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Ground Report: ग़ालिब की गलियों की दुर्दशा देखकर नहीं आ रहा तरस, बल्लीमारान में कैसे बहेगी विकास की नदी?

बल्लीमारान चावड़ी बाजार के पास पड़ता है. वहां पर सड़कें तो है लेकिन दुकनदारों के अतिक्रमण की वजह से दो गाड़ियां बिना रुकावट के क्रॉस नहीं हो सकते हैं. लोगों के मन में धारणा है कि पुरानी दिल्ली में सबसे ज्यादा गंदगी देखी जाती है. वहां जाकर देखा कि जो लोगों के मन में धारणा थी वह बिल्कुल सही साबित ही रही थी.

Ground Report: ग़ालिब की गलियों की दुर्दशा देखकर नहीं आ रहा तरस, बल्लीमारान में कैसे बहेगी विकास की नदी?
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नवनीत कुमार
By: नवनीत कुमार4 Mins Read

Updated on: 17 Dec 2024 7:00 AM IST

दिल्ली का बल्लीमारान विधानसभा क्षेत्र जहां कभी गालिब रहा करते थे. आज वहां पर चहल पहल तो है लेकिन तंग गलियों की स्थिति बहुत दयनीय है. लोगों के मन में एक ही सवाल है कि आखिर गालिब जैसे मशहूर शायर अगर अभी जिंदा होते तो तमाम राजनीति के सूरमाओं को कोस रहे होते. यहां के वादे और दावे नेताओं के भाषण से ठीक उलट हैं. सड़क किनारे फैली गंदगी और जलजमाव चीख चीखकर लोगों की परेशानी को बता रहे हैं.

बल्लीमारान चावड़ी बाजार के पास पड़ता है. वहां पर सड़कें तो है लेकिन दुकनदारों के अतिक्रमण की वजह से दो गाड़ियां बिना रुकावट के क्रॉस नहीं हो सकते हैं. लोगों के मन में धारणा है कि पुरानी दिल्ली में सबसे ज्यादा गंदगी देखी जाती है. इन चीजों की पड़ताल करने स्टेट मिरर की टीम ग्राउंड रिपोर्ट करने यहां पहुंची थी. वहां जाकर देखा कि जो लोगों के मन में धारणा थी वह बिल्कुल सही साबित ही रही थी.

जामा मस्जिद से होते हुए टीम चावड़ी बाजार पहुंची. वहां पर कागज़ का बहुत बड़ा कारोबार है. वहां से होते हुए टीम जब बल्लीमारान में मिर्जा गालिब की हवेली वाली गली में पहुंची तो वहां का नजारा देखकर अचंभित हो गई. ग़ालिब का एक शेर का अंश है. बहुत बे-आबरू होकर तिरे कूचे से हम निकले… यही फीलिंग उस वक़्त आ रही थी. हवेली के सामने दिल्ली की सीएम आतिशी का बड़ा सा पोस्टर लगा था. उम्मीद थी कि आगे सब व्यवस्था बढ़िया होगा लेकिन कुछ आगे चलने के बाद स्थिति और बेकार दिखने लगी. सड़क पर जलजमाव था और किनारे पर कूड़े के ढ़ेर पड़े हुए थे.

स्थानीय लोगों ने क्या कहा?

स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां साफ सफाई तो होती है लेकिन व्यापारिक क्षेत्र होने के कारण लोग गंदगी करके चले जाते हैं. चारों तरफ पान मसाला की पीक से दीवारें लाल हो चुकी है. इस वजह से बदबू भी काफी होती है. पेयजल को लेकर लोगों में निराशा दिखी. लोगों ने कहा कि साफ़ पानी नहीं आ रहा है. हमें खरीदकर पीना पड़ता है.

व्यापारियों ने बताई दास्तां

पिछले कुछ दशकों से यहां दुकानें चलाने वाले व्यापारियों का कहना है कि बल्लीमारान दिल्ली का छोटा हिस्सा नहीं है, यह पूरी विधानसभा है. फिर भी पुरानी दिल्ली का यह हिस्सा पूरी तरह से उपेक्षित है. लंबे समय से दुकान चलाने वाले दुख जताते हुए कहते हैं कि जब आप गली में प्रवेश करते हैं तो दुकानों से ज्यादा सड़क किनारे दुकानदारों को देखते हैं. उन्होंने हमारे गेट के सामने की जगहों पर अतिक्रमण कर लिया है.

मैदान में हैं इमरान हुसैन और हारून यूसुफ

जमा मस्जिद से मात्र डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर मौजूद इस विधानसभा क्षेत्र के मौजूदा विधायक इमरान हुसैन हैं. ग़ालिब की हवेली से चंद कदम की दूरी पर इनका कार्यालय है. इस सीट से कांग्रेस ने 1993 से 2013 तक यहां से विधायक रहे हारून यूसुफ को मैदान में उतारा है. पहले इनका दफ्तर अहाता काले साहब में था. पिछले 10 से ज्यादा वर्ष पहले अपने कार्यालय को उन्होंने जीबी रोड के गुरुद्वारे वाली गली में शिफ्ट कर लिया.

क्या है राजनीतिक समीकरण?

बल्लीमारान विधानसभा क्षेत्र में लगभग 50 प्रतिशत मुस्लिम वोटर्स हैं. मुस्लिम बाहुल्य इलाका होने के कारण सभी राजनीतिक पार्टी यहां से मुस्लिम उम्मीदवार को ही मैदान में उतारती है. 2020 में बल्लीमारन में कुल 64.65 प्रतिशत वोट पड़े थे. पिछले चुनाव में आम आदमी पार्टी से इमरान हुसैन ने भारतीय जनता पार्टी के लता सोढ़ी को 36172 वोटों के मार्जिन से हराया था.

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