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Guru Purnima 2026: 29 जुलाई को करें गुरु का पूजन, जानें स्नान से लेकर मंत्र जाप तक संपूर्ण पूजा विधि

गुरु पूर्णिमा 2026 का पर्व 29 जुलाई, बुधवार को मनाया जाएगा. इस दिन गुरु, माता-पिता और मार्गदर्शकों के प्रति सम्मान प्रकट किया जाता है. जानें गुरु पूर्णिमा पूजा विधि, धार्मिक महत्व, पूजा सामग्री और इस शुभ दिन से जुड़ी मान्यताएं.

Guru Purnima 2026 Date  Vyas Purnima
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गुरु पूर्णिमा

( Image Source:  Chat GPT )
सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी3 Mins Read

Updated on: 29 July 2026 7:30 AM IST

सनातन धर्म में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है. शास्त्रों के अनुसार गुरु ही वह माध्यम हैं, जो व्यक्ति को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं. इसलिए हर वर्ष आषाढ़ पूर्णिमा के दिन गुरु पूर्णिमा का पर्व बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है.

इस दिन अपने गुरु, माता-पिता, आचार्य और जीवन में सही मार्ग दिखाने वाले सभी व्यक्तियों के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है. वर्ष 2026 में गुरु पूर्णिमा का पर्व 29 जुलाई, बुधवार को मनाया जाएगा. आइए जानते हैं इस शुभ अवसर पर गुरु पूजन की सही और संपूर्ण विधि.

ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर करें दिन की शुरुआत

गुरु पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ तथा शुद्ध वस्त्र धारण करें. इसके बाद पूजा स्थान की साफ-सफाई करके गंगाजल का छिड़काव करें. ऐसा करने से पूजा स्थल पवित्र माना जाता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

श्रद्धा के साथ गुरु का आसन स्थापित करें

जिस गुरु के प्रति आपकी श्रद्धा है, उनकी तस्वीर या चरण पादुका को एक स्वच्छ चौकी पर लाल या पीले वस्त्र बिछाकर स्थापित करें. स्थापना करते समय मन में गुरु का ध्यान करें और उनसे जीवन में सदैव मार्गदर्शन देने की प्रार्थना करें.

दीप और धूप से करें पूजन का शुभारंभ

गुरु पूजन से पहले घी का दीपक जलाएं और धूप या अगरबत्ती अर्पित करें. मान्यता है कि दीपक का प्रकाश ज्ञान का प्रतीक होता है, जबकि धूप से वातावरण पवित्र और भक्तिमय बनता है.

पूजा से पहले लें गुरु भक्ति का संकल्प

पूजन प्रारंभ करने से पहले हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर गुरु का स्मरण करें. इसके बाद सच्चे मन से संकल्प लें कि आप श्रद्धा और पूर्ण समर्पण के साथ गुरु का पूजन कर रहे हैं तथा उनके बताए मार्ग पर चलने का प्रयास करेंगे.

चरण पादुका का करें अभिषेक

यदि आपके पास गुरु की चरण पादुका उपलब्ध हो तो उनका दूध और शुद्ध जल से अभिषेक करें. इसके बाद साफ वस्त्र से पोंछकर चंदन, अक्षत, पुष्प और माला अर्पित करें. यदि चरण पादुका न हो तो गुरु की तस्वीर का विधिपूर्वक पूजन भी किया जा सकता है.

नैवेद्य और दक्षिणा अर्पित करें

पूजन के बाद फल, मिठाई, मिष्ठान या अपनी श्रद्धा के अनुसार कोई भी प्रसाद अर्पित करें. इसके साथ ही गुरु को दक्षिणा या अपनी सामर्थ्य के अनुसार भेंट अर्पित करना शुभ माना गया है. यदि गुरु साक्षात उपस्थित न हों तो किसी जरूरतमंद, विद्वान या ब्राह्मण को दान देकर भी यह परंपरा निभाई जा सकती है.

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