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Pregnant महिलाओं के लिए जरूरी हैं ये 5 न्यूट्रिएंट्स, नहीं लिए तो पड़ सकते हैं लेने के देने

गर्भवती महिलाओं को कुछ चीजों का खास ख्याल रखना होता है. इनमें से डाइट और न्यूट्रीशन सबसे अहम है. आज हम आपको इन पांच न्यूट्रिएंट्स के बारे में बताने वाले हैं, जिन्हें न लेने से जच्चा और बच्चा दोनों को समस्या हो सकती है.

Pregnant महिलाओं के लिए जरूरी हैं ये 5 न्यूट्रिएंट्स, नहीं लिए तो पड़ सकते हैं लेने के देने
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समी सिद्दीकी
By: समी सिद्दीकी8 Mins Read

Published on: 5 April 2026 1:31 PM

Pregnancy Tips: महिलाओं में प्रेग्नेंसी केवल बच्चे को जन्म देने तक की सीमित नहीं है, बल्कि ये एक भावना, ममता और वह एहसास भी है जो कभी लफ्जों में बयान नहीं हो सकता है. इस फेज के दौरान महिलाएं अलग-अलग शारीरिक और मांसिक बदलाव महसूस करती हैं. हार्मोन्स के ऊपर नीचे होने के साथ-साथ वजन के बढ़ने और डिलीवरी के बाद एकदम कम होने से इमोशनली काफी प्रभाव पड़ता है.

प्रेग्नेंसी के दौरान कई तरह की एहतियात बरतने की सलाह दी जाती है और कहा जाता है कि खाने पाने का खास ख्याल रखें और चलने, फिरने, उठने और बैठने में खास ध्यान दें. लेकिन इस सब एहतियात के बावजूद कई महिलाओं में प्रेग्नेंसी से जुड़े खतरें पैदा हो जाते हैं. इसका कारण सही न्यूट्रिएंट्स शरीर में न जाना वजह भी माना जाता है. आज हम इसी बारे में विस्तार से बात करने वाले हैं कि आखिर वह ऐसे 5 कौनसे न्यूट्रिएंट्स हैं जो हर गर्भवति महिला को अपनी डाइट में रखने चाहिए.

गर्भवति महिलाओं के लिए कौनसे न्यूट्रिएंट्स जरूरी हैं?

इस मामले को लेकर हमने Dr Shweta Mendiratta (Gynecology-Yatharth Hospitals,Faridabad) से बात की उन्होंने बताया कि प्रेग्नेंसी के दौरान महिलओं को आयरन, फोलिक एसिड, कैल्शियम, विटामिन डी और विटामिन बी12. ये सभी न्यूट्रिएंट्स मां और बच्चे के लिए बेहद जरूरी होते हैं. इनकी कमी से बच्चे का विकास रुकने की संभावना होती है और साथ ही मां में हार्मोनल इंबेलेंस का खतरा बढ़ जाता है, जिससे गर्भपात और दूसरी समस्या पैदा हो सकती हैं.

मां और बच्चे के लिए क्यों जरूरी हैं ये न्यूट्रिएंट्स?

  • आयरन

आयरन की जरूरत इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि गर्भावस्था में शरीर में खून की मात्रा लगभग 40–50 प्रतिशत तक बढ़ जाती है. आयरन ही हीमोग्लोबिन बनाने में मदद करता है, जो ऑक्सीजन को पूरे शरीर और बच्चे तक पहुंचाता है. अगर आयरन की कमी हो जाए तो एनीमिया हो सकता है, जिससे थकान, कमजोरी और चक्कर आते हैं. गंभीर मामलों में समय से पहले डिलीवरी, बच्चे का कम वजन और प्रसव के दौरान जटिलताएं भी हो सकती हैं.

  • फोलिक एसिड

फोलिक एसिड गर्भावस्था के शुरुआती हफ्तों में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह बच्चे के मस्तिष्क और स्पाइनल कॉर्ड के विकास में मदद करता है. इसकी पर्याप्त मात्रा से न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट्स जैसे स्पाइना बिफिडा का खतरा काफी कम हो जाता है. यदि फोलिक एसिड की कमी हो जाए तो बच्चे में जन्मजात विकारों का जोखिम बढ़ जाता है, खासकर दिमाग और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याएं.

