किस उंगली से भाई का तिलक करती हैं आप? सुमिताचार्य से जानें कौन-सी है शुभ, भाई दूज पर भूलकर भी न करें ये गलती
भाई दूज पर भाई को तिलक लगाने के लिए कौन-सी उंगली शुभ मानी जाती है? सुमिताचार्य ने तिलक लगाने का सही तरीका और अलग-अलग उंगलियों से तिलक करने की मान्यताएं बताई हैं. वहीं, कायस्थ समुदाय में इस दिन भगवान चित्रगुप्त की पूजा का विशेष महत्व है. जानिए पूजा सामग्री और पूरी विधि.
भाई दूज का त्योहार भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का प्रतीक है. इस साल ये त्योहार 11 नवंबर को मनाया जाएगा. इस दिन बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भाई को तिलक लगाते समय किस उंगली का इस्तेमाल करना चाहिए? सुमिताचार्य ने तिलक लगाने का सही तरीका बताते हुए उन गलतियों के बारे में भी बताया है, जिनसे बचना जरूरी है. इसके अलावा भाई दूज पर कायस्थ समुदाय में भगवान चित्रगुप्त की पूजा का विशेष महत्व होता है. जानिए तिलक लगाने का सही तरीका, चित्रगुप्त पूजा की सामग्री और पूजा करने की पूरी विधि.
भाई दूज पर भाई को तिलक लगाने के लिए किस उंगली का इस्तेमाल करना चाहिए, इस बारे में सुमिताचार्य ने खास जानकारी दी है. उनके अनुसार, भाई के माथे पर तिलक हमेशा छोटी यानी कनिष्ठा उंगली से लगाना चाहिए. मान्यता है कि अंगूठे और दूसरी उंगलियों से तिलक लगाने के अलग-अलग प्रभाव होते हैं. ऐसे में भाई की लंबी उम्र, यश और खुशहाली की कामना करने वाली बहनों को तिलक लगाते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए.
सुमिताचार्य के मुताबिक, भाई को अंगूठे से तिलक लगाने से उसके जीवन में यश कम होने लगता है. वहीं, पहली उंगली से तिलक लगाने पर रोग का भय रहता है. मध्यमा उंगली से तिलक लगाने को भाई की आयु के लिए अच्छा नहीं माना जाता. जबकि अनामिका उंगली से तिलक लगाने पर बहन के अपमान का फल मिलने की मान्यता है. इसलिए भाई दूज पर भाई को तिलक हमेशा कनिष्ठा यानी सबसे छोटी उंगली से लगाना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे भाई के यश, कांति और आयु में वृद्धि होती है.
भाई दूज पर होती है भगवान चित्रगुप्त की पूजा
भाई दूज के दिन कायस्थ समुदाय के कई घरों में भगवान चित्रगुप्त की पूजा भी की जाती है. इस दिन कलम और दवात की पूजा करने की परंपरा है. भगवान चित्रगुप्त को मनुष्यों के अच्छे-बुरे कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाला देवता माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे ब्रह्मा जी की काया से उत्पन्न हुए थे. इसी वजह से उन्हें कायस्थ भी कहा जाता है. वे यमराज के सहायक के रूप में मनुष्यों के पाप और पुण्य का हिसाब रखते हैं.
भगवान चित्रगुप्त को कायस्थ समाज का आराध्य देव और जनक माना जाता है. इसलिए इस समुदाय के लिए चित्रगुप्त पूजा का विशेष महत्व है. इस दिन घरों में कलम, दवात और बही-खातों की पूजा की जाती है. व्यापारी अपने नए बही-खाते शुरू करते हैं, जबकि विद्यार्थी अपनी कलम और पढ़ाई से जुड़ी चीजों की पूजा करते हैं. मान्यता है कि इससे ज्ञान, बुद्धि और अच्छे कर्म करने की प्रेरणा मिलती है.
चित्रगुप्त पूजा की सामग्री
चित्रगुप्त भगवान की पूजा के लिए कुछ खास चीजों की जरूरत होती है. इनमें भगवान चित्रगुप्त की तस्वीर या मूर्ति, कलम, दवात, नई पेन या पेंसिल, सफेद कागज, बही-खाते या डायरी शामिल हैं. इसके अलावा रोली, खील, बताशे, लाल फूल, फूलों की माला, धूप, अगरबत्ती, घी का दीपक, रुई की बाती, मिठाई, कलावा और चीनी के खिलौने भी पूजा में इस्तेमाल किए जाते हैं.
कैसे करें भगवान चित्रगुप्त की पूजा?
- सबसे पहले भगवान चित्रगुप्त की तस्वीर या मूर्ति को पूजा स्थल पर स्थापित करें.
- इसके बाद घी का दीपक जलाकर भगवान को रोली और खील से तिलक लगाएं.
- उन्हें लाल फूल और फूलों की माला अर्पित करें. इसके बाद धूप और अगरबत्ती दिखाएं.
- अब एक सफेद कागज पर अपनी पूरे साल की आय, खर्च और बचत का हिसाब लिखें.
- इसके साथ ही कागज पर 'श्री गणेशाय नमः' और 'श्री चित्रगुप्ताय नमः' लिखें.
- इसके बाद कलम और लिखे हुए कागज को कलावे से बांधकर भगवान चित्रगुप्त के सामने रख दें.
- अंत में मिठाई और बताशे का भोग लगाकर भगवान की आरती करें.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान चित्रगुप्त की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि, ज्ञान और मानसिक शांति आती है. साथ ही व्यक्ति को अपने कर्मों के प्रति सजग रहने और हमेशा अच्छे काम करने की प्रेरणा मिलती है.




