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महिला आरक्षण पर सरकार का '50+33' फॉर्मूला, कितनी बदल जाएंगे चुनाव और संसद? सियासत में भूचाल तय

सरकार के कथित '50+33' महिला आरक्षण फॉर्मूले ने सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी है. अगर यह लागू होता है, तो संसद और विधानसभा की करीब एक-तिहाई सीटों पर महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित हो सकती है. इससे चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं.

महिला आरक्षण पर सरकार का 50+33 फॉर्मूला, कितनी बदल जाएंगे चुनाव और संसद? सियासत में भूचाल तय
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( Image Source:  ANI )

भारतीय राजनीति अब एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां से सत्ता का पूरा समीकरण बदलने वाला है. केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण को लेकर जो '50+33' का मास्टर प्लान तैयार किया है. वह सिर्फ एक कानून नहीं बल्कि लोकतंत्र की पूरी तस्वीर को री-डिजाइन करने वाला कदम माना जा रहा है. अगर यह फॉर्मूला लागू हुआ, तो संसद का चेहरा ही बदल जाएगा. सीटें बढ़ेंगी, समीकरण बदलेंगे और राजनीतिक दलों की रणनीति पूरी तरह रीसेट हो जाएगी.

सबसे बड़ी बात ये है कि इस बार सरकार इंतजार के मूड में नहीं है. 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले ही इस योजना को जमीन पर उतारने की तैयारी तेज कर दी गई है. सूत्रों के मुताबिक, इसी संसद सत्र में संशोधन बिल लाने की पूरी तैयारी है. यानी आने वाले सालों में भारतीय राजनीति में महिलाओं की एंट्री सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि निर्णायक होने जा रही है.

क्या है '50+33' का नया फॉर्मूला?

सरकार का प्लान साफ है. पहले लोकसभा सीटों में 50% की बढ़ोतरी, फिर कुल सीटों में से 33% महिलाओं के लिए आरक्षित. यानी यह डबल स्ट्राइक है. पहले संख्या बढ़ेगी, फिर उसमें महिलाओं की हिस्सेदारी तय होगी.

लोकसभा में कितनी बढ़ेंगी सीटें?

अभी लोकसभा में 543 सीटें हैं. प्रस्ताव के बाद यह संख्या बढ़कर लगभग 816 हो जाएगी. इसका मतलब कि सियासत का मैदान बड़ा और मुकाबला और भी तगड़ा होने वाला है. 816 सीटों में से करीब 273 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व होंगी, यानी पहली बार संसद में महिलाओं की इतनी बड़ी हिस्सेदारी देखने को मिल सकती है. क्या जनगणना का इंतजार किया जाएगा? सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर ही परिसीमन करने जा रही है यानी प्रक्रिया को तेज करने के लिए पुराना डेटा ही गेम चेंजर बनेगा.

सीटें कैसे तय होंगी?

‘ड्रॉ ऑफ लॉट्स’ यानी लॉटरी सिस्टम लागू होगा. इससे तय होगा कि कौन सी सीट महिला आरक्षित होगी. इससे पारदर्शिता और रोटेशन दोनों बनाए रखने की कोशिश होगी. सरकार का टारगेट साफ है कि 2029 लोकसभा चुनाव पूरी तरह इसी नए सिस्टम पर कराया जाए यानी अगला आम चुनाव पूरी तरह बदले हुए नक्शे पर लड़ा जाएगा.

विपक्ष का क्या स्टैंड है?

विपक्ष सिद्धांत रूप से महिला आरक्षण के साथ है लेकिन सीट बंटवारे और परिसीमन पर सहमति बनाना अभी चुनौती. Amit Shah खुद इस मुद्दे पर विपक्ष से बातचीत कर रहे हैं.

2029 में सियासत का नया युग

पहली बार संसद में इतनी बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंचेंगी. यह सिर्फ महिला आरक्षण नहीं, बल्कि राजनीति का “रीसेट बटन” है. सीटों की संख्या, चुनावी रणनीति, नेताओं का भविष्य. सब कुछ बदलने वाला है. अगर ‘50+33’ फॉर्मूला लागू हुआ, तो 2029 का चुनाव अब तक का सबसे अलग और ऐतिहासिक चुनाव होगा, जहां सत्ता की तस्वीर में आधी आबादी की असली हिस्सेदारी दिखेगी.

नरेंद्र मोदी
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