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घर में घुसा शख्स, महिला के कपड़े उतारने की कोशिश की... झारखंड हाई कोर्ट ने नहीं माना रेप का प्रयास, फैसले में क्या-क्या कहा?

झारखंड हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि रात में महिला के घर में घुसकर उसके कपड़े उठाने की कोशिश करना अपराध है, लेकिन हर ऐसी हरकत को रेप की कोशिश नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले अपराध और रेप के प्रयास के बीच कानूनी अंतर स्पष्ट करते हुए आरोपी की सजा में बदलाव किया.

घर में घुसा शख्स, महिला के कपड़े उतारने की कोशिश की... झारखंड हाई कोर्ट ने नहीं माना रेप का प्रयास, फैसले में क्या-क्या कहा?
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( Image Source:  official website of jharkhand highcourt )

झारखंड हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि रात के समय किसी महिला के घर में घुसकर उसके कपड़े उठाने की कोशिश करना अपराध है. हालांकि, हर ऐसी घटना को सीधे तौर पर रेप की कोशिश नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले अपराध और रेप के प्रयास के बीच अंतर स्पष्ट किया है.

जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने 31 अगस्त को एक आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया. कोर्ट ने माना कि मामले में मौजूद सबूत रेप की कोशिश साबित करने के लिए जरूरी कानूनी स्तर तक नहीं पहुंचते हैं.

गरिमा को ठेस पहुंचाने का दोष बरकरार

हाईकोर्ट ने आरोपी को महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से आपराधिक बल प्रयोग करने के मामले में दोषी माना. कोर्ट के मुताबिक, उपलब्ध सबूत इस अपराध को साबित करने के लिए पर्याप्त थे, लेकिन इन्हीं सबूतों के आधार पर रेप की कोशिश का आरोप साबित नहीं होता.

कोर्ट ने इस मामले में पूर्वी सिंहभूम जिला सत्र अदालत के 25 जुलाई के फैसले में बदलाव किया. सेशंस कोर्ट ने आरोपी को रेप की कोशिश के मामले में दोषी मानते हुए चार साल की कठोर सजा सुनाई थी.

8 महीने की हिरासत को माना पर्याप्त सजा

हाईकोर्ट ने आरोपी की सजा घटाकर उतने समय तक कर दी, जितना वह पहले ही जेल में रह चुका था. आरोपी करीब आठ महीने हिरासत में रहा था. कोर्ट ने माना कि इस अपराध के लिए इतनी सजा पर्याप्त है और अपील को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया.

यह मामला 26 दिसंबर 1999 की रात हुई घटना से जुड़ा है. घटना के अगले दिन 27 दिसंबर को आरोपी को गिरफ्तार किया गया था. बाद में उसके खिलाफ महिला से रेप की कोशिश का आरोप लगाते हुए चार्जशीट दाखिल की गई.

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने क्या देखा

अपील पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी देखा कि आरोपी की हरकत रेप के प्रयास के इतने करीब थी या नहीं कि उसे कानूनी तौर पर रेप की कोशिश माना जा सके. कोर्ट ने कहा कि किसी कृत्य को रेप की कोशिश तभी माना जा सकता है, जब वह रेप होने की घटना के पर्याप्त रूप से करीब हो.

इस मामले में हाईकोर्ट ने माना कि सबूत महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से आपराधिक बल प्रयोग साबित करते हैं, लेकिन रेप की कोशिश साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं. इसलिए कोर्ट ने कम गंभीर अपराध में दोषसिद्धि बरकरार रखी और रेप की कोशिश का आरोप हटा दिया.

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