11 अक्टूबर से नवरात्रि, 20 को दशहरा, कब हैं दीवाली और छठ, जानें त्योहारों का पूरा कैलेंडर
त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है और इस बार अक्टूबर-नवंबर का महीना कई बड़े पर्वों से सजा रहेगा। 11 अक्तूबर से नवरात्रि शुरू होगी, 20 को दशहरा, 8 नवंबर को दिवाली और 13 से छठ पूजा की शुरुआत होगी.
सितंबर खत्म होते ही देशभर में त्योहारों की धूमधाम शुरू हो जाती है. इसके बाद नवरात्रि से लेकर दशहरा, करवाचौथ, धनतेरस, दिवाली और छठ पूजा तक लगातार कई बड़े पर्व आते हैं. ऐसे में अगर आप पहले से पूजा-पाठ और त्योहारों की तैयारी करना चाहते हैं तो इन सभी की तारीखें जानना जरूरी है.
इस साल 11 अक्तूबर से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होगी और 20 अक्तूबर को दशहरा मनाया जाएगा. इसके बाद 29 अक्टूबर को महिलाएं करवाचौथ का व्रत रखेंगी. चलिए ऐसे में जानते हैं धनतेरस, दिवाली और छठ कब है.
कब से है शारदीय नवरात्रि?
साल 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से होगी. इस दौरान नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. नवरात्रि के बाद 20 अक्टूबर, मंगलवार को विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा. धार्मिक मान्यता के अनुसार यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है.
कब है करवा चौथ?
दशहरे के बाद त्योहारों का सिलसिला जारी रहेगा. 25 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा मनाई जाएगी. इसके कुछ दिन बाद 29 अक्टूबर, गुरुवार को करवा चौथ का व्रत रखा जाएगा. इस दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए व्रत करती हैं. वहीं 31 अक्टूबर को महर्षि वाल्मीकि जयंती मनाई जाएगी. इस दिन महर्षि वाल्मीकि को श्रद्धापूर्वक याद किया जाता है.
नवंबर में दिवाली की धूम
नवंबर की शुरुआत होते ही रोशनी और खुशियों का त्योहार शुरू हो जाएगा. 6 नवंबर को धनतेरस मनाई जाएगी. इसके अगले दिन 7 नवंबर को छोटी दिवाली और फिर 8 नवंबर को दिवाली का पर्व होगा. दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा है. इसके बाद 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा और 11 नवंबर को भाई दूज मनाई जाएगी. भाई दूज भाई-बहन के रिश्ते को समर्पित त्योहार है.
कब से शुरू होगी छठ पूजा?
दिवाली के बाद बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश समेत कई इलाकों में छठ पूजा की तैयारियां तेज हो जाएंगी. 2026 में छठ महापर्व 13 नवंबर से शुरू होकर 16 नवंबर तक चलेगा. चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में सूर्य देव और छठी मैया की पूजा की जाती है. व्रती कठिन नियमों का पालन करते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं.




