नशीली दवाओं की बिक्री को लेकर विवाद हुआ था. सीबीआई को यह पता लगाना है कि कथित अवैध बिक्री का दायरा क्या था और हत्या का उससे क्या संबंध था.
- दूसरा सवाल पुलिस और प्रशासन की भूमिका भी संदेह के घेरी में है. रिपोर्टों के मुताबिक, मानसा सिटी-2 थाने की प्रभारी बेअंत कौर, डीएसपी हरजिंदर सिंह गिल और एक औषधि निरीक्षक को निलंबित किया गया. दूसरी तरफ पीड़ित परिवार का आरोप है कि झोटा की शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई.
- तीसरा सवाल हथियार के लाइसेंस और संभावित संरक्षण को लेकर है. आरोप है कि आरोपी के घर पर कई बार छापेमारी होने के बावजूद उसे हथियार का लाइसेंस जारी किया गया था. इस दावे की पुष्टि और लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया की जांच जरूरी है. यह भी पता लगाना होगा कि इन घटनाओं का हत्या से कोई सीधा संबंध था या नहीं.
कहां तक पहुंची सीबीआई की जांच?
पंजाब सरकार की घोषणा के बाद सीबीआई ने 21 अक्टूबर को चंडीगढ़ इकाई में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की. 23 और 24 अक्टूबर की रिपोर्टों के अनुसार, एजेंसी ने परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज किए और आरोपियों से पूछताछ की.
रिपोर्टों में अश्वनी कुमार, विपिन गर्ग और लाडी सिंह को पांच दिन तथा नीलम रानी को चार दिन की सीबीआई हिरासत में भेजे जाने की जानकारी दी गई. जांच में हत्या की परिस्थितियों, कथित साजिश, फोन बातचीत और पहले की शिकायतों से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण हैं.
24 अक्टूबर तक परिवार अपनी मांगों पर अड़ा था. रिपोर्टों के मुताबिक, परिवार ने अपनी मांगें पूरी होने तक पोस्टमार्टम की अनुमति नहीं दी थी. परिवार मुख्यमंत्री भगवंत मान और पुलिस महानिदेशक गौरव यादव की जवाबदेही की मांग कर रहा था. लोगों का कहना है कि हत्या के पीछे बड़ा सियासी या पुलिस नेटवर्क साबित हो चुका है. इसका जवाब सीबीआई की जांच और सामने आने वाले साक्ष्यों से ही मिलेगा.
2027 के विधानसभा चुनाव पर क्या पड़ेगा असर?
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नशे का मुद्दा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है. झोटा हत्याकांड ने इस बहस को और तेज कर दिया है. विपक्ष सरकार से सवाल कर रहा है कि नशे के खिलाफ कार्रवाई के दावों के बावजूद शिकायतों पर समय रहते कदम क्यों नहीं उठाए गए.
आम आदमी पार्टी के लिए चुनौती है कि वह नशे के खिलाफ अभियान की प्रभावशीलता और पुलिस की जवाबदेही को लेकर उठे सवालों का जवाब दे. दूसरी ओर, अकाली दल और भाजपा इस मामले को कानून-व्यवस्था और नशे के कारोबार पर सरकार को घेरने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं. कांग्रेस भी इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांग रही है.
हालांकि, किसी एक घटना से चुनावी नतीजों का अनुमान नहीं लगाया जा सकता. इसका राजनीतिक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि सीबीआई जांच में क्या सामने आता है, सरकार की कार्रवाई कितनी प्रभावी साबित होती है और जनता इस मामले को किस रूप में देखती है.
झोटा को इंसाफ मिलेगा या मामला सियासत में उलझेगा?
झोटा हत्याकांड अब केवल हत्या के आरोपी को सजा दिलाने का मामला नहीं रह गया है. इसके साथ नशे के कथित कारोबार, पुलिस की जवाबदेही और संभावित राजनीतिक संरक्षण से जुड़े सवाल भी हैं. सीबीआई जांच शुरू होना महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन जांच शुरू होने और आरोप साबित होने में अंतर है. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जांच एजेंसी हत्या की परिस्थितियों के साथ झोटा की पुरानी शिकायतों, हथियार के लाइसेंस और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी पूरी पड़ताल करेगी.




