आखिर दिवाली पर जुआ खेलने की शुरुआत कैसे हुई? जानें शिव-पार्वती से जुड़ी कहानी, क्या धर्म में यह खेलना सही या गलत
दिवाली की रात ताश खेलने की परंपरा है. इसका संबंध भगवान शिव और पार्वती से जुड़ा है. मान्यता है कि समृद्धि के लिए इस दिन जुआ खेला जाता है.
दिवाली आते ही घरों में दीये जलने लगते हैं, मिठाइयों की खुशबू फैल जाती है और चारों तरफ त्योहार की रौनक दिखाई देने लगती है. लेकिन इस त्योहार से जुड़ी एक ऐसी परंपरा भी है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. आपने देखा होगा कि दिवाली की रात कई घरों में लोग परिवार और दोस्तों के साथ ताश या पासे खेलते हैं.
कुछ लोग इसे सिर्फ मनोरंजन मानते हैं, तो कुछ इसे शुभ शगुन समझते हैं. आखिर मां लक्ष्मी की पूजा वाली रात जुआ खेलने की परंपरा कहां से शुरू हुई? इसका संबंध मां पार्वती और शिव जी से है.
कहां से शुरू हुई दिवाली पर जुआ खेलने की रीत
दिवाली की रात जुआ खेलने की परंपरा को लेकर एक पौराणिक कथा प्रचलित है. मान्यता के अनुसार, एक बार भगवान शिव और माता पार्वती ने चौपड़ यानी पासों का खेल खेला था. इस खेल में माता पार्वती की जीत हुई थी. कहा जाता है कि इस प्रसंग के बाद माता पार्वती ने घोषणा की कि जो भी व्यक्ति दिवाली की रात शगुन के तौर पर पासे या ताश खेलेगा, उसके घर में पूरे साल सुख-समृद्धि बनी रहेगी और मां लक्ष्मी की कृपा रहेगी. इसी मान्यता के चलते कई जगह दिवाली की रात परिवार के लोग एक साथ बैठकर ताश खेलते हैं.
एलोरा गुफाओं में भी
इसे पूरे साल के लिए शुभ शुरुआत और मनोरंजन से जोड़कर देखा जाता है. इस कथा का संबंध महाराष्ट्र की एलोरा गुफाओं से भी बताया जाता है. वहां स्थित कैलाश मंदिर में शिव-पार्वती के चौपड़ खेलने का प्रसंग पत्थरों पर उकेरा गया है.
क्या दिवाली पर जुआ खेलना सही?
यहां एक बात समझना जरूरी है. दिवाली पर ताश खेलने की परंपरा को जुए की खुली छूट नहीं माना जा सकता है. धार्मिक मान्यताओं में शगुन के तौर पर हल्का-फुल्का खेल खेलने और पैसे दांव पर लगाकर जुआ खेलने के बीच अंतर बताया जाता है. महाभारत में जुए के कारण पांडवों को अपना राजपाट और सम्मान तक गंवाना पड़ा था. वहीं गरुड़ पुराण सहित कई धार्मिक ग्रंथों में भी जुए और गलत आदतों से दूर रहने की सीख मिलती है.
इसलिए दिवाली की रात ताश खेलने को अगर परिवार के साथ हंसी-मजाक और मनोरंजन तक रखा जाए, तो इसे एक परंपरा की तरह देखा जा सकता है. लेकिन पैसे लगाकर जुआ खेलना या लालच में अपनी कमाई दांव पर लगाना सही नहीं है. त्योहार का असली मकसद घर में खुशियां बांटना और अपनों के साथ अच्छा समय बिताना है, न कि किसी को जीतने या हारने के लिए मजबूर करना.




