फैशन या पावर! सिर की शान को बैक पर पहनना कितना सही? Isha Ambani के फैशन स्टेटमेंट पर उठे सवाल
Met Gala 2026 में ईशा अंबानी ने निजाम का ऐतिहासिक सरपेच अपने ब्लाउज पर पहनकर ग्लोबल मंच पर भारतीय विरासत को दिखाया. हालांकि, इस स्टाइल को लेकर सोशल मीडिया पर फैशन और परंपरा के बीच विवाद खड़ा हो गया.
मेट गाला 2026 की चमक-दमक भरी शाम में दुनिया भर के सितारे अपनी क्रिएटिविटी और स्टाइल के साथ नजर आए. काइली जेनर, किम कार्दशियन जैसी ग्लोबल सेलिब्रिटीज के बीच भारतीय रेप्रेजेंटिंग को मजबूती से रखते हुए मुकेश अंबानी की बेटी ईशा अंबानी ने इस बार न सिर्फ फैशन, बल्कि इतिहास और विरासत का अनोखा संगम पेश किया. गौरव गुप्ता की डिजाइन की गई शानदार गोल्डन टिश्यू सिल्क साड़ी में ईशा बेहद खूबसूरत लग रही थीं, लेकिन इस बार सबसे ज्यादा ध्यान उनकी ब्लाउज ने खींचा. ब्लाउज पूरी तरह से भारी जड़ाऊ गहनों से सजा हुआ था, जिसका सबसे खास हिस्सा था निजाम ऑफ हैदराबाद का मूल सरपेच (पगड़ी ब्रोच).
यह रेयर और ऐतिहासिक ज्वेलरी, जो कभी हैदराबाद के निजामों की पगड़ी को सुशोभित करता था, अब ईशा ने इसे ब्लाउज की बैक पर ब्रोच की तरह लगाकर एकदम नया और बोल्ड स्टेटमेंट दिया. नीता अंबानी के पर्सनल कलेक्शन से लिया गया यह सरपेच एमरल्ड, डायमंड और कुंदन वर्क का शानदार नमूना रहा. जब ग्लोबल फैशन की सबसे बड़ी शाम में कोई भारतीय साड़ी और निजामी विरासत के साथ चल रहा हो, तो वह सिर्फ चमक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक गर्व का प्रदर्शन भी होता है. ईशा अंबानी ने इस बार मेट गाला को अपनी विरासत का मंच बनाने में कामयाब रही.
फैशन या पावर
कई बार देखा गया है नीता अंबानी अपने बड़े इवेंट्स में हैरिटेज ज्वेलरी पहना पसंद करती है. मिस वर्ल्ड 2024 के दौरान, उन्होंने एक बेहद खास बाजूबंद पहना था जो कभी मुगल बादशाह शाहजहां का था. यह 17वीं सदी का है, जिसमें हीरे, माणिक और स्पिनेल जड़े थे. इसकी कीमत ₹200 करोड़ से अधिक बताई जाती है. यह करीब 400 साल पुराना है. वहीं ईशा अंबानी के लुक को तैयार करने में 50 कारीगर लगे और 1200 घंटे. लेकिन सवाल उठता है कि ईशा अंबानी का अपनी बैक पर हैदराबादी निजाम का ब्रोच पहनना कितना सही है. जो निजामों के सिर की शान हुआ करता था उसे फैशन के नाम पर अपनी बैक पर सजाना किस हद तक सही है. कई लोग इसे पावर का खेल कह सकते है क्योंकि दुनिया की ऐसी कोई भी चीज नहीं जिसे अंबानी ऑफोर्ड न करें. लेकिन पावर और पैसे से हासिल की गई चीजों का सही इस्तेमाल भी पता होना जरुरी है. जिसमें ईशा अंबानी इस बार चूक गई.
Instagram: anaitashroffadajania
सिर की शान को बैक पर पहनना कितना सही?
