10 करोड़ का जुर्माना, 10 साल की जेल... NEET विवाद के बाद सरकार का एक्शन! 8 पॉइंट्स में जानें नए कानून में क्या-क्या?
पेपर लीक को रोकने के लिए मोदी कैबिनेट में कई अहम फैसलों पर मुहर लग सकती है. दोषियों पर जुर्माना बढ़ाने से लेकर सजा में इजाफा देखने को मिल सकता है. कानून अब पहले से कई ज्यादा सख्त देखने को मिलने वाले हैं.
paper leak law
नीट पेपर लीक विवाद के बीच केंद्र सरकार कानूनों को और ज्यादा सख्त बनाने की तैयारी कर रही है. रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार ऐसे नए कानूनी प्रावधान लाने पर विचार कर रही है, जिनका उद्देश्य पेपर लीक नेटवर्क पर कार्रवाई करना और मामलों का तुरंत निपटारा सुनिश्चित करना है.
प्रस्तावित बदलावों के तहत जांच और मुकदमे के लिए 3 महीने के अंदर फैसला, 10 साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने जैसी कठोर सजा जैसे प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं. यदि इन प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है, तो परीक्षाओं में धोखाधड़ी के मामलों से निपटने का कानूनी ढांचा पहले की तुलना में और अधिक सशक्त हो जाएगा.
8 पॉइंट्स में जानें क्या होंगे बदलाव?
1. सूत्रों के अनुसार, सबसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों में से एक पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच और सुनवाई के लिए अनिवार्य तीन महीने की समयसीमा तय करना है. प्रस्ताव है कि जांच एजेंसियां निर्धारित अवधि में जांच पूरी करें और अदालतें भी तय समय के भीतर फैसला सुनाएं, ताकि सालों तक चलने वाली कानूनी प्रक्रिया पर रोक लगाई जा सके.
2. सरकार ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों को समर्थन देने पर भी विचार कर रही है. इन अदालतों का उद्देश्य पेपर लीक और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी से जुड़े मामलों का तेजी से निपटारा करना होगा, जिससे छात्रों को समय पर न्याय मिल सके.
3. सूत्रों के अनुसार, संगठित पेपर लीक रैकेट चलाने वालों के खिलाफ सजा को और प्रभावी बनाने की तैयारी है. प्रस्तावित प्रावधानों में दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की जेल का प्रावधान बनाए रखने या उसे सख्ती से लागू करने की दिशा में कदम शामिल हैं, ताकि ऐसे अपराधों पर कड़ा संदेश दिया जा सके.
4. सरकार कथित तौर पर आर्थिक दंड को भी अधिक कठोर बनाने पर विचार कर रही है. सूत्रों के मुताबिक, संगठित परीक्षा धोखाधड़ी और पेपर लीक नेटवर्क में शामिल लोगों पर 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, ताकि ऐसे गिरोहों की आर्थिक कमर तोड़ी जा सके.
5. इन प्रस्तावों को ऐसे समय सामने लाया गया है जब हाल के सालों में प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेष रूप से NEET परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक मामलों को लेकर विवाद हुआ है, इन घटनाओं के बाद देशभर में छात्रों ने प्रदर्शन किए और विपक्षी दलों ने भी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा जवाबदेही बढ़ाने की मांग उठाई.
6. प्रस्तावित संशोधन लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 को और प्रभावी बनाने की दिशा में कदम माने जा रहे हैं. यह कानून जून 2024 में सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, संगठित नकल, प्रतिरूपण (इम्पर्सनेशन) और परीक्षा प्रणाली से जुड़े कंप्यूटर नेटवर्क में छेड़छाड़ जैसे अपराधों पर रोक लगाने के उद्देश्य से लागू किया गया था.
7. मौजूदा कानून के तहत पेपर लीक या परीक्षा धोखाधड़ी के दोषी व्यक्तियों को 3 से 5 साल तक की कैद और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. संगठित पेपर लीक गिरोहों में शामिल लोगों के लिए 5 से 10 साल तक की कैद और कम से कम 1 करोड़ रुपये जुर्माने का प्रावधान पहले से मौजूद है.
8. सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार ऐसा व्यापक कानूनी ढांचा तैयार करना चाहती है, जिससे अलग-अलग राज्यों में सक्रिय संगठित पेपर लीक नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई की जा सके.




