Gleeden एक्सट्रा मैरिटल डेटिंग ऐप पर किस टाइम ज्यादा एक्टिव रहते है शादीशुदा लोग और क्यों?
Gleeden एक्सट्रा मैरिटल डेटिंग ऐप पर 40 लाख भारतीय शादीशुदा लोग हैं, जिसमें महिलाओं की संख्या 35% है. इस ऐप पर दिन और रात के 10 बजे के बाद ज्यादा एक्टिव रहते हैं.
Gleeden ऐप पर कब एक्टिव रहते हैं लोग
भारत में शादीशुदा जिंदगी के बीच एक्स्ट्रा मैरिटल डेटिंग ऐप Gleeden ने 40 लाख से ज्यादा यूजर्स का आंकड़ा पार कर लिया है. यह आंकड़ा समाज में बदलते रिश्तों की कहानी बयां करता है. ऐप के ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि ज्यादातर यूजर्स शादीशुदा हैं या लॉन्ग-टर्म रिलेशनशिप में हैं.
इस प्लेटफॉर्म पर शादीशुदा यूज़र्स अक्सर शाम के बाद और देर रात को सबसे ज़्यादा एक्टिव रहते हैं, क्योंकि इस समय उन्हें अपने रूटीन, काम और पारिवारिक जिम्मेदारियों से कुछ समय की दूरी मिल जाती है. इन घंटों में वे बिना जल्दबाज़ी या डिस्ट्रैक्शन के प्रोफाइल ब्राउज़ कर सकते हैं, चैट कर सकते हैं और संभावित मैचों से बातचीत शुरू कर सकते हैं.
यूजर्स कितना समय बिताते हैं?
Gleeden पर भारतीय यूजर्स औसतन 1 से 1.5 घंटे रोज चैटिंग में बिताते हैं. ये समय उनके बिजी रूटीन से जुड़ा है. सबसे ज्यादा एक्टिविटी दो समय स्लॉट्स में होती है - दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक और रात 10 बजे से मिडनाइट तक.
क्यों इस समय रहते हैं ज्यादा एक्टिव?
दोपहर का पीक टाइम लंच ब्रेक या ऑफिस के छोटे-मोटे ब्रेक से मेल खाता है, जब लोग अकेले में फोन चेक करते हैं. वहीं रात का समय सोने से पहले का वो पल होता है, जब पार्टनर सो चुका हो या घर में सन्नाटा छा जाए. ये घंटे उन लोगों के लिए हैं, जो दिनभर की जिम्मेदारियों से थोड़ा ब्रेक लेना चाहते हैं.
शहरों के हिसाब से यूजर बेस
इस ऐप पर मेट्रो शहरों का दबदबा बरकरार है, लेकिन छोटे शहरों में भी तेजी से ग्रोथ हो रही है. 18% यूजर्स के साथ बेंगलुरु सबसे आगे है. उसके बाद हैदराबाद (17%), दिल्ली (11%), मुंबई (9%) और पुणे (7%). दिलचस्प बात ये है कि लखनऊ, चंडीगढ़, सूरत, कोयंबटूर, पटना और गुवाहाटी जैसे Tier-2 शहरों से भी यूजर्स की संख्या बढ़ रही है. इसका मतलब साफ है - इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच गांवों-शहरों तक फैलने से ऐसी ऐप्स अब हर कोने में पॉपुलर हो रही हैं.
ये ट्रेंड क्या कहता है?
Gleeden के ये आंकड़े मॉर्डन भारत की बिजी लाइफस्टाइल को दिखाते हैं. लोग दिन के उन छोटे ब्रेक्स में कनेक्शन तलाशते हैं, चाहे वो दोपहर का छोटा सा समय हो या रात का अकेलापन. महिलाओं की बढ़ती दिलचस्पी से साफ है कि रिश्तों में नई खोज अब जेंडर की सीमा पार कर रही है. लेकिन ये बदलाव समाज पर कई सवाल भी खड़े करते हैं.




