'कोर्ट में कुछ, कैमरे पर कुछ और...' ज़ुबीन गर्ग केस में मीडिया की रिपोर्टिंग पर क्यों भड़के CM हिमंता, किस चीज को लेकर उठाए सवाल?
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने जुबीन गर्ग मौत मामले की मीडिया कवरेज पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि कुछ गवाहों के मीडिया इंटरव्यू और अदालत में दिए गए बयानों में अंतर है. सरमा ने आरोपियों की जमानत से जुड़ी खबरों पर भी चिंता जताई. उन्होंने मीडिया से मामले की संवेदनशीलता समझते हुए रिपोर्टिंग करने की अपील की है.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने जुबीन गर्ग मौत मामले की रिपोर्टिंग को लेकर मीडिया के एक वर्ग पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोपियों को जमानत मिलने की संभावना से जुड़ी खबरों और टीवी इंटरव्यू में गवाहों के दिए बयानों को लेकर प्रकाशित रिपोर्टों पर चिंता जताई. सरमा का कहना है कि मीडिया में गवाहों के बयानों को किस तरह पेश किया जा रहा है, इसकी पड़ताल जरूरी है. उन्होंने सवाल उठाया कि सुप्रीम कोर्ट के उनकी याचिकाओं पर फैसला सुनाने से पहले ही आरोपियों को जमानत मिलने की खबरें कैसे सामने आ रही हैं.
मुख्यमंत्री ने गुवाहाटी हाई कोर्ट से अमृतप्रभा महंत को मिली जमानत का भी जिक्र किया. इस मामले में जस्टिस प्रांजल दास ने जमानत का आदेश दिया था. सरमा ने कहा कि गवाहों ने मीडिया को दिए इंटरव्यू में जो बातें कही हैं, उनमें से कुछ कोर्ट में दर्ज कराए गए बयानों से अलग हैं. ऐसे में मीडिया में दिए गए बयानों और अदालत में रिकॉर्ड हुई गवाही को अलग-अलग नजरिए से देखना चाहिए.
सरमा ने मामले को लेकर क्या कहा?
सरमा ने यह भी कहा कि मामले में अभी कई गवाहों की गवाही होनी बाकी है. उन्होंने जोर दिया कि गवाहों को बिना किसी दबाव के अदालत में अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए. राज्य सरकार किसी भी गवाह पर दबाव नहीं बना सकती. मुख्यमंत्री ने मीडिया से अपील की कि इस संवेदनशील मामले की रिपोर्टिंग करते समय असम के लोगों की भावनाओं और मूल्यों को भी ध्यान में रखा जाए.
उन्होंने एक ऐसे गवाह का भी उल्लेख किया, जिसके जुबीन गर्ग की एक विरोध प्रदर्शन में भूमिका को लेकर दिए गए बयान की काफी चर्चा हुई थी. सरमा ने सवाल उठाया कि इस तरह के बयानों को मीडिया में किस संदर्भ में दिखाया जा रहा है और उनका अर्थ किस तरह निकाला जा रहा है.
सुनवाई 30 नवंबर तक टली
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जुड़ी जमानत याचिकाओं पर सुनवाई 30 नवंबर तक टाल दी है. इनमें श्यामकानु महंत और सिद्धार्थ शर्मा की जमानत याचिकाएं शामिल हैं. इसके अलावा असम सरकार ने अमृतप्रभा महंत और संदीपन गर्ग को गुवाहाटी हाई कोर्ट से मिली जमानत को भी चुनौती दी है. फिलहाल जुबीन गर्ग मौत मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में चल रही है. गवाहों की जांच और उनके बयान इस मुकदमे की सुनवाई का अहम हिस्सा बने हुए हैं.




