Somvati Amavasya 2026: 15 जून को करें ये 5 खास उपाय, शिव कृपा के साथ पितृ दोष से भी मिलेगी मुक्ति!
15 जून 2026 को सोमवती अमावस्या है. जानें पूजा विधि, वट वृक्ष पूजा, पितृ तर्पण, दान का महत्व और शिव कृपा पाने के विशेष उपाय.
सनातन धर्म में अमावस्या तिथि को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. प्रत्येक माह आने वाली अमावस्या पूजा-पाठ, दान और पितरों के स्मरण के लिए शुभ मानी जाती है. जब यह तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तब इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है.
यह दिन भगवान शिव, माता पार्वती और पितरों की आराधना के लिए विशेष फलदायी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन स्नान, व्रत, दान और पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा सुख-समृद्धि का आगमन होता है. इस वर्ष सोमवती अमावस्या 15 जून को मनाई जाएगी.
सोमवती अमावस्या का धार्मिक महत्व
धर्म शास्त्रों के अनुसार सोमवती अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान, व्रत और दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है. मान्यता है कि इस दिन किए गए शुभ कर्मों का फल जल्दी मिलता है और व्यक्ति के पापों का नाश होता है. खासतौर पर भगवान शिव की पूजा करने से मानसिक शांति, सुख और समृद्धि प्राप्त होती है. यह दिन आध्यात्मिक साधना और आत्मशुद्धि के लिए भी अत्यंत शुभ माना गया है.
पूजा का महत्व
ज्येष्ठ माह की अमावस्या भीषण गर्मी के समय आती है, इसलिए इस दिन वटवृक्ष की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. वटवृक्ष को जीवन, दीर्घायु और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास होता है. विवाहित महिलाएं इस दिन पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए व्रत रखती हैं. वे वटवृक्ष की पूजा कर उसके तने पर कलावा या सूती धागा बांधती हैं तथा जल, रोली, अक्षत, फूल और मिठाई अर्पित कर परिक्रमा करती हैं.
पितृ तर्पण और दान का महत्व
सोमवती अमावस्या पितरों को समर्पित तिथियों में भी विशेष मानी जाती है. इस दिन गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान कर तर्पण और पिंडदान करने से पितरों को शांति प्राप्त होती है. ऐसा माना जाता है कि पितर प्रसन्न होकर परिवार को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं. जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता है, उनके लिए यह दिन बेहद लाभकारी माना जाता है. इस अवसर पर जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, मटका, पंखा, छाता और शीतल वस्तुओं का दान करना शुभ फल प्रदान करता है.
सोमवती अमावस्या के विशेष उपाय
- -सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और जल में गंगाजल मिलाकर सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करें. इसके बाद ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें.
- -वटवृक्ष की विधिपूर्वक पूजा करें, मीठा जल अर्पित करें और कलावा बांधकर उसकी 108 बार परिक्रमा करें.
- -पितरों के निमित्त तिल मिश्रित जल से तर्पण करें और श्रद्धा से उनका स्मरण करें.
- -गरीब और जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, पंखा, छाता, मटका और ठंडी वस्तुओं का दान करें.
- -शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करें. साथ ही महामृत्युंजय मंत्र और शिव चालीसा का पाठ करें.




