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20 जुलाई जैसा माहौल फिर बना तो क्या करेगी दिल्ली पुलिस? धारा 163 से बैरिकेडिंग तक, जानिए पुलिस के पास कितने विकल्प

20 जुलाई जैसे हालात दोबारा बनने की आशंका के बीच दिल्ली पुलिस के सामने भीड़ नियंत्रण और संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा बड़ी चुनौती है. जानिए धारा 163, बैरिकेडिंग, रूट डायवर्जन, अतिरिक्त फोर्स और फेस रिकॉग्निशन से जुड़े विकल्प.

20 जुलाई जैसा माहौल फिर बना तो क्या करेगी दिल्ली पुलिस? धारा 163 से बैरिकेडिंग तक, जानिए पुलिस के पास कितने विकल्प
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दिल्ली में कांग्रेस के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन का प्रदर्शन लगातार जारी है. अब 10 अक्टूबर को CJP-AAP की ओर से प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर पुलिस की धड़कनें पहले से ज्यादा बढ़ गई हैं. ऐसा इसलिए कि जो माहौल है उसमें पुलिस के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की मुश्किल भरा साबित हो सकता है. वजह है 20 जुलाई का वह दिन, जब प्रदर्शन के दौरान भीड़ के बढ़ने और अलग-अलग रास्तों पर फैलने से पुलिस के सामने कानून-व्यवस्था संभालने की चुनौती खड़ी हो गई थी. अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कितने लोग सड़कों पर उतरेंगे, बल्कि यह है कि अगर हालात पहले की तरह फिर बेकाबू होने लगे तो दिल्ली पुलिस क्या करेगी?

अगर 20 जुलाई जैसी स्थिति दोबारा बनती है तो संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा, भीड़ की आवाजाही और ट्रैफिक मैनेजमेंट पर खास फोकस रहेगा. रिटायर्ड डीजीपी एस.एम. माथुर के मुताबिक, पुलिस को हालात बिगड़ने का इंतजार करने के बजाय पहले से तैयारी करनी चाहिए.

क्या प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही उठाए जा सकते हैं सख्त कदम?

रिटायर्ड डीजीपी एस.एम. माथुर का कहना है कि मौजूदा माहौल को देखते हुए पुलिस पहले से भीड़ को संवेदनशील इलाकों में पहुंचने से रोकने की रणनीति बनाए. जंतर मंतर, संसद मार्ग, संसद परिसर, चुनाव आयोग मुख्यालय और अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों के आसपास सुरक्षा घेरा मजबूत किया जा सकता है. जानें इसके अलावा, उन्होंने और क्या कहा?

क्या धारा 163 से भीड़ जुटने पर रोक लगेगी?

क्या धारा 163 के जरिए भीड़ को पहले ही रोका जाएगा, संवेदनशील इलाकों में बैरिकेडिंग होगी या फिर अतिरिक्त पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स मैदान में उतारी जाएगी? जरूरत पड़ने पर डिजिटल निगरानी और फेस रिकॉग्निशन तकनीक भी इस्तेमाल की जा सकती है.

नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 के तहत पांच या उससे अधिक लोगों के जमावड़े, जुलूस और प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है. पुलिस और प्रशासन इस प्रावधान के जरिए संवेदनशील इलाकों में भीड़ की आवाजाही नियंत्रित कर सकते हैं.

संवेदनशील इलाकों की कैसे होगी घेराबंदी?

जंतर मंतर, संसद भवन, रायसीना हिल्स, मंडी हाउस, कनॉट प्लेस, कर्तव्य पथ, चुनाव आयोग मुख्यालय, अशोक रोड जंतर मंतर चौराहा व दूसरे महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग बढ़ाई जा सकती है. जरूरत पड़ने पर रूट डायवर्जन और प्रवेश प्रतिबंध भी लागू किए जा सकते हैं. इसका मकसद भीड़ को संवेदनशील स्थानों तक पहुंचने से रोकना होगा.

क्या पहले बातचीत से संभालेगी पुलिस?

पुलिस प्रदर्शन के आयोजकों और नेतृत्व कर रहे लोगों से बातचीत कर निर्धारित नियमों का पालन करने की अपील कर सकती है. कोशिश होगी कि भीड़ प्रतिबंधित क्षेत्र की तरफ न बढ़े और स्थिति बिना बल प्रयोग के नियंत्रित हो जाए.