  • कैल्शियम

कैल्शियम मां और बच्चे दोनों की हड्डियों और दांतों के निर्माण के लिए जरूरी होता है. अगर शरीर में कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा नहीं होगी तो बच्चा मां की हड्डियों से कैल्शियम लेना शुरू कर देता है, जिससे माँ की हड्डियां कमजोर हो सकती हैं. इससे आगे चलकर ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ सकता है और गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं भी जुड़ सकती हैं.

  • विटामिन डी

विटामिन डी कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है, यानी अगर विटामिन डी सही मात्रा में नहीं है तो कैल्शियम भी ठीक से काम नहीं कर पाएगा. यह बच्चे की हड्डियों के विकास और इम्यून सिस्टम के लिए भी जरूरी है. इसकी कमी से बच्चे में हड्डियों की कमजोरी, रिकेट्स जैसी स्थिति और माँ में मांसपेशियों में दर्द या कमजोरी देखी जा सकती है.

  • विटामिन बी12

विटामिन बी12 इम्यून सिस्टम और रेड ब्लड सेल्स के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है. यह फोलिक एसिड के साथ मिलकर काम करता है. इसकी कमी से एनीमिया, कमजोरी, और बच्चे में न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हो सकती हैं. खासकर शाकाहारी महिलाओं में इसकी कमी का खतरा ज्यादा होता है, क्योंकि बी12 मुख्य रूप से पशु-आधारित खाद्य पदार्थों में पाया जाता है.

Pregnancy Nutrition Infographic

गर्भावस्था में जरूरी पोषक तत्व

आयरन

खून की मात्रा बढ़ाने और ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए जरूरी। कमी से एनीमिया, कमजोरी और प्रीमैच्योर डिलीवरी का खतरा।

फोलिक एसिड

बच्चे के मस्तिष्क और स्पाइनल कॉर्ड के विकास के लिए महत्वपूर्ण। कमी से जन्मजात दोषों का खतरा।

कैल्शियम

हड्डियों और दांतों के लिए जरूरी। कमी होने पर माँ की हड्डियां कमजोर हो सकती हैं।

विटामिन D

कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है। हड्डियों और इम्यून सिस्टम के लिए जरूरी।

विटामिन B12

रेड ब्लड सेल्स और नर्वस सिस्टम के लिए जरूरी। कमी से एनीमिया और न्यूरोलॉजिकल समस्याएं।

इन पोषक तत्वों की कमी बच्चे के विकास पर असर डाल सकती है। संतुलित आहार और डॉक्टर की सलाह जरूरी है।

अगर इन पोषक तत्वों की कमी लंबे समय तक बनी रहे तो इसका असर केवल गर्भावस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास पर भी पड़ सकता है. इसलिए डॉक्टर आमतौर पर इन सभी की सप्लीमेंट्स लेने की सलाह देते हैं, साथ ही संतुलित आहार भी जरूरी होता है.

कौनसा न्यूट्रिएंट्स किस फूड में मिलता है?

आयरन के स्रोत

- हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी

- दालें और बीन्स (राजमा, लोबिया)

- अनार, खजूर, किशमिश

- नॉन-वेज में लीवर, रेड मीट, अंडा

फोलिक एसिड के स्रोत

-पालक, ब्रोकली, सरसों का साग

- संतरा, मौसंबी, नींबू जैसे सिट्रस फल

- दालें, चना, मटर

- मूंगफली और बीज (सीड्स)

- साबुत अनाज

कैल्शियम के स्रोत

- दूध, दही, पनीरस , अंडा

- तिल (सेसमे सीड्स)

- सोया प्रोडक्ट्स (टोफू)

- बादाम

- हरी सब्जियां जैसे बथुआ, पालक

विटामिन डी के स्रोत

- सुबह की धूप (सबसे अच्छा स्रोत)

- फोर्टिफाइड दूध और अनाज

- अंडे की जर्दी

- फैटी फिश (सैल्मन, टूना)

सप्लीमेंट्स

विटामिन बी12 के स्रोत

- दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स

- अंडा

- मांस और मछली

- फोर्टिफाइड सीरियल्स (खासकर शाकाहारियों के लिए)

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