अब कैसा है जंतर-मंतर का मंजर, लेटेस्ट वीडियो आया सामने... 36 दिन बाद पसरा सन्नाटा, NDMC ने संभाला मोर्चा
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ ही अब जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रोटेस्ट भी खत्म हो गया है. सभी छात्र अपने-अपने घर लौट रहे हैं. वहीं जंतर-मंतर पर सफाई अभियान चलाया जा रहा है.
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करीब एक महीने तक दिल्ली के जंतर-मंतर पर चले छात्रों के आंदोलन के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा. कई दिनों से छात्र आंदोलन का केंद्र बना जंतर-मंतर शनिवार रात अचानक शांत हो गया. जहां कुछ घंटे पहले तक नारों की गूंज, रंग-बिरंगी तख्तियां और छात्रों की आवाजें सुनाई दे रही थीं, वहीं देर रात तक पूरा इलाका सन्नाटे में डूब गया. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आते ही प्रदर्शनकारी छात्रों ने अपना आंदोलन समाप्त करने का ऐलान कर दिया.
आंदोलन खत्म होने के फैसले के साथ ही धरना स्थल का दृश्य तेजी से बदलने लगा. छात्र अपने बिस्तर, दरियां और जरूरी सामान समेटते नजर आए, जबकि पुलिस और प्रशासन ने भी तत्काल कार्रवाई करते हुए जंतर-मंतर को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी. कुछ ही घंटों में प्रदर्शन स्थल फिर से सामान्य स्थिति की ओर लौटता दिखाई दिया.
NDMC ने रातभर चलाया सफाई अभियान
धरना स्थल खाली होते ही नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) की टीम मौके पर पहुंच गई. कर्मचारियों ने रातभर अभियान चलाकर प्रदर्शन के दौरान जमा हुए कूड़ा-कचरे को हटाया. केवल सफाई ही नहीं की गई, बल्कि पूरे इलाके को पानी से धोकर पूरी तरह साफ किया गया ताकि जंतर-मंतर को पहले जैसी स्थिति में लाया जा सके.
कैसा है अब जंतर-मंतर का नजारा?
सुबह होते-होते जंतर-मंतर का दृश्य पूरी तरह बदल चुका था. जहां बीते कई दिनों से देश के अलग-अलग राज्यों से आए छात्र अपनी मांगों को लेकर डटे हुए थे, वहां अब NDMC के कर्मचारी सफाई और व्यवस्था बहाल करने में जुटे दिखाई दिए. धरना स्थल पर आंदोलन के कोई बड़े निशान लगभग नहीं बचे थे.
कैसा था छात्रों का रिएक्शन?
आंदोलन समाप्त होने के बाद छात्रों के चेहरों पर लंबे संघर्ष की थकान के साथ-साथ अपनी प्रमुख मांग पूरी होने का संतोष भी साफ नजर आया. कई छात्र चुपचाप अपना सामान समेटते हुए उस स्थान को आखिरी बार देखते दिखाई दिए, जो पिछले कई दिनों तक उनके आंदोलन और संघर्ष का प्रतीक बना रहा.
कैसे बदली आंदोलन की तस्वीर?
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद पूरे आंदोलन की दिशा अचानक बदल गई. जिस प्रदर्शन के लंबे समय तक जारी रहने की संभावना जताई जा रही थी, वह कुछ ही घंटों में शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो गया. इसके साथ ही जंतर-मंतर पर सामान्य गतिविधियां भी धीरे-धीरे बहाल होने लगीं.




