नेहा बोरा रिहा, तो अभिजीत दीपके क्यों है गिरफ्तार, पुलिस ने क्यों दिए थे 2 नोटिस; अब किन धाराओं के तहत हो रही कार्रवाई?
जहां एक तरह नेहा बोरा को रिहा कर दिया गया है तो वहीं कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके हिरासत में हैं, उनको प्रिवेंटिव अरेस्ट किया गया है. अब उनको मजिस्ट्रैट के सामने पेश किया जाएगा.
Abhijeet Dipke and neha bora
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को दिल्ली पुलिस ने प्रिवेंटिव अरेस्ट किया है. उन्हें कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ विरोध प्रदर्शन से एक दिन पहले हिरासत में लिया गया था. इस बीच, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत जरूरी कार्रवाई पूरी करने के बाद रविवार को रिहा कर दिया गया.
रिहाई के बाद उन्होंने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में रखने और वकीलों से संपर्क करने में कथित बाधाओं को लेकर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाए. बोरा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और SIR प्रक्रिया रोकने की मांग भी दोहराई.
दीपके को क्यों मिले थे 2 नोटिस?
दिल्ली पुलिस के अनुसार, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के लिए दो नोटिस दिए गए थे. पुलिस का दावा है कि इन नोटिसों में उन्हें वहां नहीं जाने का निर्देश दिया गया था, लेकिन उन्होंने कथित तौर पर इसका पालन नहीं किया. इसके बाद पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई शुरू की. पुलिस के मुताबिक, दीपके को 17 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाना है. ये धाराएं शांति बनाए रखने के लिए एहतियाती कार्रवाई से संबंधित हैं.
रिहा होने के बाद क्या बोली नेहा?
रिहाई के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए नेहा बोरा ने कहा "कानून-व्यवस्था का हर संभव तरीके से उल्लंघन किया जा रहा है. आम नागरिकों के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है मानो वे शातिर अपराधी हों, यह प्रथा इस देश में लंबे समय से चली आ रही है. मौजूदा आंदोलन ने स्पष्ट रूप से उजागर किया है कि लोगों को दिन हो या शाम, हिरासत में लिया जा रहा है, पूरी रात हिरासत में रखा जा रहा है और अगली सुबह या शाम को ही रिहा किया जा रहा है. किस अधिकार के तहत इसे जायज़ ठहराया जा सकता है? किस कानून या आदेश के तहत बंदियों को पूरी रात हिरासत में रखना जायज़ है?"
आगे उन्होंने कहा "कानूनी तौर पर, व्यक्तियों, विशेषकर महिलाओं को सूर्यास्त के बाद रिहा किया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है. इसके अलावा, अराजकता और अव्यवस्था का एक नया नैरेटिव फैलाया जा रहा है. किस तरह की अराजकता और अव्यवस्था? वही जो आपने मध्य दिल्ली में फैलाई? दिल्ली के लोग चैन की सांस भी नहीं ले पा रहे हैं वे काम पर जाने के लिए जो भी रास्ता अपनाते हैं, वह बंद मिलता है. आप पूरे देश में अराजकता और अव्यवस्था फैला रहे हैं. कृपया, भारत की जनता को बख्श दें."
‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
सीजेपी ने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ नाम से विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई थी. प्रदर्शन से पहले पुलिस ने अभिजीत दीपके को नोटिस जारी कर वहां नहीं जाने का निर्देश दिया था. इसके बाद दीपके को हिरासत में लिया गया और उनके खिलाफ एहतियाती कार्रवाई शुरू की गई.