कुछ नेटिजन्स ने इसे अपमान बताया है. एक यूजर का कहना है, 'एक अजीब बात है!! ब्लाउज में ऐसी हैरिटेज चीज़ का इस्तेमाल किया गया है... घटिया. ' एक यूजर ने सवाल उठाते हुए कहा, 'मुझे हैरानी है कि मिसेज अंबानी को यह ब्रोच कैसे मिला, क्योंकि ये गहने भारत सरकार ने निज़ाम परिवार से लिए गए थे और समय-समय पर अलग-अलग म्यूजियम में प्रदर्शित किए जाते हैं, तो सवाल यह है कि अगर यह असली है तो यह उनके पास कैसे हो सकता है?.' यह बेहद अपमानजनक है कि उसने इसे ब्रा टॉप की तरह अपनी बैक पर पहना हुआ है... पैसा क्लास नहीं खरीद सकता.' एक ने कहा, 'राजपरिवार के क्राउन से लेकर अरबपति के ब्लाउज तक.' वहीं कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि जब 2025 मेट गाला के लिए दिलजीत दोसांझ ने पटियाला के महाराजा भूपिंदर सिंह का 'कार्टियर पटियाला नेकलेस' रेंट पर लेना चाहा तो कार्टियर ने इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया क्योंकि वह हार अब एक म्यूजियम में सुरक्षित है और उसे पहनने के लिए बाहर नहीं दिया जा सकता. यह हार 1928 में पटियाला के महाराजा भूपिंदर सिंह के लिए बनाया गया था, जिसमें 2,930 हीरे जड़े थे. जिसके बाद दिलजीत दोसांझ ने ठीक उसी तरह का हार डिजाइन करवाया था.
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इस महारानी से सिखाया सबक
वहीं ग्लोबल मंच पर अगर पावर के सही मायने को समझाना हो तो महारानी सीता देवी का यह किस्सा एकदम परफेक्ट है. बड़ौदा की महारानी सीता देवी ने 1953 में अपने बेहद कीमती पन्ना और हीरे को अमेरिका के फेमस जौहरी हैरी विंस्टन को बेच दिया था. यह बेशकीमती हीरे रानी के हार में नहीं बल्कि उनकी पैरों के पायल की शान थे. हैरी विंस्टन ने उन पायलों को तोड़कर और फिर से डिज़ाइन करके एक शानदार हार बना दिया. 1957 में न्यूयॉर्क में एक पार्टी के दौरान, वॉलिस सिम्पसन ने वह हार पहना था. जब महारानी सीता देवी ने उस हार को देखा, तो उन्होंने जोर से कहा, 'ये गहने मेरे पैरों पर भी उतने ही अच्छे लगते थे.' बता दें कि वॉलिस सिम्पसन वहीं थी जिनके लिए किंग एडवर्ड VIII ने ब्रिटिश सिंहासन छोड़ दिया था.
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निजाम में ब्रोच के क्या है मायने
सरपेच राजा, नवाब या बड़े शासक की पहचान था. यह पहनने वाला व्यक्ति अपनी हैसियत, दौलत और शक्ति दुनिया को दिखाता था. निजाम जैसे अमीर शासक के लिए यह सिर्फ गहना नहीं, बल्कि राजत्व का प्रतीक था. मुगल काल और बाद में राजाओं द्वारा वफादार सेनापतियों, दीवानों या बहादुर योद्धाओं को सरपेच भेंट करना बहुत बड़ी इज्जत मानी जाती थी. इसे सिर की पगड़ी पर लगना बहादुरी, जीत या अच्छे काम के लिए मिला बड़ा सम्मान समझा जाता था. निजाम हैदराबाद के पास दुनिया के सबसे कीमती हीरे (गोलकुंडा हीरे), पन्ने, मोती और माणिक थे. उनके सरपेच इन रत्नों से सजे होते थे. पगड़ी पर लगे इस ब्रोच को देखकर कोई भी समझ जाता था कि यह व्यक्ति कितना शक्तिशाली और अमीर है. हालांकि हैदराबाद के 7वें निजाम मीर उस्मान के पास दुनिया का सबसे महंगा हीरा था 184 कैरेट का. लेकिन वह उसे एक पेपरवेट के तौर पर इस्तेमाल करते थे.




