दिन की जगह रात में क्यों हुआ Nana Patekar का अंतिम संस्कार? जानें हिंदू धर्म में इसे क्यों माना जाता है अशुभ
नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार सूर्यास्त के बाद किया गया, क्योंकि हादसे के बाद काफी समय बीत गया था. इसलिए यह फैसला लिया. हालांकि, हिंदू धर्म के अनुसार रात में दाह संस्कार करने से आत्मा को परलोक में कष्ट भोगना पड़ सकता है.
अभिनेता नाना पाटेकर की 8 अक्टूबर को गोवा के डोना पाउला स्थित घर में मौत हो गई. इस मामले में पणजी पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 194 के तहत अप्राकृतिक मौत (UD) का मामला दर्ज किया है. इसके बाद पुणे स्थित उनके फार्महाउस पर सूर्यास्त के बाद राजकीय सम्मान के साथ नाना का अंतिम संस्कार किया गया. ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि आखिर दिन की जगह रात में ही उन्हें अंतिम विदाई क्यों दी गई? नाना पाटेकर के बेटे मल्हार पाटेकर ने इसकी वजह बताते हुए कहा कि उनके पिता के साथ यह हादसा सुबह जल्दी हुआ था और तब तक काफी समय बीत चुका था. इसलिए परिवार ने उसी दिन अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया.
वहीं, हिंदू धर्म की कई मान्यताओं में सूर्यास्त के बाद दाह संस्कार करना उचित नहीं माना जाता है. गरुण पुराण के अनुसार, रात के समय अंतिम संस्कार करने से मृत आत्मा की परलोक यात्रा में बाधा आ सकती है. कुछ धार्मिक मान्यताओं में इसे आत्मा के कष्ट और मोक्ष के रास्ते में रुकावट से भी जोड़ा जाता है. इसी वजह से कई परिवार रात में मृत्यु होने पर शव को सुरक्षित रखकर सुबह सूर्योदय के बाद अंतिम संस्कार करते हैं.
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कहां हुआ अंतिम संस्कार?
नाना पाटेकर के निधन के बाद गोवा में जरूरी औपचारिकताएं पूरी की गईं. इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को पुणे ले जाया गया, जहां उनके फार्महाउस 'नानाची वाड़ी' में सूरज ढलने के बाद पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका दाह संस्कार किया गया. उनके परिवार में पत्नी नीलकांति पाटेकर और बेटा मल्हार पाटेकर हैं.
बेटे मल्हार ने बताई रात में अंतिम संस्कार की वजह
नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार के समय उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने मौजूद मीडिया का शुक्रिया अदा किया. इस दौरान उनसे पूछा गया कि परिवार ने सुबह होने का इंतजार करने के बजाय रात में ही अंतिम विदाई देने का फैसला क्यों किया. क्या परिवार दूसरे फिल्मी सितारों के आने का इंतजार नहीं करना चाहता था? इस पर मल्हार ने बताया कि ऐसी कोई बात नहीं थी. उनके पिता के साथ यह घटना सुबह-सुबह हुई थी और काफी वक्त गुजर चुका था. इसी वजह से परिवार ने उसी दिन अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया.
क्यों नहीं किया जाता रात में दाह संस्कार?
हिंदू रीति-रिवाजों में आमतौर पर अंतिम संस्कार दिन के उजाले में करने की परंपरा है. गरुड़ पुराण से जुड़ी कुछ मान्यताओं में माना जाता है कि सूर्यास्त के बाद स्वर्क के द्वार बंद हो जाते हैं. इसलिए दिन में दाह संस्कार करना चाहिए.
क्या आत्मा को होता है कष्ट?
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार करने से मृतक की आत्मा को परलोक में कष्ट होने की आशंका जताई जाती है.
पुनर्जन्म में दोष से क्या है संबंध?
कुछ मान्यताओं में इसे अगले जन्म में शारीरिक दोष होने की आशंका से भी जोड़ा जाता है. इसी वजह से कई परिवार अंतिम संस्कार के लिए सूर्योदय के बाद का समय चुनते हैं.
अगर किसी की मृत्यु रात में हो जाए तो?
अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु रात में हो जाती है, तो कई परिवार पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार शव को सुरक्षित रखकर सुबह होने का इंतजार करते हैं. सूर्योदय के बाद धार्मिक विधियों के साथ अंतिम संस्कार किया जाता है. हालांकि, यह हर परिस्थिति में संभव नहीं होता है. कभी-कभी शव को सुरक्षित रखने में परेशानी, लंबी दूरी से पार्थिव शरीर लाने या अन्य जरूरी कारणों से परिवार को समय में बदलाव करना पड़ सकता है.
कब किया जा सकता है रात में अंतिम संस्कार?
कुछ खास हालात में रात के समय भी अंतिम संस्कार करना पड़ सकता है. मसलन, अगर शव को सुबह तक सुरक्षित रखना मुमकिन न हो या किसी मेडिकल वजह से देर करना सही न लगे. ऐसे समय में परिवार अपने रीति-रिवाजों के हिसाब से अंतिम संस्कार की विधियां पूरी कर सकता है. कुछ धार्मिक परंपराओं में दिवंगत व्यक्ति की आत्मा की शांति के लिए शांति पाठ और पूजा-पाठ करने की भी मान्यता है. इसलिए हर मामले में रात के समय अंतिम संस्कार को अशुभ मानना सही नहीं होगा.