पानी की बौछार से लेकर आंसू गैस तक, क्या हो सकता है अगला कदम?

स्थिति बिगड़ने पर पुलिस के पास भीड़ को पीछे हटाने के लिए वाटर कैनन और आंसू गैस जैसे उपाय हो सकते हैं. लाठीचार्ज जैसे कदम भी परिस्थितियों और लागू नियमों के तहत ही लिए जा सकते हैं. पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर अलग कानूनी और न्यायिक सीमाएं लागू होती हैं.

हालात बिगड़े तो क्या होगा?

अगर भीड़ आदेशों का उल्लंघन करते हुए आगे बढ़ती है तो पुलिस परिस्थितियों के मुताबिक वाटर कैनन और आंसू गैस जैसे भीड़ नियंत्रण उपायों का इस्तेमाल कर सकती है. बल प्रयोग हमेशा लागू कानून और दिशानिर्देशों के तहत किया जाना होता है और पुलिस को वही करने चाहिए.

क्या अतिरिक्त पुलिस और पैरामिलिट्री तैनात होगी?

बड़े प्रदर्शन की आशंका में दिल्ली पुलिस अतिरिक्त जवानों के साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की मदद ले सकती है. ज्यादा संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती का मकसद संवेदनशील इलाकों को सुरक्षित रखना और भीड़ को अलग-अलग दिशाओं में फैलने से रोकना होगा.

अगर बैरिकेड टूटे तो क्या कार्रवाई होगी?

प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने, बैरिकेड तोड़ने या पुलिसकर्मियों के साथ हिंसा की स्थिति में पुलिस रोकने और हिरासत में लेने की कार्रवाई कर सकती है. हिंसा, तोड़फोड़ या सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचने पर FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सकती है.

क्या फिर फेस रिकॉग्निशन सिस्टम का इस्तेमाल होगा?

जुलाई के CJP प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने AI आधारित लाइव फेस रिकॉग्निशन सिस्टम का इस्तेमाल किया था. इसका इस्तेमाल अपराधियों की पहचान के लिए करना है. यानी आगामी प्रदर्शन में भी CCTV, मोबाइल वीडियो और अन्य डिजिटल फुटेज के साथ फेस रिकॉग्निशन तकनीक का इस्तेमाल जांच में किया जा सकता है. सिर्फ फेस रिकॉग्निशन के संभावित मिलान को अंतिम सबूत मानना अलग बात है. किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई से पहले पुलिस को पहचान की पुष्टि और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों की जांच करनी होगी. वीडियो फुटेज, पुलिस रिकॉर्ड और मौके से मिले दूसरे सबूत इसमें अहम हो सकते हैं.

20 जुलाई के बाद पुलिस की सबसे बड़ी चिंता क्या?

पुलिस की चिंता केवल भीड़ की संख्या नहीं, बल्कि उसके फैलाव को लेकर भी है. अगर प्रदर्शनकारी अलग-अलग रास्तों से संवेदनशील इलाकों की ओर बढ़ते हैं तो संसद की सुरक्षा के साथ ट्रैफिक और आम लोगों की आवाजाही संभालना भी चुनौती बन जाता है. इसलिए इस बार शुरुआती स्तर पर ही भीड़ की गतिविधियों को नियंत्रित करना पुलिस की प्राथमिकता हो सकती है.

क्या पुलिस की रणनीति का फोकस 'स्थिति बिगड़ने से पहले नियंत्रण' पर होगा?

एस.एम. माथुर के मुताबिक, पुलिस की कोशिश ऐसी स्थिति पैदा नहीं होने देने की होनी चाहिए जिसमें बाद में जरूरत से ज्यादा सख्त भीड़ नियंत्रण करना पड़े. इसके लिए पहले से सुरक्षा योजना, संवेदनशील इलाकों की घेराबंदी, अतिरिक्त बल, ट्रैफिक डायवर्जन और डिजिटल साक्ष्यों की निगरानी जैसे उपाय अहम हो सकते हैं.

पुलिसकर्मियों पर हमले को लेकर DCP सृष्टि पांडे ने क्या कहा?

DCP सृष्टि पांडे ने प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ कथित बदसलूकी और हमले पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि कानूनी ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई या उन्हें चोट पहुंचाने की कोशिश समाज के लिए अच्छा संदेश नहीं है. उन्होंने लोगों से गैरकानूनी गतिविधियों से दूर रहने और उनके कानूनी परिणामों पर विचार करने की अपील की.

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