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सर्वपितृ अमावस्या पर 30 साल बाद शनि का दुर्लभ संयोग, 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि शुरू

10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृ पक्ष का समापन होगा. इस बार शनिवार को अमावस्या पड़ने से इसे शनिश्चरी अमावस्या भी कहा जा रहा है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दिन शनि से जुड़ा विशेष संयोग बन रहा है. इस दिन श्राद्ध, तर्पण और दान के साथ शनि देव की पूजा का भी खास महत्व है. इसके अगले दिन शारदीय नवरात्रि शुरू होगी.

सर्वपितृ अमावस्या पर 30 साल बाद शनि का दुर्लभ संयोग, 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि शुरू
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( Image Source:  Image Source : Google gemini )
State Mirror Astro
Edited By:State Mirror Astro3 Mins Read

Updated on: 10 Oct 2026 7:02 AM IST

शनिवार, 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृ पक्ष का समापन होगा. इस दिन पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है. शनिवार को अमावस्या पड़ने के कारण इसे शनिश्चरी अमावस्या भी कहा जाता है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस बार अमावस्या पर शनि से जुड़ा विशेष संयोग बन रहा है. इसके अगले दिन यानी 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ होगा.

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, 10 अक्टूबर को सूर्य और चंद्रमा कन्या राशि में रहेंगे, जबकि शनि मीन राशि में वक्री अवस्था में उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में गोचर करेंगे. इस दौरान शनि की दृष्टि सूर्य और चंद्रमा पर रहेगी. बताया जाता है कि इससे पहले 12 अक्टूबर 1996 को भी इस तरह का संयोग बना था. शनिवार, अमावस्या तिथि और शनि के अपने स्वामित्व वाले नक्षत्र में होने के कारण इस दिन का ज्योतिषीय महत्व बढ़ गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पितरों का स्मरण, श्राद्ध और दान करने के साथ शनि देव की कृपा प्राप्त करने के लिए भी पूजा-पाठ किया जा सकता है.

सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध का महत्व

पितृ पक्ष की अमावस्या को सर्वपितृ अमावस्या या पितृ मोक्ष अमावस्या भी कहा जाता है. इस दिन उन पूर्वजों का श्राद्ध भी किया जा सकता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है या किसी कारणवश निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाया है.

मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से श्राद्ध और तर्पण करने से पितरों को शांति मिलती है. परंपरा के अनुसार, ब्राह्मणों को भोजन कराने से पहले पंचबलि निकाली जाती है. इसमें गाय, कुत्ते, कौए, देवताओं और चींटियों के लिए भोजन का अंश अलग रखा जाता है.

सर्वपितृ अमावस्या पर ऐसे करें तर्पण

- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें.

- पितरों का स्मरण करते हुए दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें.

- तांबे के पात्र में जल लेकर उसमें काले तिल और कुश डालें. परंपरा के अनुसार गंगाजल और कच्चा दूध भी मिलाया जा सकता है.

- श्रद्धापूर्वक पितरों को जल अर्पित करें और उनकी शांति के लिए प्रार्थना करें.

- अपनी सामर्थ्य के अनुसार भोजन, वस्त्र और दक्षिणा का दान करें.

- शाम को घर के मंदिर में दीपक जलाकर पितरों का स्मरण करें.

11 अक्टूबर से शुरू होगी शारदीय नवरात्रि

सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृ पक्ष का समापन हो जाएगा. इसके अगले दिन, 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होगी. नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. भक्त इन दिनों व्रत, पूजा और साधना के माध्यम से देवी की आराधना करते हैं.

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