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रात में आती है बैल की आवाज, दिनों दिन बढ़ता है स्वयंभू शिवलिंग का आकार, कहानी भूतेश्वरनाथ मंदिर की

गरियाबंद के भूतेश्वरनाथ महादेव को लेकर मान्यता है कि शिवलिंग का आकार बढ़ता है. जानें काले बैल की आवाज, दूध चढ़ाने और रात की घंटियों का रहस्य.

रात में आती है बैल की आवाज, दिनों दिन बढ़ता है स्वयंभू शिवलिंग का आकार, कहानी भूतेश्वरनाथ मंदिर की
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सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी6 Mins Read

Updated on: 12 Aug 2026 7:40 AM IST

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के घने जंगलों में भगवान शिव का एक ऐसा धाम है, जो अपनी विशालता और रहस्यमयी मान्यताओं के कारण देशभर में चर्चा में रहता है. मरौदा गांव के जंगल में स्थित भूतेश्वरनाथ महादेव को स्थानीय लोग स्वयंभू शिवलिंग मानते हैं. मान्यता है कि यह शिवलिंग धरती से प्राकृतिक रूप से प्रकट हुआ है और इसका आकार समय के साथ बढ़ रहा है.

स्थानीय लोगों के अनुसार, इसे भकुर्रा महादेव भी कहा जाता है. यहां शिवलिंग की विशालता के साथ कई लोककथाएं जुड़ी हैं. इनमें जंगल में काले सांड की आवाज सुनाई देना, गायों का एक खास जगह पर अपने आप दूध चढ़ाना और रात में घंटियों तथा 'ॐ नमः शिवाय' जैसी आवाज सुनाई देने की मान्यताएं शामिल हैं. आइए जानते हैं इस अनोखे शिवधाम की पूरी कहानी.

जंगल में मिला विशाल शिवलिंग

गरियाबंद जिला मुख्यालय से कुछ दूरी पर मरौदा गांव के घने जंगल में यह प्राकृतिक शिवलिंग स्थित है. पथरीले रास्ते और जंगल पार करने के बाद जब श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं तो सामने विशाल शिवलिंग दिखाई देता है. स्थानीय लोगों के मुताबिक इसकी ऊंचाई करीब 65 से 70 फीट बताई जाती है, जबकि इसका प्राकृतिक विस्तार करीब 220 फीट तक बताया जाता है. इसे एशिया के सबसे बड़े शिवलिंगों में से एक बताया जाता है. हालांकि इसके आकार और 'सबसे बड़ा' होने के दावे की स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है.

काले सांड की आवाज से जुड़ी है कहानी

भूतेश्वरनाथ के नाम के साथ एक पुरानी लोककथा भी जुड़ी है. कहा जाता है कि कभी इस जंगल में एक काले सांड के रंभाने की आवाज सुनाई देती थी. ग्रामीणों को समझ नहीं आता था कि आवाज आखिर कहां से आ रही है. जिस इलाके से यह आवाज सुनाई देती थी, उसी स्थान के आसपास बाद में प्राकृतिक शिवलिंग मिलने की बात कही जाती है. इसी वजह से स्थानीय लोगों ने इसे भकुर्रा महादेव कहना शुरू कर दिया.

गायों ने खुद चढ़ाया दूध?

इस शिवलिंग को लेकर एक और कहानी ग्रामीणों के बीच प्रचलित है. लोककथा के मुताबिक, कुछ चरवाहों ने जंगल में देखा कि उनकी गायें एक खास चट्टान के पास जाकर अपने आप दूध छोड़ रही हैं. यह देखकर ग्रामीणों को शक हुआ कि उस जगह कुछ असामान्य जरूर है. बुजुर्गों की मौजूदगी में जब वहां खुदाई की गई तो जमीन से प्राकृतिक शिवलिंग दिखाई देने की बात कही जाती है. इसके बाद वहां पूजा-अर्चना शुरू हो गई. यह घटना लोकमान्यता का हिस्सा है और इसकी स्वतंत्र ऐतिहासिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है.

