अब रजिस्ट्रेशन ऑफिस नहीं जाएंगे बुज़ुर्ग! सरकार लाएगी ‘घर तक रजिस्ट्री’ सिस्टम, 80+ उम्र वालों को सीधी राहत
बिहार सरकार 1 अप्रैल 2026 से 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों के लिए घर बैठे प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन की सुविधा शुरू करने जा रही है. इसके तहत मोबाइल रजिस्ट्रेशन यूनिट बुज़ुर्गों के घर जाकर बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और दस्तावेज़ी प्रक्रिया पूरी करेगी. इस पहल का उद्देश्य बुज़ुर्गों को दफ्तरों, दलालों और कानूनी झंझटों से राहत देना है.
उम्र के आख़िरी पड़ाव पर खड़े बुज़ुर्गों के लिए बिहार सरकार एक ऐतिहासिक और इंसानी फैसला लेने जा रही है. राज्य में अब 80 साल या उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को जमीन या मकान की रजिस्ट्री के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. सरकार 1 अप्रैल 2026 से घर बैठे प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन की सुविधा शुरू करने जा रही है.
इस पहल का सीधा फायदा उन बुज़ुर्गों को मिलेगा जो बीमारी, कमजोरी या किसी अन्य वजह से रजिस्ट्रेशन ऑफिस तक नहीं पहुंच पाते.
क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार के मुताबिक, रजिस्ट्री ऑफिस की भीड़, लंबी लाइनें, दलालों का दबाव और तकनीकी प्रक्रिया बुज़ुर्गों के लिए मानसिक और शारीरिक यातना बन जाती है. कई मामलों में इसी मजबूरी का फायदा उठाकर दलाल और रिश्तेदार संपत्ति से जुड़ी गड़बड़ियां कर देते हैं. इसी खतरे को खत्म करने के लिए सरकार ने तय किया है कि रजिस्ट्री की प्रक्रिया सरकार खुद बुज़ुर्ग के दरवाज़े तक लेकर जाएगी.
कैसे होगी घर बैठे रजिस्ट्री?
इस नई व्यवस्था के तहत सरकार मोबाइल रजिस्ट्रेशन यूनिट तैयार करेगी. प्रक्रिया कुछ इस तरह होगी -
- वरिष्ठ नागरिक ऑनलाइन आवेदन करेगा या कराएगा
- विभाग आवेदन की जांच करेगा
- जांच पूरी होने पर सरकारी अधिकारी घर पहुंचेंगे
- वहीं पर बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, दस्तावेज़ जांच और रजिस्ट्री पूरी की जाएगी
सरकार का दावा है कि आवेदन स्वीकार होने के बाद 7 कार्यदिवस के भीतर पूरी प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी.
फर्जीवाड़े पर भी लगेगी लगाम
इस योजना का एक अहम पहलू यह है कि रजिस्ट्री से पहले अपडेटेड लैंड रिकॉर्ड उपलब्ध कराए जाएंगे. इसके लिए सर्किल ऑफिस से ताज़ा डेटा लिया जाएगा ताकि फर्जी जमीन, दोहरी रजिस्ट्री या कागजी गड़बड़ियों जैसी समस्याओं से बुज़ुर्गों को बचाया जा सके.
‘सात निश्चय-3’ का बड़ा सामाजिक संदेश
यह सुविधा बिहार सरकार की ‘सात निश्चय-3’ योजना का हिस्सा है, जिसे 2025 से 2030 तक लागू किया जाएगा. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले ही साफ कर चुके हैं कि इस चरण का फोकस सम्मान, सुरक्षा और सुविधा पर रहेगा - खासकर बुज़ुर्गों और कमजोर वर्गों के लिए.
विरासत विवादों पर भी असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भविष्य के पारिवारिक झगड़ों को भी कम करेगा. जब बुज़ुर्ग अपने जीवनकाल में ही संपत्ति का वैध और पारदर्शी हस्तांतरण कर सकेंगे, तो कोर्ट केस, पारिवारिक विवाद और सालों तक चलने वाले मुकदमे अपने आप घटेंगे.
जनता भी दे सकेगी सुझाव
सरकार ने इस योजना को लेकर जनता से सुझाव भी मांगे हैं. 19 जनवरी तक लोग मुख्यमंत्री कार्यालय में अपनी राय दर्ज करा सकते हैं. कुल मिलाकर, यह योजना सिर्फ एक सरकारी सुविधा नहीं, बल्कि बुज़ुर्गों के लिए सम्मान और भरोसे की गारंटी बनकर सामने आ रही है.





