11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत, हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा, जानें घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व इस बार 11 अक्टूबर से शुरू होगा. खास बात यह है कि तिथियों में वृद्धि के कारण नवरात्रि नौ नहीं, बल्कि 10 दिनों तक चलेगी. इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा और व्रत रखा जाएगा. अष्टमी-नवमी पर कन्या पूजन होगा, जबकि विजयदशमी के साथ पर्व का समापन होगा.
शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व इस वर्ष 11 अक्टूबर से शुरू होगा. नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से देवी की आराधना करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और जीवन की परेशानियां दूर होती हैं. इस बार तिथियों में वृद्धि के कारण नवरात्रि का पर्व 10 दिनों तक चलेगा. सप्तमी तिथि दो दिन होने की वजह से नवरात्रि की अवधि एक दिन बढ़ गई है. नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा कर व्रत रखते हैं. अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन का भी विशेष महत्व माना जाता है. विजयदशमी के साथ नवरात्रि पर्व का समापन होगा.
शारदीय नवरात्रि 2026 तिथि
पंचांग के अनुसार, आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9 बजकर 19 मिनट से शुरू होगी और 11 अक्टूबर की रात 9 बजकर 30 मिनट तक रहेगी. उदया तिथि के आधार पर 11 अक्टूबर से नवरात्रि का आरंभ माना जाएगा. इसी दिन मां शैलपुत्री की पूजा के साथ घटस्थापना की जाएगी.
घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है. 11 अक्टूबर को चित्रा नक्षत्र रात 10 बजकर 32 मिनट तक रहेगा, जबकि वैधृति योग रात 9 बजकर 5 मिनट तक रहेगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन योगों में घटस्थापना से बचना चाहिए. ऐसे में शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करना बेहतर माना जाता है.
घटस्थापना के शुभ मुहूर्त
-चौघड़िया मुहूर्त: सुबह 10:04 बजे से 11:55 बजे तक
-अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:32 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक
हाथी पर मां दुर्गा का आगमन
इस बार शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा का आगमन हाथी पर होगा. धार्मिक मान्यताओं में देवी का हाथी पर आगमन शुभ संकेत माना जाता है. हाथी को शक्ति, स्थिरता, धैर्य और समृद्धि का प्रतीक माना गया है. मान्यता है कि हाथी पर देवी का आगमन अच्छी वर्षा, कृषि में उन्नति और सुख-शांति का संकेत देता है.
नवरात्रि में किस दिन किस देवी की पूजा होगी?
-11 अक्टूबर: प्रतिपदा, मां शैलपुत्री की पूजा और घटस्थापना
-12 अक्टूबर: द्वितीया, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
-13 अक्टूबर: तृतीया, मां चंद्रघंटा की पूजा
-14 अक्टूबर: चतुर्थी, मां कूष्मांडा की पूजा
-15 अक्टूबर: पंचमी, मां स्कंदमाता की पूजा
-16 अक्टूबर: षष्ठी, मां कात्यायनी की पूजा
-17 अक्टूबर: सप्तमी, मां कालरात्रि की पूजा
-18 अक्टूबर: दुर्गा अष्टमी, मां महागौरी की पूजा
-19 अक्टूबर: अष्टमी-नवमी तिथि का संयोग और कन्या पूजन
-20 अक्टूबर: नवमी के बाद विजयदशमी और दशहरा




