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कब है मौनी अमावस्या? पितरों की शांति के लिए है सबसे महत्वपूर्ण

अमावस्या का दिन एक वर्ष में 12 बार आता है और इसे पितरों की शांति के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है. वैसे तो सभी अमावस्याओं का महत्व होता है, लेकिन हिंदू माह माघ में पड़ने वाली अमावस्या, जिसे मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है, विशेष रूप से शुभ मानी जाती है.

कब है मौनी अमावस्या? पितरों की शांति के लिए है सबसे महत्वपूर्ण
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( Image Source:  social media-X )
कुसुम शर्मा
Edited By: कुसुम शर्मा2 Mins Read

Updated on: 16 Jan 2025 7:59 AM IST

अमावस्या का दिन एक वर्ष में 12 बार आता है और इसे पितरों की शांति के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है. वैसे तो सभी अमावस्याओं का महत्व होता है, लेकिन हिंदू माह माघ में पड़ने वाली अमावस्या, जिसे मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है, विशेष रूप से शुभ मानी जाती है.

ऐसा माना जाता है कि इस दिन मौन व्रत रखने, पवित्र स्नान करने और दान करने से कई जन्मों के पापों का नाश होता है. साल 2025 में मौनी अमावस्या के दिन महाकुंभ शाही स्नान होने से एक विशेष संयोग बन रहा है.

कब है मौनी अमावस्या?

2025 में मौनी अमावस्या 29 जनवरी को मनाई जाएगी. इसी दिन प्रयागराज में महाकुंभ का तीसरा शाही स्नान भी होगा. महाकुंभ शाही स्नान के साथ मौनी अमावस्या का यह दुर्लभ संयोग अत्यंत फलदायी माना जा रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या पर दान और पितृ पूजन करने से कष्टों से मुक्ति मिलती है और पितरों का आशीर्वाद मिलता है.

मौनी अमावस्या पर स्नान करने से मिलता है दोहरा लाभ

माघ महीने में पवित्र नदियों में स्नान करना पुण्य का काम माना जाता है, लेकिन मौनी अमावस्या पर आध्यात्मिक पुण्य कई गुना बढ़ जाता है. इस दिन पूर्ण मौन रहने से स्वास्थ्य लाभ और ज्ञान की प्राप्ति होती है. मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं, भय या चिंता से पीड़ित लोगों को विशेष रूप से इस दिन पवित्र स्नान करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इससे ऐसी समस्याओं से राहत मिलती है.

मौनी अमावस्या का महत्व

इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करना और जरूरतमंदों को भोजन कराना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है. इससे जाने-अनजाने में किए गए पापों का प्रायश्चित करने में मदद मिलती है. ऐसा माना जाता है कि पूरे दिन मौन रहने से स्वास्थ्य और बुद्धि में वृद्धि होती है. मौनी अमावस्या पर पवित्र स्नान मानसिक विकार, भय और भ्रम को कम करने में सहायक होता है. इस व्रत को पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ करने से व्यक्ति की कुंडली से ग्रह संबंधी कष्ट दूर हो सकते हैं.

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