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Ramayan Facts: रामायण में थी ही नहीं लक्ष्मण रेखा, एक्सपर्ट अक्षत गुप्ता से जानें सीता हरण से जुड़ा अनोखा सच

हम सभी ने रामायण में लक्ष्मण रेखा का जिक्र सुना है. माता सीता की सुरक्षा के लिए यह रेखा खींची गई थी, लेकिन लेखक अक्षत गुप्ता के अनुसार मूल रामायण में इस कहानी का जिक्र नहीं है.

Ramayan Facts: रामायण में थी ही नहीं लक्ष्मण रेखा, एक्सपर्ट अक्षत गुप्ता से जानें सीता हरण से जुड़ा अनोखा सच
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हेमा पंत
Edited By:हेमा पंत3 Mins Read

Updated on: 4 Nov 2026 9:54 AM IST

दिवाली आने वाली है. साथ ही, रणबीर कपूर की फिल्म रामायण भी रिलीज होने वाली है. ऐसे में रामायण के किस्से फिर से याद किए जाएंगे. इस कथा में सीता हरण का किस्सा बेहद मशहूर है. यह बात हम सभी जानते हैं कि जब भगवान राम, हिरण के पीछे गए तो माता सीता की सुरक्षा के लिए लक्ष्मण ने कुटिया के बाहर एक रेखा खींच दी थी. उन्होंने सीता माता से कहा था कि वह इस रेखा को पार न करें.

लेकिन क्या जानते हैं कि रामायण का यह मशहूर प्रसंग असल में मूल रामायण का हिस्सा नहीं है? दरअसल, लेखक अक्षत गुप्ता ने शुभांकर मिश्रा के पॉडकास्ट में इस विषय पर ऐसी बात बताई, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया. उनका कहना है कि लक्ष्मण रेखा का प्रसंग मूल रामायण में मिलता ही नहीं है. अब सवाल उठता है कि अगर ऐसा है तो फिर यह कहानी आई कहां से? अक्षत गुप्ता के मुताबिक, लक्ष्मण रेखा की कहानी बाद में लिखे गए क्षेत्रीय और लोक रामायण संस्करणों में सामने आई

क्या वाल्मीकि रामायण में नहीं है लक्ष्मण रेखा का जिक्र


रामायण की सबसे प्राचीन और प्रमुख रचनाओं में महर्षि वाल्मीकि की संस्कृत रामायण का नाम आता है. इसमें लक्ष्मण के रेखा खींचने का कोई जिक्र नहीं है. महर्षि वाल्मीकि के अनुसार असल कहानी कुछ और है. मारीच सोने के हिरण का रूप लेकर भगवान राम को कुटिया से दूर ले जाता है और बाद में राम की आवाज में मदद के लिए पुकारता है, तब माता सीता चिंतित हो जाती हैं. वह लक्ष्मण को अपने भाई की सहायता के लिए भेजती हैं. इसके बाद लक्ष्मण कुटिया छोड़कर चले जाते हैं और रावण साधु का भेष बनाकर वहां पहुंचता है.

रामचरितमानस में भी नहीं है यह पूरा प्रसंग

गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस में भी अरण्यकांड के दौरान लक्ष्मण रेखा खींचने की घटना नहीं बताई गई है. यानी जिस प्रसंग को हम बचपन से रामायण की कहानी का अहम हिस्सा मानते आए हैं, वह मूल कथा के इस हिस्से में मौजूद नहीं है. हालांकि, लंकाकांड में मंदोदरी रावण को ताना मारते हुए एक छोटी सी रेखा का जिक्र करती हैं, जिसे वह पार नहीं कर पाया था.

कहां से आई लक्ष्मण रेखा की कहानी?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब शुरुआती रामायण में इसका जिक्र नहीं मिलता तो यह कहानी इतनी मशहूर कैसे हो गई? दरअसल, समय के साथ रामायण की कथा अलग-अलग भाषाओं और क्षेत्रों में लिखी गई. इन क्षेत्रीय और लोक संस्करणों में कई नए प्रसंग भी जुड़े. 14वीं शताब्दी की तेलुगु रंगनाथ रामायण, 15वीं शताब्दी की बांग्ला कृत्तिवासी रामायण और आनंद रामायण जैसी रचनाओं में लक्ष्मण रेखा का विस्तार से वर्णन मिलता है.

क्यों लोगों को याद है ये कहानी

लक्ष्मण रेखा का प्रसंग भले ही मूल रामायण में न मिलता हो, लेकिन भारतीय समाज में इसका अपना अलग महत्व बन चुका है. आज भी किसी को अपनी सीमा में रहने की सलाह देनी हो तो लक्ष्मण रेखा का उदाहरण दिया जाता है. यह कहानी समय के साथ इतनी लोकप्रिय हुई कि लोग इसे रामायण की मूल घटना समझने लगे.

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