झारखंड सरकार को हाईकोर्ट ने दिया बड़ा झटका, 11वीं-13वीं JPSC परीक्षा और नियुक्तियां रद्द करने पर लगाई रोक; किसे मिली बड़ी राहत?
झारखंड हाईकोर्ट ने 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षा व नियुक्तियां रद्द करने के सरकार के फैसले पर रोक लगा दी है. सरकार ने छात्र आंदोलन के बाद भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को देखते हुए यह फैसला लिया था, लेकिन परीक्षा पास कर नौकरी पाने वाले अभ्यर्थियों ने इसका विरोध किया.
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर चल रहा विवाद अब हाईकोर्ट पहुंच गया है. झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षा तथा उनसे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला लिया गया था.
सरकार ने छात्र आंदोलनों के बाद भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर कई बड़े फैसले किए थे, लेकिन परीक्षा पास कर सरकारी नौकरी हासिल करने वाले अभ्यर्थियों ने इन फैसलों का विरोध शुरू कर दिया. उनका कहना था कि अगर किसी परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच होनी चाहिए, लेकिन बिना दोष साबित हुए सफल अभ्यर्थियों को सजा नहीं दी जानी चाहिए.
छात्र आंदोलन के बाद सरकार ने लिया था बड़ा फैसला
झारखंड में लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया को लेकर छात्रों में नाराजगी थी. छात्रों की प्रमुख मांगों में कथित परीक्षा अनियमितताओं की जांच और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता शामिल थी. इसी बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने भर्ती परीक्षाओं को लेकर कई बड़े फैसले किए.
सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने के साथ-साथ TSR Data Processing Pvt Ltd (TDPL) की ओर से 2014 से कराई गई सभी भर्ती परीक्षाओं को भी रद्द करने का ऐलान किया था. सरकार ने 14वीं JPSC और बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने का भी फैसला लिया था और भर्ती प्रक्रिया में सुधार के लिए कई कदम उठाने की बात कही थी.
11वीं और 13वीं JPSC पर भी हुआ था विवाद
इसी क्रम में 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षा तथा उनसे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने का सरकार का फैसला भी विवादों में आ गया. सरकार के फैसले के खिलाफ उन अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ गई, जिन्होंने परीक्षा पास करने के बाद सरकारी नौकरी हासिल की थी. उनका सवाल था कि अगर परीक्षा प्रक्रिया में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई भी है, तो उसके लिए उन उम्मीदवारों को जिम्मेदार कैसे माना जा सकता है जिन्होंने मेहनत करके परीक्षा पास की और नियुक्ति प्राप्त की? इसी मुद्दे को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंचा और अब अदालत ने सरकार के फैसले पर रोक लगा दी है.
‘गलती हमारी नहीं तो सजा क्यों?’
JSSC-CGL परीक्षा पास कर सरकारी पदों पर नियुक्त हुए उम्मीदवारों ने भी सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले का विरोध किया है. इन अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर किसी परीक्षा में अनियमितता या भ्रष्टाचार के आरोप हैं तो दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन जिन उम्मीदवारों के खिलाफ कोई व्यक्तिगत आरोप या गड़बड़ी साबित नहीं हुई है, उनकी नियुक्ति रद्द करना उचित नहीं है. यही तर्क JPSC से जुड़े अभ्यर्थियों के मामले में भी महत्वपूर्ण बन गया है.
सरकार ने बनाई परीक्षा सुधार समिति
सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को बेहतर और ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए एक परीक्षा सुधार समिति भी गठित की है. वरिष्ठ IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता वाली इस समिति को भर्ती प्रक्रिया को मजबूत और व्यवस्थित करने के लिए सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई है.
सरकार का उद्देश्य भर्ती परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों को रोकना और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना है. हालांकि छात्रों की एक प्रमुख मांग अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है.
CBI जांच की मांग पर अब भी विवाद
प्रदर्शन कर रहे छात्रों की ओर से कथित अनियमितताओं की CBI जांच की मांग भी उठाई गई थी. सरकार द्वारा कई परीक्षाएं रद्द करने के बावजूद CBI जांच का मुद्दा विवाद का कारण बना हुआ है. यानी एक तरफ सरकार भर्ती प्रक्रिया को नए सिरे से सुधारने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ छात्र संगठन पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं.
अब हाईकोर्ट के आदेश से क्या बदलेगा?
11वीं और 13वीं JPSC परीक्षा तथा नियुक्तियों को रद्द करने के सरकारी आदेश पर हाईकोर्ट की रोक के बाद अब इस मामले में सरकार के फैसले पर कानूनी स्थिति बदल गई है. इस आदेश से उन अभ्यर्थियों को फिलहाल राहत मिल सकती है, जिनकी परीक्षा और नियुक्तियां सरकार के फैसले से प्रभावित हो रही थीं. हालांकि मामले की आगे की सुनवाई में अदालत पूरे विवाद, परीक्षा प्रक्रिया और सरकार के फैसले से जुड़े पक्षों पर विस्तार से विचार करेगी.
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं का यह विवाद अब सिर्फ छात्र आंदोलन तक सीमित नहीं रहा है। एक तरफ परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग है, तो दूसरी तरफ सफल उम्मीदवारों का सवाल है कि बिना दोष साबित हुए उनकी नौकरी क्यों जाए? हाईकोर्ट की रोक के बाद अब इस पूरे मामले में अगली कानूनी कार्रवाई पर सभी की नजरें रहेंगी.




