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10 जुलाई को योगिनी एकादशी, जानें व्रत की संपूर्ण पूजा विधि, महत्व और दान का धार्मिक फल

10 जुलाई को योगिनी एकादशी, जानें व्रत की संपूर्ण पूजा विधि, महत्व और दान का धार्मिक फल
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State Mirror Astro
By: State Mirror Astro3 Mins Read

Updated on: 10 July 2026 6:00 AM IST

सनातन धर्म में एकादशी तिथि भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है. आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को योगिनी एकादशी कहा जाता है. इस बार यह व्रत 10 जुलाई, शुक्रवार को रखा जाएगा. धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक योगिनी एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है.

साथ ही व्यक्ति के पापों का क्षय होता है और जीवन में आने वाली अनेक प्रकार की बाधाएं दूर होने लगती हैं. शास्त्रों में इस व्रत के पुण्य की तुलना बड़े-बड़े यज्ञों से प्राप्त होने वाले फल के समान की गई है. इस एकादशी का व्रत करने से 88 हजार ब्राह्राणों को भोजन खिलाने का पुण्य लाभ मिलता है.

योगिनी एकादशी पर क्या करें?

जो श्रद्धालु पूरे दिन निर्जल या निराहार व्रत रखने में सक्षम नहीं हैं, वे अपनी क्षमता के अनुसार एक समय फलाहार कर सकते हैं. फल, दूध या फलों का रस ग्रहण करना भी इस व्रत में स्वीकार्य माना गया है. यदि किसी कारणवश व्रत रखना संभव न हो, तो भी भगवान विष्णु की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना अवश्य करनी चाहिए. शास्त्रों के अनुसार केवल भगवान विष्णु को जल अर्पित कर तुलसी दल चढ़ाने और उनका स्मरण करने से भी विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.

योगिनी एकादशी व्रत और पूजा विधि

योगिनी एकादशी का व्रत दशमी तिथि से ही शुरू माना जाता है. इस दिन सात्विक भोजन करें और संयम का पालन करें. एकादशी की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें तथा सूर्यदेव को अर्घ्य दें. इसके बाद घर के मंदिर में भगवान गणेश, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा करें. पूजा के समय भगवान विष्णु का गंगाजल से अभिषेक करें और पंचामृत अर्पित करें. इसके बाद चंदन, रोली, अक्षत, धूप, दीप और पुष्प अर्पित करें. भगवान को तुलसी दल, फल और मिठाई का भोग लगाएं.

पूजा के दौरान "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें और व्रत का संकल्प लें. व्रती को रात्रि में भजन-कीर्तन, विष्णु सहस्रनाम, एकादशी व्रत कथा या भगवान विष्णु के नामों का स्मरण करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है. इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र, जल या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना भी विशेष फलदायी माना गया है.

द्वादशी पर करें व्रत का पारण

योगिनी एकादशी व्रत का समापन अगले दिन द्वादशी को किया जाता है. प्रातः स्नान करने के बाद भगवान विष्णु की पुनः पूजा करें. इसके बाद सात्विक भोजन तैयार कर पहले जरूरतमंद या ब्राह्मण को भोजन कराने का प्रयास करें. अंत में स्वयं भोजन ग्रहण करके विधिपूर्वक व्रत का पारण करें. धार्मिक मान्यता है कि इस प्रकार नियमपूर्वक योगिनी एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है तथा सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है.

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