प्रेग्नेंसी में नवरात्रि व्रत के दौरान न करें लापरवाही, क्या खाएं और किन बातों से बचें? 10 पॉइंट्स में समझें
नवरात्रि में कई महिलाएं मां दुर्गा की भक्ति के लिए व्रत रखती हैं, लेकिन गर्भावस्था के दौरान उपवास करते समय खास सावधानी बरतना जरूरी है. लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहने से डिहाइड्रेशन और कमजोरी का खतरा बढ़ सकता है. ऐसे में गर्भवती महिलाएं व्रत में क्या खाएं, कौन से पेय लें और किन बातों का ध्यान रखें, जानिए जरूरी टिप्स.
नवरात्रि में कई महिलाएं मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ व्रत रखती हैं. लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान उपवास करना सामान्य दिनों से अलग हो सकता है. इस समय मां और गर्भ में पल रहे बच्चे को पर्याप्त पोषण और तरल पदार्थों की जरूरत होती है. लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहना कमजोरी, सिरदर्द और डिहाइड्रेशन की वजह बन सकता है. इसलिए प्रेग्नेंसी में नवरात्रि का व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है. आइए जानते हैं कि गर्भवती महिलाएं व्रत के दौरान क्या खाएं और किन बातों का ध्यान रखें.
1. व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लें
गर्भावस्था में हर महिला की सेहत और पोषण की जरूरत अलग होती है. इसलिए व्रत रखने से पहले अपनी गायनेकोलॉजिस्ट से बात करें. अगर आपको डायबिटीज, एनीमिया, लो ब्लड प्रेशर या दूसरी कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो उपवास जोखिम बढ़ा सकता है. डॉक्टर की सलाह लें और फिर डिसाइड करें व्रत करना है या नहीं करना है.
2. शरीर में पानी की कमी न होने दें
इस दौरान शरीर को पर्याप्त तरल पदार्थों की जरूरत होती है. व्रत में पानी पीने की अनुमति हो, तो नियमित अंतराल पर पानी पीती रहें. नारियल पानी, दूध और बिना अतिरिक्त चीनी वाली लस्सी जैसे विकल्प भी लिए जा सकते हैं. तरल पदार्थों की मात्रा अपनी जरूरत और डॉक्टर की सलाह के अनुसार रखें.
3. फल और पौष्टिक आहार को बनाएं डाइट का हिस्सा
व्रत में सेब, केला, अनार, संतरा और मौसमी फल खाए जा सकते हैं. फल शरीर को विटामिन, खनिज और फाइबर देते हैं. हालांकि, सिर्फ फलों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी डाइट में प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन और दूसरे जरूरी पोषक तत्वों के स्रोत भी शामिल करें. फल अच्छी तरह धोकर खाएं और कटे हुए फलों को लंबे समय तक खुले में न रखें.
4. दूध, दही और छाछ से लें पोषण
गर्भावस्था में दूध, दही और छाछ जैसे विकल्प कैल्शियम और प्रोटीन की जरूरत पूरी करने में मदद कर सकते हैं. व्रत के दौरान आप दूध, दही, रायता या घर पर बना मिल्कशेक ले सकती हैं. दूध और अन्य डेयरी उत्पादों को सुरक्षित तरीके से रखें और पाश्चुरीकृत दूध का इस्तेमाल करें. मिल्कशेक बनाते समय चीनी की मात्रा कम रखें और उसे पौष्टिक बनाने के लिए जरूरत के अनुसार फल शामिल करें.
5. खीरा और शकरकंद खाएं
खीरे में पानी और कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं. इसे अच्छी तरह धोकर सलाद के रूप में खाया जा सकता है. वहीं, शकरकंद कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और बीटा-कैरोटीन का अच्छा स्रोत है. यह पेट भरा रखने में मदद कर सकता है. शकरकंद को उबालकर या अच्छी तरह पकाकर खाएं. ध्यान रखें कि केवल एक या दो खाद्य पदार्थों से गर्भावस्था की सभी पोषण संबंधी जरूरतें पूरी नहीं होतीं.
6. थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ खाते रहें
व्रत के दौरान लंबे समय तक खाली पेट रहने से कुछ महिलाओं को कमजोरी, एसिडिटी, चक्कर या सिरदर्द हो सकता है. इससे बचने के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार थोड़ी-थोड़ी देर में संतुलित भोजन या हल्का नाश्ता लें. फल, दूध, दही, मेवे और व्रत में खाए जाने वाले दूसरे पौष्टिक खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट में शामिल कर सकती हैं. भोजन की मात्रा ऐसी रखें कि शरीर को पर्याप्त ऊर्जा मिल सके.
7. साबूदाना और आलू के साथ भी रखें संतुलन
नवरात्रि में साबूदाना खिचड़ी, आलू, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बनी चीजें खूब खाई जाती हैं. ये ऊर्जा देने में मदद कर सकती हैं, लेकिन केवल कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थों पर निर्भर रहना सही नहीं है. इनके साथ दही, दूध, मेवे या अन्य उपयुक्त प्रोटीन स्रोत शामिल करें. तली हुई चीजों और बहुत ज्यादा घी-तेल वाले पकवानों की जगह हल्के और कम तेल में बने विकल्प चुनें.
8. नमक और मीठे का रखें ध्यान
व्रत में सेंधा नमक इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसे मनचाही मात्रा में खाया जाए. नमक का सेवन संतुलित रखें और डॉक्टर ने नमक कम करने की सलाह दी है, तो उसका पालन करें. इसी तरह मिठाइयों, मीठे मिल्कशेक और ज्यादा चीनी वाले पेय पदार्थों का सेवन सीमित रखें. सोडा और बहुत ज्यादा चीनी वाले फिजी ड्रिंक्स की जगह पानी या अन्य उपयुक्त पेय चुनें.
9. थकान को नजरअंदाज न करें और आराम करें
नवरात्रि में पूजा, गरबा और डांडिया के कारण व्यस्तता बढ़ सकती है. लेकिन गर्भावस्था में शरीर पर जरूरत से ज्यादा दबाव डालना ठीक नहीं है. पर्याप्त आराम करें और अपनी क्षमता के अनुसार ही शारीरिक गतिविधियां करें. अगर व्रत के दौरान चक्कर, बहुत ज्यादा कमजोरी, लगातार उल्टी, तेज सिरदर्द या पेशाब कम आने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें नजरअंदाज न करें.
10. मां और बच्चे की सेहत को दें प्राथमिकता
गर्भावस्था में व्रत रखने का फैसला अपनी सेहत को ध्यान में रखकर करें. अगर उपवास के कारण पर्याप्त भोजन या पानी नहीं ले पा रही हैं, तो व्रत जारी रखने के बजाय स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें. गर्भावस्था में निर्जलीकरण और पोषण की कमी मां के साथ-साथ बच्चे के लिए भी चिंता का विषय हो सकती है. धार्मिक आस्था के साथ अपनी सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है.
Disclaimer: ये सामान्य जानकारी पर आधारित आर्टिकल है. गर्भवती महिलाओं, बीमारों और अन्य शारीरिक समस्या वाले लोगों के लिए के लिए ये जरूरी है कि वह अपने डॉक्टर की सलाह के बाद ही व्रक रखें.




