Pitru Paksha 2026: कुंडली में कैसे करें पितृ दोष की पहचान? जानें कैसे दूर करें ये दोष
जन्मकुंडली में कुछ खास ग्रह योग बनने पर पितृ दोष होता है. खासतौर पर सूर्य, राहु, केतु, शनि और कुंडली के नवम भाव में होने का संबंध पितृ दोष से है.
Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर से होने जा रही है. इस दौरान लोग अपने पूर्वजों को याद कर तर्पण और श्राद्ध करते हैं. धार्मिक मान्यताओं में पितृ पक्ष को पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और उनका आशीर्वाद लेने का खास समय माना जाता है.
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, कुंडली में नवम भाव में सूर्य और राहु की युति पितृ दोष का एक प्रमुख संकेत मानी जाती है. वहीं, इससे जुड़े दोष को शांत करने के लिए पितृ पक्ष में पूर्वजों के नाम से तर्पण और श्राद्ध करने की परंपरा है. अमावस्या के दिन काले तिल मिले जल से तर्पण करना और श्रद्धापूर्वक पितरों का स्मरण करना भी उपायों में बताया गया है.
कुंडली में कैसे पहचाने पितृ दोष?
- ज्योतिष शास्त्र में पितृ दोष का पता लगाने के लिए जन्मकुंडली में सूर्य और नवम भाव को अहम माना जाता है. मान्यता है कि यदि भाग्य भाव यानी नौवें घर में सूर्य के साथ राहु मौजूद हो, तो यह पितृ दोष बनने की ओर संकेत करता है.
- इसके अलावा, कुंडली में अगर राहु, केतु या शनि का संबंध सूर्य से बन रहा हो, चाहे इन ग्रहों की सूर्य पर नजर हो या वे उसके साथ बैठे हों, तो ज्योतिषीय मान्यताओं में ऐसी स्थिति को भी पितृ दोष से जोड़कर देखा जाता है.
- जन्मकुंडली में नौवें घर के स्वामी ग्रह की स्थिति को भी पितृ दोष के रूप में देखा जाता है. मान्यता है कि यदि नवमेश छठे, आठवें या बारहवें भाव में स्थित हो या उसकी स्थिति कमजोर हो, तो पितृ दोष हो सकता है.
- इसी तरह कुंडली के पांचवें भाव में अगर चंद्रमा के साथ केतु की युति बन रही हो, या पहले भाव यानी लग्न में राहु मौजूद हो और सूर्य कमजोर अवस्था में हो, तो ज्योतिषीय मान्यताओं में इन योगों को भी पितृ दोष से संबंधित माना जाता है.
पितृ दोष का क्या पड़ता है असर?
- ज्योतिषीय मान्यताओं में पितृ दोष को जीवन में आने वाली कुछ अड़चनों से जोड़कर देखा जाता है. इसके प्रभाव के चलते नौकरी या कारोबार में बार-बार परेशानियां आ सकती हैं, प्रयास करने के बाद भी काम पूरे होने में देरी हो सकती है और धन से जुड़ी दिक्कतें बनी रह सकती हैं.
- पितृ दोष का संबंध वैवाहिक जीवन में आने वाली परेशानियों से भी माना जाता है. इससे शादी में अड़चन या रिश्तों में मतभेद की स्थिति बन सकती है. इसके अलावा घर के सदस्यों के बीच बार-बार विवाद होना और माहौल में तनाव बने रहना भी इसके संभावित प्रभावों में गिना जाता है.
- ज्योतिष में कुछ लोग संतान प्राप्ति से जुड़ी रुकावटों को भी पितृ दोष से संबंधित मानते हैं.
पितृ दोष दूर करने के लिए क्या करें?
पितृ पक्ष और अमावस्या को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का खास अवसर माना जाता है. इस अवधि में पितरों के नाम से श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा है. मान्यता के अनुसार पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाना, जल में काले तिल मिलाकर अर्पित करना और पूर्वजों का ध्यान करते हुए प्रार्थना करना पितृ दोष की शांति के उपायों में शामिल है. इन्हें धार्मिक आस्था और परंपरा के अनुसार किया जा सकता है.
नोट: यह जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आधारित है. स्टेट मिरर हिंदी इसकी पूर्ण सत्यता या प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है.