हर साल बढ़ता है शिवलिंग का आकार?

भूतेश्वरनाथ से जुड़ी सबसे चर्चित मान्यता इसके बढ़ते आकार को लेकर है. स्थानीय लोगों और मंदिर से जुड़े लोगों का दावा है कि शिवलिंग का आकार धीरे-धीरे बढ़ रहा है. इसके साथ मौजूद जलहरी के आकार में भी बदलाव होने की बात कही जाती है. यह दावा श्रद्धालुओं के बीच काफी प्रसिद्ध है, लेकिन इसके लगातार बढ़ने की वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है. इसलिए इसे स्थानीय धार्मिक मान्यता के रूप में ही देखा जाता है.

बिजली गिरने के बाद अलग हुई जलहरी

स्थानीय लोगों के अनुसार, 1960 के दशक में इलाके में प्राकृतिक आपदा के दौरान शिवलिंग के पास बिजली गिरने की घटना हुई थी. इसके बाद शिवलिंग से जुड़ा जलहरी का हिस्सा अलग हो गया. आज भी जलहरी को शिवलिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. शिवलिंग के सामने नंदी भी विराजमान हैं और पूरा स्थान पूजा-अर्चना का प्रमुख केंद्र बन चुका है.

कैसे प्रसिद्ध हुआ भूतेश्वरनाथ धाम?

बताया जाता है कि पहले इस स्थान की जानकारी आसपास के गांवों तक ही सीमित थी. बाद में दूर-दराज से आए कुछ श्रद्धालुओं को धार्मिक साहित्य के जरिए इस स्थान के बारे में जानकारी मिली. इसके बाद लोगों का यहां आना बढ़ने लगा. पूजा-पाठ और प्रसाद वितरण की शुरुआत हुई और धीरे-धीरे जंगल में स्थित यह प्राकृतिक शिवलिंग एक प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में पहचान बनाने लगा.

रात में घंटियों और मंत्रों की आवाज का दावा

भूतेश्वरनाथ महादेव से जुड़ी सबसे रहस्यमयी मान्यता रात के समय सुनाई देने वाली आवाजों को लेकर है. स्थानीय लोगों और कुछ श्रद्धालुओं का दावा है कि रात के सन्नाटे में यहां घंटियों की आवाज सुनाई देती है. कुछ लोग 'ॐ नमः शिवाय' जैसे मंत्र सुनाई देने की बात भी कहते हैं. हालांकि इन दावों की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है. ये स्थानीय मान्यताएं और श्रद्धालुओं के अनुभव हैं.

सावन और महाशिवरात्रि पर उमड़ती है भीड़

भूतेश्वरनाथ महादेव में पूरे साल श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन सावन, महाशिवरात्रि और सोमवती अमावस्या जैसे अवसरों पर यहां खास भीड़ देखने को मिलती है. दूर-दराज के इलाकों से श्रद्धालु जल लेकर पहुंचते हैं और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं. स्थानीय आस्था है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना पूरी होती है.

आस्था, प्रकृति और रहस्य का अनोखा संगम

भूतेश्वरनाथ महादेव की खासियत सिर्फ इसका विशाल प्राकृतिक स्वरूप नहीं है. इसके साथ जुड़ी लोककथाएं भी इसे अलग पहचान देती हैं. काले सांड की आवाज, गायों द्वारा दूध चढ़ाने की कहानी, बढ़ते शिवलिंग की मान्यता और रात में घंटियों की आवाज- ये सभी बातें इस स्थान को श्रद्धालुओं के बीच रहस्यमयी बनाती हैं. वैज्ञानिक दृष्टि से इन दावों की पुष्टि अलग विषय है, लेकिन आस्था के नजरिए से भूतेश्वरनाथ महादेव आज भी हजारों श्रद्धालुओं के लिए बेहद खास है. घने जंगल के बीच स्थित यह प्राकृतिक शिवलिंग छत्तीसगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है.

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